बाढ़ से पहले जल संसाधन विभाग अलर्ट, सारण और वैशाली में कटावरोधी कार्यों का सचिव ने किया निरीक्षण, समयसीमा में काम पूरा करने के निर्देश

पटना। बिहार में संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए जल संसाधन विभाग ने तैयारियों को अंतिम चरण में पहुंचा दिया है। मानसून की सक्रियता और कई नदियों के जलस्तर में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए विभाग राज्य के संवेदनशील इलाकों में बाढ़ सुरक्षा एवं कटावरोधी कार्यों की लगातार निगरानी कर रहा है। इसी क्रम में बुधवार को जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने सारण और वैशाली जिलों का दौरा कर बाढ़ सुरक्षा एवं कटावरोधी परियोजनाओं का स्थल निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी कार्यों को उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए।

जल संसाधन विभाग के अनुसार, बाढ़ पूर्व तैयारियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विभागीय स्तर पर लगातार निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। सचिव स्वयं संवेदनशील स्थलों का दौरा कर कार्यों की प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं ताकि मानसून के दौरान किसी भी प्रकार की आपदा की स्थिति में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

निरीक्षण के दौरान सचिव सबसे पहले सारण जिले के सोनपुर प्रखंड अंतर्गत सबलपुर पछियारी टोला पहुंचे। यहां गंगा नदी के किनारे चल रहे कटावरोधी कार्यों का विस्तृत निरीक्षण किया गया। उन्होंने बोल्डर एप्रोन निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि यह कार्य हर हाल में अगले दस दिनों के भीतर पूरा कर लिया जाए। इसके अलावा नदी के किनारे स्लोप पिचिंग और अन्य सभी शेष कार्य भी इसी महीने के भीतर पूर्ण करने का आदेश दिया गया।

सचिव ने निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि बाढ़ सुरक्षा से जुड़े किसी भी कार्य में गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा सकता। निर्माण एजेंसियों और विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि सभी तकनीकी मानकों का पालन करते हुए समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा किया जाए।

सारण के बाद सचिव वैशाली जिले के सहदेई बुजुर्ग प्रखंड स्थित गनियारी गांव पहुंचे। यहां गंगा नदी के कटाव से गांव और राष्ट्रीय राजमार्ग-122B की सुरक्षा के लिए चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया गया। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना के तहत बोल्डर एप्रोन और स्लोप पिचिंग का कार्य अंतिम चरण में है। निरीक्षण के दौरान सचिव को जानकारी दी गई कि शेष कार्य एक सप्ताह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। इस पर उन्होंने निर्धारित समय के भीतर परियोजना पूरी करने और गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए।

जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2025 की बाढ़ के दौरान बिहार के कई इलाके अत्यधिक संवेदनशील श्रेणी में रहे थे। इन क्षेत्रों में नदी कटाव और बाढ़ का प्रभाव अधिक देखा गया था। इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष बाढ़ पूर्व सुरक्षा कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा रहा है ताकि संभावित नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।

विभाग के अनुसार, पिछले वर्ष जिन स्थानों पर सबसे अधिक खतरा देखा गया था, उनमें गंडक नदी के किनारे सारण जिले के मकेर प्रखंड का हैजलपुर गांव, गंगा नदी के किनारे भागलपुर जिले के नवगछिया स्थित इस्माइलपुर-बिंदटोली तटबंध, वैशाली जिले का गनियारी गांव, सारण जिले का सबलपुर पछियारी टोला तथा भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड का जवईनियाँ गांव प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन क्षेत्रों में नदी कटाव और बाढ़ से लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था।

जल संसाधन विभाग ने बताया कि हैजलपुर गांव में कटावरोधी कार्य पहले ही पूरा कर लिया गया है। वहीं इस्माइलपुर-बिंदटोली, गनियारी, सबलपुर पछियारी टोला और जवईनियाँ सहित अन्य संवेदनशील स्थलों पर चल रहे कार्य इस महीने के अंत तक पूरे करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विभाग का कहना है कि सभी परियोजनाओं की नियमित निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी स्तर पर देरी न हो।

हाल के दिनों में सचिव ने भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड स्थित जवईनियाँ गांव और भागलपुर जिले के इस्माइलपुर-बिंदटोली तटबंध का भी निरीक्षण किया था। इन दोनों परियोजनाओं में भी कार्यों की प्रगति की समीक्षा कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए थे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बाढ़ पूर्व तैयारियों की निगरानी लगातार जारी रहेगी और सभी परियोजनाओं को समय पर पूरा कराया जाएगा।

जल संसाधन विभाग के अनुसार, वर्ष 2026 की बाढ़ अवधि से पहले राज्यभर में व्यापक स्तर पर कटावरोधी और बाढ़ सुरक्षा कार्य कराए जा रहे हैं। गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला बलान, कोसी, महानंदा और गंगा सहित विभिन्न नदी बेसिनों में कुल 381 स्थलों पर 1115.08 करोड़ रुपये की लागत से कटावरोधी परियोजनाओं का कार्यान्वयन किया जा रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य तटबंधों की मजबूती बढ़ाना, नदी कटाव को रोकना और बाढ़ के दौरान आबादी तथा कृषि भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार भौगोलिक रूप से देश के सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित राज्यों में शामिल है। राज्य का लगभग 68.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है, जो कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 73 प्रतिशत है। बिहार के 38 जिलों में से 29 जिले प्रत्यक्ष रूप से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की श्रेणी में आते हैं। नेपाल और अन्य राज्यों से आने वाली नदियों में जलस्तर बढ़ने का प्रभाव सबसे पहले बिहार के कई जिलों पर पड़ता है, जिससे हर वर्ष बाढ़ और कटाव की चुनौती उत्पन्न होती है।

इसी कारण जल संसाधन विभाग प्रत्येक वर्ष मानसून से पहले संवेदनशील क्षेत्रों में कटावरोधी और बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं को प्राथमिकता देता है। विभाग का मानना है कि समय पर किए गए सुरक्षात्मक कार्यों से तटबंधों को मजबूत किया जा सकता है और बाढ़ के दौरान जन-धन की हानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

फिलहाल विभाग का पूरा ध्यान सभी निर्माण कार्यों को निर्धारित समय के भीतर पूरा कराने पर है। सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी परियोजना में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। साथ ही निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों का पूरी तरह पालन किया जाए ताकि आगामी बाढ़ के दौरान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। बिहार में मानसून के सक्रिय होने के साथ ही जल संसाधन विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और संभावित बाढ़ से निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

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