बिहार के विकास को रफ्तार देने के लिए मुख्यमंत्री का मास्टर प्लान: पटना मेट्रो, शहरी आवास और गया कॉरिडोर पर बड़ी घोषणाएं; अधिकारियों को पारदर्शिता और तेजी का सख्त अल्टीमेटम

पटना। बिहार के प्रशासनिक गलियारों में सोमवार, 27 अप्रैल 2026 का दिन विकास कार्यों की समीक्षा और भविष्य की रणनीतियों के नाम रहा। राजधानी पटना के मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित ‘संवाद’ कक्ष में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नगर विकास एवं आवास विभाग, पंचायती राज विभाग तथा पर्यटन विभाग की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य में चल रही महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति का आकलन करना और उनमें आ रही बाधाओं को दूर कर कार्य में तेजी लाना था। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में अधिकारियों को निर्देश दिया कि विकास योजनाओं में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और हर परियोजना को तय समय-सीमा के भीतर पारदर्शिता के साथ पूर्ण करना होगा। इस बैठक में पटना मेट्रो से लेकर ग्रामीण सोलर लाइट तक, और गया के धार्मिक गलियारों से लेकर शहरी कचरा प्रबंधन तक के विषयों पर गहन मंथन किया गया।

पटना मेट्रो: राजधानी की लाइफलाइन को समय पर पूरा करने का लक्ष्य

​बैठक का एक बड़ा हिस्सा पटना मेट्रो रेल परियोजना के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए मेट्रो के कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने अधिकारियों को विशेष रूप से निर्देशित किया कि पटना रेलवे जंक्शन तक मेट्रो रेल के कार्य को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण करें। इसके साथ ही, मलाही पकड़ी से राजेन्द्र नगर टर्मिनल तक के खंड पर चल रहे निर्माण कार्यों की अद्यतन स्थिति की समीक्षा की गई।

​मुख्यमंत्री का विजन है कि पटना जंक्शन, राजेन्द्र नगर टर्मिनल और आईएसबीटी (ISBT) को मेट्रो नेटवर्क के जरिए आपस में जल्द से जल्द जोड़ा जाए। इन तीनों प्रमुख परिवहन केंद्रों के जुड़ जाने से न केवल पटना के नागरिकों को बल्कि बाहर से आने वाले यात्रियों को भी आवागमन में अभूतपूर्व सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि मेट्रो परियोजना केवल एक निर्माण कार्य नहीं है, बल्कि यह भविष्य के आधुनिक पटना की नींव है, इसलिए इसकी गुणवत्ता और समयबद्धता पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

शहरी आवास और कचरा प्रबंधन: ‘जीरो वेस्ट’ और ‘पक्का मकान’ का संकल्प

​शहरी बेघर परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत जो भी पात्र परिवार शेष रह गए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द पक्का आवास उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि शहरी क्षेत्र के हर बेघर परिवार का अपना घर हो। इस प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर होने वाली देरी को अधिकारियों की जवाबदेही माना जाएगा।

​वहीं, स्वच्छ भारत मिशन और शहरी स्वच्छता पर चर्चा करते हुए सम्राट चौधरी ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) के लिए पीपीपी (PPP) मॉडल को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कचरे का केवल निस्तारण ही काफी नहीं है, बल्कि पीपीपी मॉडल के जरिए कचरे का बेहतर प्रबंधन और उसका सदुपयोग (जैसे ऊर्जा उत्पादन या खाद निर्माण) सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, राज्य के विभिन्न हिस्सों में निर्माणाधीन सीवरेज शोधन संयंत्रों (एसटीपी) को लेकर भी कड़े निर्देश दिए गए। गंगा नदी के किनारे जितने भी एसटीपी निर्माणाधीन हैं, उन्हें जल्द चालू करने और मौजूदा सीवरेज नेटवर्क का विस्तार करने का निर्देश दिया गया ताकि नदियों की निर्मलता बनी रहे।

ग्रामीण विकास: सोलर लाइट और पंचायतों की सुरक्षा पर जोर

​पंचायती राज विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना की कार्यप्रणाली पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि अब तक लगाए गए सभी सोलर लाइट पूरी तरह से फंक्शनल (क्रियाशील) रहें, यह सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी है। इसके लिए उन्होंने एक अत्याधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने को कहा, जिससे सचिवालय में बैठकर ही यह पता लगाया जा सके कि किस पंचायत की कौन सी लाइट जल रही है और कौन सी खराब है।

​सुरक्षा के दृष्टिकोण से मुख्यमंत्री ने हर ग्राम पंचायत में सी’सी’टी’वी (CCTV) कैमरे लगाने की योजना को अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्देश दिया। इससे न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में अपराध नियंत्रण में मदद मिलेगी, बल्कि प्रशासनिक कार्यों की निगरानी भी आसान होगी। इसके अलावा, उन्होंने एक संवेदनशील निर्देश देते हुए कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शवदाह गृह या मोक्ष धाम का निर्माण केवल उन्हीं स्थानों पर कराया जाए, जहां परंपरागत रूप से शवों का अंतिम संस्कार किया जाता रहा है, ताकि लोगों की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाएं आहत न हों।

पर्यटन और धार्मिक विरासत: गया और बोधगया का कायाकल्प

​पर्यटन विभाग की समीक्षा में गया जिले के विकास पर विशेष फोकस रहा। गया के जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने बैठक में महाबोधि मंदिर कॉरिडोर (बोधगया) और विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर (गयाजी) के समग्र विकास से जुड़ी विस्तृत योजना प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री ने कहा कि गया और बोधगया विश्व स्तर के पर्यटन स्थल हैं, इसलिए यहां के कॉरिडोर का निर्माण उच्च स्तरीय होना चाहिए ताकि तीर्थयात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने इन कॉरिडोर के निर्माण में स्थानीय स्थापत्य और आध्यात्मिक गरिमा को बनाए रखने का निर्देश दिया।

प्रशासनिक उपस्थिति और विभागीय फीडबैक

​बैठक के दौरान नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने अमृत परियोजना, स्मार्ट सिटी मिशन और विज्ञापन नियमावली जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अद्यतन जानकारी दी। उन्होंने रिजनल रैपिड ट्रांजिट प्रणाली (RRTS) की संभावनाओं और शहरों के मास्टर प्लान की प्रगति से भी मुख्यमंत्री को अवगत कराया। पंचायती राज विभाग के अपर सचिव आदित्य प्रकाश ने विभाग की आगामी प्रस्तावित योजनाओं का ब्यौरा पेश किया।

​इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, सूचना प्रावैधिकी विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव कुमार रवि, गृह विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी संजय कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. चन्द्रशेखर सिंह, पटना प्रमंडल के आयुक्त अनिमेश परासर, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव मो. सोहैल सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

  • ये भी पढ़े..

    सुल्तानगंज में दर्दनाक सड़क हादसा: तेज रफ्तार वाहन की टक्कर से महिला की मौत, पति गंभीर

    Share Add as a preferred…