पटना | 28 फरवरी, 2026: वित्तीय वर्ष की समाप्ति और होली के त्योहार के बीच बिहार सरकार के वित्त विभाग ने कोषागारों (Treasuries) में बढ़ते काम के दबाव और बिलों को लेकर उत्पन्न संशय को दूर करने के लिए एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। विशेष सचिव मुकेश कुमार लाल द्वारा जारी पत्र के अनुसार, 27 फरवरी को जारी दिशा-निर्देशों को तत्काल प्रभाव से निरस्त (Cancel) कर दिया गया है।
क्यों पड़ी आदेश रद्द करने की जरूरत?
वित्त विभाग ने पाया कि पिछले पत्र (संख्या-2182) से राज्य के कोषागारों और निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों (DDOs) के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी:
- वेतन-पेंशन की प्राथमिकता: होली के कारण सरकार ने फरवरी का वेतन 24 फरवरी से ही देने का निर्णय लिया था।
- भ्रम की स्थिति: 27 फरवरी के आदेश का उद्देश्य वेतन और पेंशन बिलों को प्राथमिकता देना था, लेकिन इससे यह संशय पैदा हो गया कि क्या अन्य बिल (जैसे स्कीम, बकाया या आकस्मिक विपत्र) पारित किए जा सकते हैं या नहीं।
- समाधान: इस भ्रम को समाप्त करने के लिए विभाग ने प्राथमिकता संबंधी उस विशेष पत्र को ही रद्द कर दिया है।
अब किस नियम से होगा काम?
वित्त विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अब सभी कोषागारों में 6 फरवरी 2026 को जारी मूल दिशा-निर्देश (पत्रांक-1354) ही प्रभावी रहेंगे:
- वित्तीय अनुशासन: वर्ष के अंत में बिलों की भारी भीड़ को देखते हुए वित्तीय अनुशासन और व्यय नियंत्रण का कड़ाई से पालन होगा।
- सम्यक जांच: फरवरी और मार्च के दौरान प्रस्तुत होने वाले सभी बिलों (वेतन, स्कीम, बकाया आदि) की गहन जांच सुनिश्चित की जाएगी।
- स्थिरता: 6 फरवरी के पत्र के प्रावधानों के तहत ही निधि की निकासी और व्यय सुनिश्चित किया जाएगा।
वित्त विभाग की समयरेखा (Timeline of Decisions)
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तिथि |
घटनाक्रम |
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06-02-2026 |
वित्तीय अनुशासन और व्यय नियंत्रण हेतु मूल दिशा-निर्देश जारी। |
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24-02-2026 |
होली को देखते हुए फरवरी के वेतन भुगतान की शुरुआत। |
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27-02-2026 |
वेतन-पेंशन को प्राथमिकता देने का आदेश (जिससे भ्रम बढ़ा)। |
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28-02-2026 |
वर्तमान आदेश: 27 फरवरी का पत्र निरस्त, 6 फरवरी का नियम बहाल। |
VOB का नजरिया: पारदर्शिता और स्पष्टता की जीत
वित्तीय वर्ष का अंतिम महीना सरकारी मशीनरी के लिए ‘अग्निपरीक्षा’ जैसा होता है। एक तरफ होली की छुट्टियां और दूसरी तरफ मार्च क्लोजिंग का दबाव। ऐसे में अगर किसी आदेश से कोषागारों में काम रुकने या भ्रम पैदा होने की स्थिति आती है, तो उसका तुरंत निवारण जरूरी था। वित्त विभाग का यह कदम दर्शाता है कि सरकार वित्तीय अनुशासन और कर्मचारियों के हितों (वेतन) के साथ-साथ विकास योजनाओं (स्कीम बिल) के सुचारू संचालन के बीच संतुलन बनाना चाहती है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


