बिहार को मिला ‘वॉरियर’ गवर्नर! रिटायर्ड ले. जनरल सैयद अता हसनैन ने ली शपथ; कश्मीर के ‘हीरो’ अब राजभवन के सारथी

HIGHLIGHTS:

  • नया सवेरा: लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन बने बिहार के 43वें राज्यपाल।
  • शपथ ग्रहण: पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू ने लोकभवन में दिलाई पद और गोपनीयता की शपथ।
  • बड़ी बात: जनरल हसनैन ने हिंदी में ली शपथ; राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का नियुक्ति पत्र मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने पढ़ा।
  • मौजूदगी: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, दोनों डिप्टी सीएम और पूरी कैबिनेट रही गवाह; आरिफ मोहम्मद खान की ली जगह।

सरहद का रखवाला अब बिहार का ‘अभिभावक’: राजभवन में ‘जनरल’ की एंट्री!

पटना: बिहार की सियासत और प्रशासनिक गलियारे के लिए आज का दिन ऐतिहासिक रहा। शनिवार को पटना के लोकभवन में आयोजित एक भव्य समारोह में देश के जाने-माने सैन्य रणनीतिकार और 15 कोर (चिनार कोर) के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने बिहार के 43वें राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभाल लिया। आरिफ मोहम्मद खान का कार्यकाल पूरा होने के बाद केंद्र सरकार ने बिहार की कमान एक ऐसे व्यक्तित्व को सौंपी है, जिनकी पहचान केवल एक सैनिक नहीं, बल्कि एक प्रखर विचारक और सामाजिक सुधारक के रूप में भी है।

[प्रोफ़ाइल: कौन हैं राज्यपाल सैयद अता हसनैन?]

​जनरल हसनैन का करियर शौर्य और सेवा का एक बेहतरीन मिश्रण है:

क्षेत्र

अनुभव/पद

सैन्य सेवा

भारतीय सेना के सैन्य सचिव (Military Secretary) के पद से सेवानिवृत्त।

कश्मीर कनेक्शन

श्रीनगर स्थित चिनार कोर (15 Corps) के कमांडिंग-इन-चीफ रह चुके हैं।

शिक्षा

केंद्रीय कश्मीर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति (Chancellor)।

प्रबंधन

2020 से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सदस्य।

सामाजिक कार्य

कश्मीर में ‘सद्भावना’ के जरिए युवाओं को शिक्षा और खेल से जोड़ा।

नीतीश कैबिनेट की मौजूदगी और ‘हिंदी’ में शपथ का संदेश

​शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उपस्थिति और जनरल हसनैन द्वारा हिंदी में शपथ लेना एक बड़ा संकेत है।

  • सांस्कृतिक जुड़ाव: एक सैन्य पृष्ठभूमि के अधिकारी का हिंदी में शपथ लेना बिहार की जनता के साथ सीधे जुड़ाव की कोशिश मानी जा रही है।
  • गरिमामय उपस्थिति: उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा और वरिष्ठ मंत्री विजय चौधरी सहित तमाम दिग्गज इस पल के गवाह बने। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने औपचारिक रूप से राष्ट्रपति का वारंट पढ़कर सुनाया।

कश्मीर के ‘हीरो’ से बिहार को क्या हैं उम्मीदें?

​रिटायरमेंट के बाद भी जनरल हसनैन राष्ट्रीय सुरक्षा और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दों पर मुखर रहे हैं। कश्मीर में उन्होंने बंदूक की जगह ‘किताब और खेल’ को बढ़ावा देकर पत्थरबाजी के दौर को खत्म करने में बड़ी भूमिका निभाई थी। अब बिहार में, जहाँ शिक्षा और आपदा प्रबंधन (बाढ़-सुखाड़) बड़ी चुनौतियां हैं, उनका NDMA और शैक्षणिक अनुभव राज्य के लिए ‘गेम-चेंजर’ साबित हो सकता है।

VOB का नजरिया: राजभवन में ‘रणनीति’ और ‘अनुशासन’ का नया दौर!

बिहार को एक ऐसे राज्यपाल की जरूरत थी जो संवैधानिक मर्यादा के साथ-साथ राज्य की जमीनी चुनौतियों (खासकर उच्च शिक्षा और आपदा) को समझ सके। जनरल हसनैन का रिकॉर्ड बताता है कि वे केवल ‘फाइल’ देखने वाले गवर्नर नहीं होंगे, बल्कि सक्रिय भागीदारी में यकीन रखते हैं। नीतीश कुमार के ‘सुशासन’ और जनरल के ‘अनुशासन’ का यह मेल बिहार के विकास को कितनी नई ऊंचाई पर ले जाएगा, इस पर सबकी नजर रहेगी।

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