बिहार सिपाही भर्ती: फिजिकल में खुली पोल, लिखित परीक्षा में बैठाए थे ‘मुन्ना भाई’; गया, पटना और छपरा के 4 नटवरलाल गिरफ्तार

  • फर्जीवाड़ा: बिहार सिपाही भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) में बड़ा खुलासा; लिखित परीक्षा में ‘मुन्ना भाई’ (डमी कैंडिडेट) बैठाकर पास हुए 4 अभ्यर्थी गिरफ्तार।
  • ऐसे पकड़े गए: बायोमेट्रिक जांच में फिंगरप्रिंट और फोटो का मिलान नहीं हुआ; दस्तावेजों की जांच में रिकॉर्ड में अंतर मिलने पर अधिकारियों ने दबोचा।
  • गिरफ्तारी: पकड़े गए अभ्यर्थियों में गया, छपरा, नालंदा और पटना के युवक शामिल; पुलिस को संगठित गिरोह की संलिप्तता का शक, जांच तेज।

द वॉयस ऑफ बिहार (पटना/ब्यूरो)

​बिहार पुलिस (Bihar Police) में सिपाही बनने का सपना देखने वाले उन अभ्यर्थियों के मंसूबों पर पानी फिर गया, जिन्होंने मेहनत के बजाय धोखाधड़ी का रास्ता चुना। बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा (Bihar Police Constable Recruitment Exam) में एक बार फिर ‘मुन्ना भाई’ स्टाइल में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। सोमवार को आयोजित शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) के दौरान 4 ऐसे अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया गया, जिन्होंने लिखित परीक्षा खुद नहीं दी थी, बल्कि अपनी जगह किसी और (डमी कैंडिडेट) को बैठाया था।

बायोमेट्रिक में खुल गई पोल

​लिखित परीक्षा में अच्छे नंबरों से पास होने के बाद ये चारों अभ्यर्थी पूरे आत्मविश्वास के साथ फिजिकल टेस्ट देने पहुंचे थे।

  • जांच: गेट पर बायोमेट्रिक सत्यापन (Biometric Verification) और दस्तावेजों की कड़ी जांच चल रही थी।
  • गड़बड़ी: जब इनका फिंगरप्रिंट और फोटो का मिलान किया गया, तो डेटाबेस के रिकॉर्ड में अंतर पाया गया। अधिकारियों को शक हुआ और उन्होंने कड़ाई से पूछताछ शुरू की।

कौन हैं ये 4 जालसाज?

​जांच एजेंसियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए चारों को हिरासत में ले लिया। पूछताछ में विरोधाभास सामने आने के बाद फर्जीवाड़े की पुष्टि हो गई। गिरफ्तार किए गए अभ्यर्थियों की पहचान इस प्रकार हुई है:

  1. राघव सिंह (निवासी: गया)
  2. प्रज्ञा कुमार राज (निवासी: छपरा)
  3. आयरन राज (निवासी: नालंदा)
  4. राजीव कुमार (निवासी: पटना)

सॉल्वर गैंग पर पुलिस की नजर

​जांच में यह बात सामने आई है कि इन सभी आरोपियों ने लिखित परीक्षा के दौरान डमी कैंडिडेट का इस्तेमाल कर उच्च अंक प्राप्त किए थे। पुलिस को आशंका है कि इसके पीछे किसी बड़े संगठित गिरोह (Organized Gang) का हाथ हो सकता है जो पैसे लेकर डमी कैंडिडेट उपलब्ध कराता है। पुलिस अब इस नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।

मेहनत करने वाले छात्रों के हक पर डाका डालने वालों का पकड़े जाना जरूरी है।

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