बिहार में पेट्रोल, डीजल और LPG की बढ़ती मांग के बीच तेल कंपनियां अलर्ट, 24 घंटे जारी है सप्लाई नेटवर्क

पटना, 21 मई 2026। बिहार में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की मांग में अचानक आई तेज़ बढ़ोतरी के बीच सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने राज्यभर में निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां लगातार 24 घंटे निगरानी और समन्वय के साथ काम कर रही हैं ताकि किसी भी जिले में ईंधन संकट जैसी स्थिति उत्पन्न न हो।

तेल कंपनियों के अनुसार हाल के दिनों में बिहार समेत देश के कई हिस्सों में पेट्रोलियम उत्पादों की मांग में असामान्य वृद्धि दर्ज की गई है। इसके पीछे मुख्य कारण कृषि गतिविधियों का तेज होना, फसल कटाई का मौसम और खुदरा बाजार में बढ़ती खरीदारी को माना जा रहा है। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के पेट्रोल पंपों पर अपेक्षाकृत कम कीमत होने के कारण बड़ी संख्या में ग्राहक सरकारी आउटलेट्स की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे मांग और अधिक बढ़ गई है।

तेल कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि राज्य में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और आम लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। कंपनियों ने लोगों से अपील की है कि वे सामान्य खरीदारी जारी रखें और अनावश्यक रूप से ईंधन जमा करने से बचें। कंपनियों का कहना है कि घबराहट में खरीदारी करने से अस्थायी दबाव जरूर बनता है, लेकिन आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सामान्य है।

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने बताया कि बिहार में उनके विशाल नेटवर्क के जरिए लगातार आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। राज्य में कुल 3697 रिटेल आउटलेट्स सक्रिय हैं, जिनमें 3590 सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के और 107 निजी क्षेत्र के आउटलेट शामिल हैं। इसके अलावा राज्य में 8 बड़े ऑयल डिपो और टर्मिनल केंद्र भी संचालित हैं, जहां से विभिन्न जिलों तक ईंधन की आपूर्ति की जाती है।

आंकड़ों के अनुसार बिहार में प्रतिदिन लगभग 5700 किलोलीटर पेट्रोल और 9000 किलोलीटर डीजल की आपूर्ति की जा रही है। तेल कंपनियों का कहना है कि बढ़ती मांग के बावजूद सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखा गया है। इसके लिए परिवहन नेटवर्क, डिपो, पाइपलाइन सिस्टम और टर्मिनल लगातार 24 घंटे काम कर रहे हैं।

तेल कंपनियों के अधिकारियों के अनुसार कई जिलों में कृषि कार्यों के कारण डीजल की मांग तेजी से बढ़ी है। खेतों में सिंचाई, कटाई और मशीनों के संचालन के लिए बड़ी मात्रा में डीजल की खपत हो रही है। इसके अलावा परिवहन और व्यावसायिक गतिविधियों में भी वृद्धि देखी जा रही है। यही वजह है कि कंपनियों ने आपूर्ति व्यवस्था को और अधिक सक्रिय कर दिया है।

सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि संस्थागत और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं का झुकाव भी अब खुदरा आउटलेट्स की ओर बढ़ा है। कई निजी आपूर्तिकर्ताओं की तुलना में सरकारी पेट्रोल पंपों पर दरें कम होने से बड़ी संख्या में ग्राहक सार्वजनिक क्षेत्र के आउटलेट्स से ईंधन खरीद रहे हैं। इससे कुछ स्थानों पर मांग सामान्य से अधिक हो गई है।

एलपीजी गैस की उपलब्धता को लेकर भी कंपनियों ने स्थिति स्पष्ट की है। तेल कंपनियों के मुताबिक बिहार में लगभग 2000 एलपीजी वितरकों के माध्यम से गैस सिलेंडरों की आपूर्ति नियमित रूप से जारी है। होम डिलीवरी नेटवर्क भी सामान्य रूप से कार्य कर रहा है और उपभोक्ताओं तक समय पर सिलेंडर पहुंचाए जा रहे हैं।

हालांकि कंपनियों ने यह भी बताया कि वर्तमान में एलपीजी आपूर्ति में लगभग 4.5 दिनों का बैकलॉग यानी पेंडेंसी है। अधिकारियों का कहना है कि बढ़ती मांग और लगातार बुकिंग के कारण यह स्थिति बनी है, लेकिन इसे जल्द सामान्य करने के लिए अतिरिक्त प्रयास किए जा रहे हैं। कंपनियों ने भरोसा दिलाया कि उपभोक्ताओं को गैस आपूर्ति में किसी बड़े संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।

तेल कंपनियों ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना और PAHAL योजना से जुड़े उपभोक्ताओं को महत्वपूर्ण सलाह भी जारी की है। कंपनियों ने कहा कि सभी लाभार्थी 30 जून 2026 तक अपना e-KYC पूरा कर लें ताकि उन्हें सब्सिडी का लाभ लगातार मिलता रहे। कंपनियों का कहना है कि e-KYC प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर भविष्य में सब्सिडी वितरण में परेशानी हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी और कृषि सीजन के दौरान ईंधन की मांग में बढ़ोतरी सामान्य बात है, लेकिन इस बार कई अतिरिक्त कारणों ने मांग को और बढ़ा दिया है। सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों और लोगों की अतिरिक्त खरीदारी की प्रवृत्ति ने भी कुछ क्षेत्रों में दबाव बढ़ाया है। हालांकि सरकारी कंपनियों का दावा है कि वे स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

तेल कंपनियों ने कहा कि वे राज्य प्रशासन के साथ लगातार समन्वय में हैं। जिला प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर सप्लाई चेन की निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी जिले में कृत्रिम कमी की स्थिति न बने। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टैंकरों और स्टॉक की व्यवस्था भी की जा रही है।

कंपनियों ने यह भी कहा कि उनके स्टॉक की स्थिति की नियमित समीक्षा की जा रही है। लॉजिस्टिक्स और वितरण नेटवर्क को लगातार अपडेट किया जा रहा है ताकि बढ़ती मांग को कुशलतापूर्वक पूरा किया जा सके। रेलवे, सड़क परिवहन और पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए ईंधन की आवाजाही को तेज किया गया है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी तेल कंपनियों के मजबूत नेटवर्क के कारण बिहार जैसे बड़े राज्य में आपूर्ति व्यवस्था को बनाए रखना संभव हो पा रहा है। यदि समय पर निगरानी और समन्वय नहीं हो तो बढ़ती मांग के दौरान कई जगह संकट जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

तेल कंपनियों ने आम लोगों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत स्रोतों से मिली जानकारी पर ही भरोसा करें। कंपनियों ने कहा कि ईंधन की उपलब्धता को लेकर किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य और देशभर में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और आम उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की घबराहट की आवश्यकता नहीं है।

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