बिहार को फिल्म शूटिंग हब बनाने की तैयारी, नए लोकेशनों और फिल्म नीति पर सरकार का बड़ा फोकस

पटना। बिहार सरकार अब राज्य को देश के प्रमुख फिल्म शूटिंग गंतव्यों में शामिल करने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रही है। कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में फिल्म निर्माण, नई फिल्म नीति, विरासत संरक्षण और सांस्कृतिक विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता कला एवं संस्कृति मंत्री ने की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बिहार के नए और आकर्षक स्थलों को फिल्म शूटिंग के लिए विकसित कर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जाए।

सरकार का मानना है कि बिहार में प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक विरासत, धार्मिक स्थल और सांस्कृतिक विविधता की भरपूर संभावनाएं मौजूद हैं, जिन्हें अब तक फिल्म उद्योग में पूरी तरह उपयोग नहीं किया गया। ऐसे में राज्य सरकार चाहती है कि आने वाले समय में बिहार फिल्म निर्माण और शूटिंग के लिए निर्माताओं की पहली पसंद बने।

बैठक में और बिहार विरासत विकास समिति से जुड़े अधिकारियों ने विभागीय योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें फिल्म नीति, शूटिंग परमिशन, विरासत स्थलों के संरक्षण और सांस्कृतिक गतिविधियों के विस्तार को लेकर कई सुझाव सामने आए।

मंत्री प्रमोद कुमार ने अधिकारियों से कहा कि बिहार के कई ऐसे स्थल हैं जिनमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिल्म शूटिंग की क्षमता है। उन्होंने निर्देश दिया कि राज्य के पर्यटन और सांस्कृतिक महत्व वाले नए स्थलों की पहचान कर उन्हें विभागीय वेबसाइट पर शामिल किया जाए ताकि देश-विदेश के फिल्म निर्माता बिहार की लोकेशन के बारे में आसानी से जानकारी प्राप्त कर सकें।

सूत्रों के अनुसार सरकार बिहार के ऐतिहासिक किलों, प्राचीन मंदिरों, बौद्ध स्थलों, नदियों, पहाड़ी इलाकों और ग्रामीण परिवेश को फिल्म शूटिंग के लिए विशेष रूप से प्रमोट करने की तैयारी में है। राजगीर, नालंदा, बोधगया, विक्रमशिला, वाल्मीकिनगर, कैमूर और मिथिला क्षेत्र जैसे इलाकों को संभावित फिल्म शूटिंग हब के रूप में देखा जा रहा है।

बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि यदि बिहार में बड़े स्तर पर फिल्म शूटिंग शुरू होती है तो इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। फिल्म उद्योग से जुड़े तकनीकी, रचनात्मक और प्रबंधन क्षेत्रों में स्थानीय प्रतिभाओं को काम मिल सकेगा। होटल, ट्रांसपोर्ट, पर्यटन और छोटे व्यवसायों को भी इसका सीधा लाभ मिलने की संभावना जताई गई।

मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार केवल फिल्म शूटिंग तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि बिहार में फिल्म शिक्षा और फिल्म निर्माण संस्कृति को भी मजबूत करना चाहती है। इसी उद्देश्य से कला एवं संस्कृति विभाग की छात्रवृत्ति और सहायता योजनाओं के तहत फिल्म अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों के साथ विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।

उन्होंने कहा कि फिल्म शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों के अनुभव और सुझाव बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि युवाओं को सीधे नीति निर्माण और विभागीय योजनाओं से जोड़ा जाए तो भविष्य में बेहतर परिणाम सामने आ सकते हैं। सरकार चाहती है कि बिहार के युवा केवल दर्शक नहीं बल्कि फिल्म उद्योग का सक्रिय हिस्सा बनें।

विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत के कई राज्यों ने फिल्म नीति के जरिए बड़े फिल्म उद्योग को आकर्षित किया है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों ने फिल्म शूटिंग के लिए विशेष सुविधाएं और सब्सिडी देकर कई बड़े प्रोजेक्ट हासिल किए हैं। अब बिहार भी इसी दिशा में अपनी रणनीति मजबूत कर रहा है।

जानकारों के अनुसार बिहार की सबसे बड़ी ताकत उसकी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विविधता है। यहां प्राचीन विश्वविद्यालयों से लेकर धार्मिक तीर्थस्थल, ग्रामीण जीवन से लेकर आधुनिक शहरी परिवेश तक हर तरह की लोकेशन उपलब्ध है। यदि इन्हें व्यवस्थित तरीके से विकसित और प्रचारित किया जाए तो राज्य फिल्म उद्योग के लिए बड़ा केंद्र बन सकता है।

बैठक में विरासत संरक्षण को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। सरकार का मानना है कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों का संरक्षण केवल पर्यटन के लिए ही नहीं बल्कि फिल्म उद्योग के लिए भी जरूरी है। यदि विरासत स्थलों को बेहतर तरीके से संरक्षित और विकसित किया जाए तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म निर्माताओं को आकर्षित कर सकते हैं।

अधिकारियों ने बताया कि विभाग की ओर से कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है, जिनका उद्देश्य सांस्कृतिक धरोहरों को सुरक्षित रखना और उन्हें आम लोगों तक पहुंचाना है। साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बिहार की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने की योजना भी तैयार की जा रही है।

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि बिहार की लोक कला, लोक संगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक संस्कृति को फिल्मों और डिजिटल कंटेंट के माध्यम से नई पहचान दी जा सकती है। इससे राज्य की सांस्कृतिक छवि मजबूत होगी और स्थानीय कलाकारों को भी बड़ा मंच मिलेगा।

फिल्म विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बिहार सरकार शूटिंग परमिशन प्रक्रिया को सरल बनाती है और फिल्म निर्माताओं को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराती है, तो आने वाले वर्षों में राज्य में बड़े पैमाने पर शूटिंग गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इससे बिहार की अर्थव्यवस्था और पर्यटन उद्योग दोनों को लाभ होगा।

बैठक में विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियों को जन-जन तक पहुंचाने की रणनीति पर भी विचार किया गया। सरकार चाहती है कि कला और संस्कृति केवल सरकारी कार्यक्रमों तक सीमित न रहे बल्कि युवाओं और आम नागरिकों की भागीदारी से एक जनआंदोलन का रूप ले।

इस अवसर पर और सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मंत्री को विभिन्न परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिहार सरकार अपनी नई फिल्म नीति और शूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को प्रभावी ढंग से लागू करती है तो राज्य आने वाले समय में फिल्म और डिजिटल कंटेंट निर्माण का बड़ा केंद्र बन सकता है। इससे न केवल बिहार की सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती मिलेगी बल्कि युवाओं के लिए रोजगार और रचनात्मक अवसरों के नए रास्ते भी खुलेंगे।

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