
पटना: बिहार सरकार ने शिक्षकों के तबादला नियमों में बदलाव करते हुए दिव्यांग शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। नई स्थानांतरण नीति के तहत दिव्यांग शिक्षकों को अलग-अलग श्रेणियों में प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही गंभीर बीमारियों से पीड़ित शिक्षकों को भी वरीयता का लाभ मिलेगा।
दिव्यांग शिक्षकों के लिए तीन श्रेणियां
शिक्षा विभाग ने दिव्यांग शिक्षकों को दिव्यांगता के प्रतिशत के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा है।
- 80 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले शिक्षकों को पहली श्रेणी में रखकर 20 वरीयता अंक दिए जाएंगे।
- 60 से 79 प्रतिशत दिव्यांगता वाले शिक्षकों को दूसरी श्रेणी में 15 अंक मिलेंगे।
- 40 से 59 प्रतिशत दिव्यांगता वाले शिक्षकों को तीसरी श्रेणी में 10 अंक दिए जाएंगे।
गंभीर बीमारियों से पीड़ित शिक्षकों को भी लाभ
नई नीति में गंभीर बीमारियों से ग्रसित शिक्षकों को भी सर्वोच्च वरीयता श्रेणी में शामिल किया गया है। इसमें कैंसर, ओपन हार्ट सर्जरी, अंग प्रत्यारोपण, एकल किडनी, किडनी प्रत्यारोपण, डायलिसिस, ब्रेन ट्यूमर, प्रमुख न्यूरोसर्जरी, बोन टीबी, गंभीर टीबी और पक्षाघात जैसी गंभीर बीमारियां शामिल हैं।
ऐसे मामलों में संबंधित शिक्षक को 20 वरीयता अंक दिए जाएंगे। वहीं शिक्षक के पति/पत्नी या 18 वर्ष से कम आयु की आश्रित संतान के इन बीमारियों से पीड़ित होने पर 10-10 अंक दिए जाएंगे।
तबादला प्रक्रिया में मिलेगा सीधा लाभ
शिक्षा विभाग के अनुसार, नई व्यवस्था का उद्देश्य दिव्यांग और गंभीर रूप से बीमार शिक्षकों को उनकी परिस्थितियों के अनुरूप स्थानांतरण में प्राथमिकता देना है, ताकि उन्हें कार्यस्थल तक पहुंचने और इलाज कराने में सुविधा मिल सके। नई नीति के तहत वरीयता अंकों के आधार पर तबादला प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और संवेदनशील बनाने का प्रयास किया गया है।


