बिहार में जमीन की खरीद-बिक्री और सरकारी राजस्व कार्यों में फर्जी दस्तावेज लगाकर प्रशासन को गुमराह करने वालों की अब खैर नहीं है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस तरह की धोखाधड़ी पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य के सभी अंचलाधिकारियों (CO) को कड़े निर्देश जारी किए हैं।
विभाग के सचिव गोपाल मीणा ने स्पष्ट कर दिया है कि नामांतरण, दाखिल-खारिज, परिमार्जन और भू-अर्जन से जुड़े मामलों में यदि कोई व्यक्ति जाली या कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत करता है, तो उसके खिलाफ अनिवार्य रूप से प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाएगी।
अधिकारी भी नहीं बचेंगे, लापरवाही पर होगी कार्रवाई
सरकार ने यह फैसला ‘भूमि सुधार जन कल्याण संवाद’ के दौरान सामने आई गंभीर अनियमितताओं के बाद लिया है। समीक्षा में पाया गया कि कई मामलों में फर्जीवाड़े की जानकारी होने के बावजूद अंचलाधिकारियों ने एफआईआर दर्ज नहीं कराई।
सचिव गोपाल मीणा ने दो टूक चेतावनी दी है कि
जाली दस्तावेजों के मामलों को दबाना या एफआईआर दर्ज न करना ‘घोर लापरवाही और कदाचार’ माना जाएगा।
ऐसे मामलों में संबंधित अंचलाधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे और उनके खिलाफ भी विभागीय व विधिक कार्रवाई की जा सकती है।
BNS की सख्त धाराओं में दर्ज होंगे केस
फर्जीवाड़ा करने वालों पर अब भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा। विभाग ने जिन धाराओं का उल्लेख किया है, वे इस प्रकार हैं—
- कूटरचना (Forgery): धारा 336(3) एवं 336(4)
- धोखाधड़ी (Cheating): धारा 318(4)
- फर्जी दस्तावेज का प्रयोग: धारा 340(2)
- आपराधिक साजिश: धारा 61(2)(a) (परिस्थिति अनुसार)
पुराने मामलों की भी होगी समीक्षा
सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि जाली दस्तावेजों के आधार पर भविष्य में कोई आदेश पारित न किया जाए। साथ ही यदि पहले ऐसे दस्तावेजों के आधार पर कोई आदेश जारी किया गया है, तो उसकी विधि सम्मत समीक्षा कर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी और निजी जमीन के मामलों में अलग प्रक्रिया
- सरकारी जमीन से जुड़े मामलों में अंचलाधिकारी सीधे एफआईआर दर्ज कराएंगे।
- निजी जमीन विवाद में जांच के बाद पीड़ित पक्ष की अनुशंसा पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।
सरकार के इस फैसले को जमीन माफिया और दस्तावेजी जालसाजों के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई माना जा रहा है।


