
बिहार सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को लेकर बड़ा और सख्त संदेश दिया है। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि खाद्यान्न वितरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता या भ्रष्टाचार अब किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभागीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को साफ निर्देश दिया गया कि पात्र लाभुकों तक समय पर, निर्धारित मात्रा में और गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार ने संकेत दिया है कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और पीडीएस विक्रेताओं के खिलाफ तत्काल कठोर कार्रवाई की जाएगी।
24 जून 2026 को पटना में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभागीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य के सभी जिलों के जिला आपूर्ति पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी, सहायक जिला आपूर्ति पदाधिकारी, पणन पदाधिकारी और आपूर्ति निरीक्षक शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य राज्य में खाद्यान्न वितरण व्यवस्था की समीक्षा करना और जमीनी स्तर पर सामने आ रही समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना था।
बैठक के दौरान खाद्यान्न वितरण प्रणाली से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इनमें राशन कार्ड निर्माण से जुड़े लंबित आवेदन, संदिग्ध राशन कार्डों की जांच, जन वितरण प्रणाली दुकानों की रिक्तियां तथा अन्य प्रशासनिक कार्य शामिल रहे। विभाग ने विशेष रूप से उन जिलों पर ध्यान केंद्रित किया जहां शिकायतों की संख्या अधिक रही है या वितरण व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
सचिव दीपक आनंद ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि खाद्यान्न वितरण में किसी भी तरह की देरी स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सरकार गरीब और जरूरतमंद परिवारों को खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है और इस व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही सीधे लाभुकों के अधिकारों का हनन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर पात्र परिवार तक निर्धारित समय पर राशन पहुंचना चाहिए।
बैठक में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही पर विशेष जोर दिया गया। विभाग ने साफ कहा कि पीडीएस व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है ताकि किसी भी प्रकार की हेराफेरी, पक्षपात या भ्रष्टाचार की गुंजाइश न रहे। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वितरण प्रक्रिया की निगरानी मजबूत की जाए और प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही तय हो।
सभी जिलों में विशेष अभियान चलाकर जन वितरण प्रणाली दुकानों का सघन निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया। अधिकारियों से कहा गया कि वे नियमित रूप से दुकानों का निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि राशन वितरण नियमानुसार हो रहा है या नहीं। निरीक्षण के दौरान यदि कम तौल, अनियमित वितरण, राशन की कालाबाजारी या अन्य किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है, तो संबंधित विक्रेता के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए।
सरकार ने विशेष रूप से कालाबाजारी के मामलों को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखने का संकेत दिया है। विभाग का कहना है कि गरीबों के लिए निर्धारित खाद्यान्न को अवैध रूप से बाजार में बेचना या उसकी मात्रा में कटौती करना न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि सामाजिक रूप से भी गंभीर अनियमितता है। ऐसे मामलों में लाइसेंस रद्द करने से लेकर कानूनी कार्रवाई तक के निर्देश दिए गए हैं।
राशन कार्ड निर्माण से संबंधित लंबित आवेदनों पर भी बैठक में गंभीर चर्चा हुई। सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लंबित आवेदनों का शीघ्र निपटारा सुनिश्चित किया जाए ताकि पात्र परिवारों को योजना का लाभ मिलने में देरी न हो। कई जिलों में आवेदन लंबित रहने की शिकायतें सामने आई थीं, जिस पर विभाग ने नाराजगी जताई।
संदिग्ध राशन कार्डों की जांच में भी तेजी लाने का निर्देश दिया गया। विभाग का मानना है कि अपात्र लाभुकों द्वारा गलत तरीके से राशन कार्ड बनवाकर योजना का लाभ उठाना वास्तविक जरूरतमंदों के अधिकारों पर असर डालता है। इसलिए ऐसे मामलों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा गया है। अधिकारियों को डेटा सत्यापन और फील्ड जांच दोनों स्तरों पर सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया।
जन वितरण प्रणाली दुकानों में रिक्तियों का मुद्दा भी बैठक में प्रमुखता से उठा। कई स्थानों पर पीडीएस दुकानों के रिक्त रहने के कारण लाभुकों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। विभाग ने निर्देश दिया कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी रिक्तियों को भरा जाए ताकि वितरण व्यवस्था प्रभावित न हो। इससे ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लाभुकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
जन शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर भी जोर दिया गया। सचिव ने कहा कि यदि लाभुकों की शिकायतों का समय पर समाधान नहीं होता तो इससे सरकार की योजनाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। इसलिए सभी जिलों को शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने और शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में पीडीएस प्रणाली करोड़ों लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा का आधार है। गरीब, श्रमिक, निम्न आय वर्ग और ग्रामीण परिवारों के लिए यह व्यवस्था जीवनरेखा का काम करती है। ऐसे में वितरण व्यवस्था में सुधार और निगरानी मजबूत होना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
राज्य सरकार की यह सख्ती संकेत देती है कि आने वाले समय में खाद्यान्न वितरण व्यवस्था पर और कड़ी निगरानी रखी जाएगी। यदि निर्देशों का प्रभावी पालन होता है, तो इससे लाभुकों तक राशन वितरण अधिक पारदर्शी और सुचारु हो सकेगा। फिलहाल विभाग का स्पष्ट संदेश यही है कि खाद्यान्न वितरण में लापरवाही या भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ अब किसी भी स्तर पर नरमी नहीं बरती जाएगी।


