बिहार के सरकारी डॉक्टरों पर कसा शिकंजा: निजी प्रैक्टिस पर लगेगी रोक, सीएम नीतीश का बड़ा आदेश; गांवों में इलाज करने पर मिलेगा ‘स्पेशल इंसेंटिव’

  • 7 निश्चय पार्ट-3: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने की ‘सुलभ स्वास्थ्य-सुरक्षित जीवन’ की समीक्षा; स्वास्थ्य विभाग को दिए सख्त निर्देश
  • बड़ा बदलाव: सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस (Private Practice) बंद करने के लिए जल्द आएगी नई नीति
  • अपग्रेड होंगे अस्पताल: प्रखंड स्वास्थ्य केंद्र बनेंगे ‘स्पेशलिटी’ और जिला अस्पताल बनेंगे ‘सुपर स्पेशलिटी’ हॉस्पिटल

द वॉयस ऑफ बिहार (पटना)

​बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था में आने वाले दिनों में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने गुरुवार (12 फरवरी 2026) को एक अहम समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य विभाग को कई बड़े निर्देश दिए हैं। सबसे बड़ी खबर यह है कि सरकार अब सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस (Private Practice) पर पूरी तरह रोक लगाने के मूड में है।

​सीएम ने ‘1 अणे मार्ग’ स्थित संकल्प सभागार में ‘7 निश्चय पार्ट-3’ के तहत ‘सुलभ स्वास्थ्य-सुरक्षित जीवन’ अभियान की समीक्षा की। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने प्रेजेंटेशन के जरिए रोडमैप पेश किया।

प्राइवेट प्रैक्टिस पर ‘फुल स्टॉप’

​समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने एक कड़ा फैसला लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने की नीति (Policy) शीघ्र लाएं

  • ​इसका सीधा मतलब है कि सरकारी अस्पताल में नौकरी करने वाले डॉक्टर अब अपने निजी क्लीनिक नहीं चला पाएंगे।
  • ​सरकार का उद्देश्य है कि डॉक्टर अस्पताल में मरीजों को पूरा समय दें और स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ हों।

गांव जाने वाले डॉक्टरों को ‘इनाम’

​सरकार जानती है कि दूर-दराज के इलाकों में डॉक्टर जाने से कतराते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए सीएम ने ‘गाजर और छड़ी’ दोनों की नीति अपनाई है।

  • प्रोत्साहन: मुख्यमंत्री ने कहा कि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों (Remote Areas) में बेहतर चिकित्सा सुनिश्चित करने के लिए वहां तैनात होने वाले चिकित्सकों को अलग से प्रोत्साहन (Incentive) देने की व्यवस्था करें।

अस्पतालों का कायाकल्प: स्पेशलिटी से सुपर स्पेशलिटी तक

​सीएम ने बिहार के स्वास्थ्य ढांचे को अपग्रेड करने का ब्लूप्रिंट भी दिया:

  1. प्रखंड स्तर: प्रखंड सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों (PHC/CHC) को विशिष्ट चिकित्सा केन्द्र (Speciality Hospital) के रूप में विकसित किया जाएगा।
  2. जिला स्तर: सभी जिला अस्पतालों को अति विशिष्ट चिकित्सा केन्द्र (Super Speciality Hospital) के रूप में अपग्रेड करने का निर्देश दिया गया है, ताकि गंभीर बीमारियों का इलाज जिले में ही हो सके।

मेडिकल कॉलेज और पीपीपी मॉडल

​बैठक में मेडिकल शिक्षा और निजी निवेश पर भी चर्चा हुई।

  • ​सीएम ने कहा कि नए मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में बेहतर पढ़ाई और इलाज के लिए लोक निजी भागीदारी (PPP Model) को प्रोत्साहित करें।
  • ​साथ ही, देश के प्रतिष्ठित निजी क्षेत्र के अस्पतालों को बिहार में अपनी शाखाएं खोलने के लिए आमंत्रित और प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया गया।

​इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, और स्वास्थ्य विभाग के तमाम बड़े अधिकारी मौजूद रहे।

  • Related Posts