बिहार में 90 अंचल अधिकारियों का बड़ा तबादला, बिना ट्रांजिट लीव तुरंत ज्वाइन करने का आदेश

राज्य के राजस्व प्रशासन में बड़ा फेरबदल करते हुए 90 अंचल अधिकारियों (CO), प्रभारी अंचल अधिकारियों और राजस्व अधिकारियों का एक साथ तबादला कर दिया है। इस बड़े प्रशासनिक बदलाव के बाद राज्य के कई जिलों में राजस्व और भूमि प्रबंधन से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी नए अधिकारियों के हाथों में चली जाएगी। विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और सभी स्थानांतरित अधिकारियों को बिना किसी देरी के अपने नए पदस्थापन स्थल पर योगदान देना होगा।

इस तबादले को बिहार सरकार का राजस्व तंत्र को अधिक सक्रिय, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि भूमि विवाद, दाखिल-खारिज, म्यूटेशन, अतिक्रमण और अन्य राजस्व मामलों के त्वरित निपटारे के लिए प्रशासनिक पुनर्संरचना जरूरी थी। इसी उद्देश्य से यह व्यापक तबादला सूची जारी की गई है।

प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी

विभाग के अपर सचिव अजीव वत्सराज द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि यह तबादला प्रशासनिक कार्यों की दक्षता बढ़ाने और राजस्व से संबंधित लंबित मामलों के शीघ्र समाधान के लिए किया गया है। आदेश की प्रतियां मुख्यमंत्री सचिवालय, मुख्य सचिव, सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को भेज दी गई हैं ताकि तत्काल स्तर पर अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।

सरकारी सूत्रों के अनुसार कई जिलों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि भूमि विवादों के समाधान में अनावश्यक देरी हो रही है। कई जगह दाखिल-खारिज और सीमांकन के मामलों में लंबा इंतजार करना पड़ रहा था। ऐसे में विभाग ने प्रशासनिक स्तर पर बदलाव कर कार्यप्रणाली में गति लाने का निर्णय लिया।

बिना ट्रांजिट लीव तुरंत करना होगा ज्वाइन

तबादला आदेश का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि किसी भी अधिकारी को ट्रांजिट लीव की अनुमति नहीं दी गई है। सामान्यतः स्थानांतरण के दौरान अधिकारियों को पुराने कार्यस्थल से नए पदस्थापन स्थल तक पहुंचने के लिए कुछ दिनों का समय दिया जाता है, लेकिन इस बार विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि सभी अधिकारियों को तत्काल नए स्थान पर योगदान देना होगा।

जिलाधिकारियों को भी निर्देशित किया गया है कि वे संबंधित अधिकारियों को बिना विलंब कार्यमुक्त करें। साथ ही एक सप्ताह के भीतर विभाग को अनुपालन रिपोर्ट भेजना अनिवार्य किया गया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि सरकार इस तबादले को जल्द से जल्द प्रभावी रूप से लागू करना चाहती है।

प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि बिना ट्रांजिट लीव के आदेश से कार्यों में रुकावट कम होगी और नए अधिकारी तेजी से जिम्मेदारी संभाल सकेंगे।

कई महत्वपूर्ण अंचलों में बदले गए CO

इस बड़े फेरबदल में राज्य के कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण अंचलों में नए अंचल अधिकारियों की तैनाती की गई है। पूर्वी चंपारण के मोतिहारी सदर में सुनील कुमार को नया अंचल अधिकारी बनाया गया है। इसके अलावा कल्याणपुर, चकिया, छौड़ादानो, चिरैया और मधुबन जैसे क्षेत्रों में भी नए अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

, हिलसा और चंडी जैसे नालंदा जिले के महत्वपूर्ण अंचलों में भी नए CO की नियुक्ति की गई है। वहीं जिले के टिकारी, सारण के छपरा सदर और एकमा, भोजपुर के संदेश और जगदीशपुर, तथा पश्चिम चंपारण के नरकटियागंज और चनपटिया जैसे क्षेत्रों में भी नए अधिकारियों की तैनाती हुई है।

इन क्षेत्रों को प्रशासनिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यहां भूमि विवाद, राजस्व संग्रहण और ग्रामीण प्रशासन से जुड़े मामलों की संख्या अधिक रहती है।

कई अधिकारियों को मिला बड़ा अवसर

तबादला सूची में कई ऐसे अधिकारी भी शामिल हैं जो अब तक राजस्व अधिकारी (RO) या कानूनगो के पद पर कार्यरत थे। विभाग ने उन्हें अंचल अधिकारी की जिम्मेदारी देकर बड़ी प्रशासनिक भूमिका सौंपी है।

यह कदम अधिकारियों के लिए प्रमोशन जैसे अवसर के रूप में देखा जा रहा है। अब उन्हें क्षेत्रीय प्रशासन, राजस्व संग्रहण, भूमि अभिलेख प्रबंधन और विवाद समाधान जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी निभानी होगी।

वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इससे नई कार्यशैली और ताजगी आएगी। युवा और अनुभवी अधिकारियों के मिश्रण से राजस्व प्रशासन को गति मिलने की संभावना है।

कई जिलों के अधिकारी हुए प्रभावित

इस बड़े तबादले का असर बिहार के अनेक जिलों पर पड़ा है। जिन जिलों के अधिकारी इस सूची में शामिल हैं उनमें अररिया, अरवल, औरंगाबाद, बांका, , भोजपुर, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, गया, गोपालगंज, जहानाबाद, कैमूर, कटिहार, किशनगंज, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, नालंदा, नवादा, पूर्णिया, रोहतास, समस्तीपुर, सारण, सीतामढ़ी, सिवान, वैशाली और पश्चिम चंपारण प्रमुख हैं।

इतने बड़े स्तर पर हुए तबादले से राज्य के राजस्व प्रशासन में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा। कई जिलों में कामकाज की प्राथमिकताएं बदल सकती हैं और लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

भूमि विवाद निपटाने पर रहेगा फोकस

बिहार में भूमि विवाद लंबे समय से प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सीमांकन, कब्जा विवाद, दाखिल-खारिज और भूमि अभिलेखों में त्रुटियों से जुड़े हजारों मामले लंबित रहते हैं। ऐसे में अंचल अधिकारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।

सरकार का मानना है कि यदि अंचल स्तर पर प्रशासन मजबूत होगा तो कई विवाद शुरुआती स्तर पर ही सुलझाए जा सकेंगे। इससे जिला प्रशासन पर दबाव भी कम होगा और आम लोगों को राहत मिलेगी।

तत्काल लागू हुआ आदेश

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने साफ कर दिया है कि तबादला आदेश तत्काल प्रभाव से लागू है और किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने नए पदस्थापन स्थल पर योगदान देना होगा।

कुल मिलाकर 90 अधिकारियों के इस बड़े तबादले को बिहार सरकार का प्रशासनिक मशीनरी को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में जब सभी अधिकारी नए अंचलों में कार्यभार संभालेंगे, तब इसका असर राजस्व प्रशासन और आम नागरिकों को मिलने वाली सेवाओं पर साफ दिखाई देगा।

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