
पटना | 5 नवंबर 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में 121 सीटों पर कल यानी 6 नवंबर को मतदान होना है। इस बार चुनावी चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र हैं 18 से 29 साल के युवा मतदाता, जिन्हें अब ‘जेन-जी वोटर’ कहा जा रहा है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, ये युवा मतदाता कुल वोटरों का लगभग एक चौथाई हिस्सा हैं — यानी बिहार की राजनीति में अब निर्णायक भूमिका उनकी है।
कहां हैं सबसे ज्यादा जेन-जी वोटर
- बेगूसराय जिले में सबसे अधिक जेन-जी वोटर हैं — कुल मतदाताओं का 25.16% हिस्सा।
- मधेपुरा में यह आंकड़ा 24.66%, और खगड़िया में 24.29% है।
- वहीं, पटना जिले में इनकी हिस्सेदारी सबसे कम 18.45% है।
शहरी इलाकों में युवा मतदाता डिजिटल रूप से अधिक सक्रिय हैं। भले ही उनकी संख्या कम हो, लेकिन सोशल मीडिया पर उनकी राय चुनावी नैरेटिव को प्रभावित करने की क्षमता रखती है।
दरभंगा में सबसे ज्यादा नए मतदाता
दरभंगा जिले में 18-19 साल के 62,127 नए वोटर दर्ज हुए हैं।
यहां की 10 सीटों पर इस बार एनडीए और महागठबंधन के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है। 2020 के चुनाव में नौ सीटें एनडीए के पास थीं, जबकि राजद सिर्फ एक सीट जीत सकी थी।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जेन-जी वोटर इस समीकरण को कितना बदलते हैं।
मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर में भी निर्णायक भूमिका
- मुजफ्फरपुर की 11 सीटों पर जेन-जी वोटर औसतन 21.15% हैं।
- समस्तीपुर में यह आंकड़ा 23.89% तक पहुंचता है।
इन जिलों में कॉलेज और विश्वविद्यालयों की अधिकता के कारण युवा राजनीतिक रूप से जागरूक और मुखर हैं। सोशल मीडिया कैंपेन, कॉलेज डिबेट और कैफे चर्चाओं में इनकी भागीदारी से चुनावी माहौल और रंगीन हो गया है।
रोजगार, शिक्षा और भ्रष्टाचार हैं मुख्य मुद्दे
जेन-जी मतदाता अब जाति या धर्म से ऊपर उठकर रोजगार, शिक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी और पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर ध्यान दे रहे हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव की तुलना में इस बार युवा मतदाताओं की संख्या में 15% की वृद्धि हुई है। यानी हर सीट पर युवा वोट किसी भी उम्मीदवार की जीत-हार तय कर सकते हैं।
“मेरा पहला वोट, देश के नाम” अभियान
चुनाव आयोग ने पहली बार वोट डालने वाले युवाओं के लिए “मेरा पहला वोट, देश के नाम” अभियान शुरू किया है। कॉलेज परिसरों में मतदाता जागरूकता कार्यक्रम, और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ऑनलाइन कैम्पेन चलाया जा रहा है ताकि युवा मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।
राजनीतिक दलों की रणनीति में युवा केंद्र में
सभी प्रमुख दल अब अपने प्रचार अभियान में युवा चेहरे और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर जोड़ रहे हैं। जेन-जी वोटर अब ‘साइलेंट गेम चेंजर’ बन गए हैं — जो पार्टी नहीं, बल्कि अपनी उम्मीदों और मुद्दों पर वोट देते हैं।
निष्कर्ष: जब युवा जागते हैं, बदलाव तय होता है
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 सिर्फ राजनीतिक दलों की परीक्षा नहीं, बल्कि उस नई पीढ़ी की भी परीक्षा है, जो अब अपने भविष्य के फैसले खुद लेना चाहती है। जेन-जी वोटरों का यह उभार लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है — क्योंकि जब युवा जागते हैं, तो बदलाव अपने आप रास्ता ढूंढ लेता है।


