
पटना। बिहार में डेंगू और चिकनगुनिया जैसी वेक्टर जनित बीमारियों पर नियंत्रण को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने इस वर्ष उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। वर्षा ऋतु की शुरुआत के बीच स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने मंगलवार को राज्य में डेंगू एवं चिकनगुनिया की रोकथाम को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में राज्यभर में चल रहे फॉगिंग अभियान, मच्छर नियंत्रण की रणनीति, निगरानी व्यवस्था, जांच सुविधाओं, अस्पतालों की तैयारियों, दवा एवं कीटनाशकों की उपलब्धता तथा जनजागरूकता कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की गई। स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मानसून के दौरान सभी जिलों में सतर्कता बनाए रखते हुए रोकथाम और उपचार की प्रत्येक व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
समीक्षा बैठक के दौरान प्रस्तुत आंकड़ों से यह स्पष्ट हुआ कि पिछले तीन वर्षों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा अपनाई गई रणनीतियों का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है। नियमित निगरानी, समय पर जांच, व्यापक जनजागरूकता अभियान, फॉगिंग और त्वरित उपचार व्यवस्था के कारण डेंगू और चिकनगुनिया दोनों ही बीमारियों के मामलों में लगातार कमी दर्ज की गई है। सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि वर्ष 2026 में 6 जुलाई तक पूरे बिहार में डेंगू से एक भी मरीज की मृत्यु दर्ज नहीं हुई है। वहीं चिकनगुनिया का एक भी पुष्ट मामला सामने नहीं आया है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में बिहार में डेंगू के कुल 20,224 मामले सामने आए थे। उस वर्ष संक्रमण के कारण 74 लोगों की मृत्यु हुई थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने रोकथाम की रणनीति को और मजबूत किया। वर्ष 2024 में डेंगू के मामलों में लगभग 50 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई और कुल 10,155 मामले सामने आए, जबकि मृत्यु का आंकड़ा घटकर 16 रह गया। वर्ष 2025 में स्थिति में और सुधार हुआ तथा पूरे राज्य में केवल 3,902 मामले दर्ज किए गए, जबकि मृत्यु की संख्या घटकर दो रह गई।
वर्तमान वर्ष 2026 में अब तक के आंकड़े और अधिक उत्साहजनक हैं। 6 जुलाई तक पूरे बिहार में डेंगू के केवल 176 मामले दर्ज किए गए हैं और किसी भी मरीज की मृत्यु नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग इसे समय पर निगरानी, त्वरित जांच, बेहतर उपचार और व्यापक जनजागरूकता अभियान का परिणाम मान रहा है।
चिकनगुनिया की स्थिति में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। वर्ष 2024 में जहां पूरे राज्य में 520 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर केवल 45 रह गई। वर्ष 2026 में 6 जुलाई तक राज्य में चिकनगुनिया का एक भी मामला सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यह उपलब्धि मच्छर नियंत्रण अभियान और लगातार निगरानी का प्रत्यक्ष परिणाम है।
राजधानी पटना में भी डेंगू की स्थिति में लगातार सुधार दर्ज किया गया है। वर्ष 2023 में पटना जिले में डेंगू के 8,600 मामले सामने आए थे। इसके बाद वर्ष 2024 में यह संख्या घटकर 5,033 रह गई और वर्ष 2025 में केवल 1,817 मामले दर्ज किए गए। वर्ष 2026 में 6 जुलाई तक पटना में मात्र 47 मामले सामने आए हैं तथा किसी भी मरीज की मृत्यु नहीं हुई है।
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि राज्यभर में मच्छरों के प्रजनन को नियंत्रित करने के लिए बड़े स्तर पर फॉगिंग अभियान चलाया जा रहा है। वर्तमान में बिहार के विभिन्न जिलों में कुल 318 फॉगिंग मशीनें सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। विशेष रूप से पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, दरभंगा, नालंदा, पटना और भागलपुर जैसे संवेदनशील जिलों में अतिरिक्त मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं ताकि नियमित फॉगिंग सुनिश्चित की जा सके।
इसके साथ ही मच्छर नियंत्रण के लिए आवश्यक कीटनाशक टेक्निकल मैलाथियान का भी पर्याप्त भंडारण किया गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि आवश्यकता के अनुसार सभी जिलों में समय पर इसकी उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि किसी भी क्षेत्र में अभियान प्रभावित न हो।
डेंगू की शीघ्र पहचान और समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में एनएस-1 एलिसा तथा आईजीएम एलिसा जांच किट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई हैं। विभाग के अनुसार जिला अस्पतालों के लिए स्टेट स्टोर में 62 एनएस-1 एलिसा किट का बफर स्टॉक सुरक्षित रखा गया है। इसके अतिरिक्त मेडिकल कॉलेजों के लिए भी आवश्यक किट उपलब्ध कराई जा रही हैं तथा 200 अतिरिक्त एनएस-1 एलिसा किट की मांग भेजी गई है ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कमी न हो।
स्वास्थ्य विभाग ने केवल उपचार व्यवस्था पर ही नहीं बल्कि रोकथाम और जनजागरूकता पर भी विशेष ध्यान दिया है। फरवरी 2026 में पटना नगर निगम सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों को डेंगू और चिकनगुनिया नियंत्रण के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इसके अलावा 18 जून 2026 को राष्ट्रीय क्लिनिकल गाइडलाइन सभी जिलों और स्वास्थ्य संस्थानों को उपलब्ध कराई गई ताकि उपचार की प्रक्रिया पूरे राज्य में एक समान और प्रभावी तरीके से लागू की जा सके।
संभावित हॉटस्पॉट क्षेत्रों में लगातार एंटोमोलॉजिकल सर्विलांस भी किया जा रहा है। इसके माध्यम से मच्छरों की संख्या, उनके प्रजनन स्थलों और संक्रमण के जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर समय रहते नियंत्रणात्मक कार्रवाई की जा रही है। विभाग का मानना है कि इस वैज्ञानिक निगरानी प्रणाली से संक्रमण फैलने से पहले ही आवश्यक कदम उठाना संभव हो रहा है।
जुलाई महीने को पूरे बिहार में “एंटी-डेंगू माह” के रूप में मनाया जा रहा है। इससे पहले 16 जून को “एंटी-डेंगू दिवस” के अवसर पर राज्यभर में जागरूकता रैलियां, स्वच्छता अभियान और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। वर्तमान में सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया, स्थानीय निकायों और स्वास्थ्यकर्मियों के माध्यम से लोगों को लगातार जागरूक किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग लोगों से अपील कर रहा है कि वे अपने घरों और आसपास पानी जमा न होने दें, पानी की टंकियों और बर्तनों को ढककर रखें, कूलर एवं गमलों का पानी नियमित रूप से बदलें तथा बुखार, शरीर दर्द या अन्य लक्षण दिखाई देने पर स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में जांच कराएं।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि बिहार सरकार वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की सतत निगरानी, समयबद्ध कार्रवाई और आम जनता की भागीदारी के कारण राज्य में डेंगू एवं चिकनगुनिया पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है। उन्होंने सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि मानसून के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और प्रत्येक संदिग्ध मामले की समय पर जांच एवं उपचार सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि, राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित पांडेय तथा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। समीक्षा के दौरान अस्पतालों की तैयारियों, दवा उपलब्धता, जांच सुविधाओं, फॉगिंग अभियान, मच्छर नियंत्रण कार्यक्रम और जनजागरूकता गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की गई। स्वास्थ्य विभाग ने विश्वास जताया कि यदि इसी प्रकार समन्वित प्रयास जारी रहे तो आने वाले समय में बिहार डेंगू और चिकनगुनिया जैसी वेक्टर जनित बीमारियों पर और अधिक प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में सफल होगा।


