
पटना। बिहार की राजनीति में प्रखर हिंदूवाद और सुशासन की मुखर आवाज माने जाने वाले विजय कुमार सिन्हा एक बार फिर सत्ता के केंद्र में एक नई और चुनौतीपूर्ण भूमिका के साथ वापस आए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के गुरुवार, 07 मई 2026 को हुए भव्य विस्तार में विजय सिन्हा ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। विभागों के बंटवारे में उन्हें कृषि विभाग (Agriculture Department) की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पहले वे राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग जैसे भारी-भरकम मंत्रालय संभाल रहे थे, लेकिन अब उन्हें राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले कृषि क्षेत्र को सुधारने का जिम्मा दिया गया है। विजय सिन्हा का सफर लखीसराय की गलियों से शुरू होकर बिहार विधानसभा के ‘अध्यक्ष’ (Speaker) और फिर ‘नेता प्रतिपक्ष’ (LoP) तक का रहा है। वे भाजपा के उन चंद नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी विपक्ष के सामने घुटने नहीं टेके। भूमिहार समाज के सबसे कद्दावर चेहरों में गिने जाने वाले विजय सिन्हा को कृषि मंत्री बनाना भाजपा की एक गहरी रणनीतिक चाल मानी जा रही है, जिससे पार्टी ग्रामीण इलाकों और किसान वोट बैंक में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है।
लखीसराय का ‘अजेय’ योद्धा: 2005 से अब तक का सफर
58 वर्षीय विजय कुमार सिन्हा का जन्म 05 जून 1967 को लखीसराय जिले के तिलकपुर में हुआ था। उनके पिता शारदा रमण सिंह एक प्रतिष्ठित व्यक्ति थे, जिनसे विजय सिन्हा को समाज सेवा की प्रेरणा मिली। विजय सिन्हा की राजनैतिक जमीन लखीसराय रही है, जहाँ से वे साल 2005 से लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं। 2010, 2015, 2020 और फिर 2025 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखा, जो उनकी क्षेत्र में अभूतपूर्व पकड़ को दर्शाता है।
पेशे से राजनेता और स्वभाव से आक्रामक रहने वाले विजय सिन्हा ने भाजपा के भीतर संगठन और सरकार, दोनों स्तरों पर खुद को साबित किया है। 2017 में जब नीतीश कुमार के साथ एनडीए की सरकार बनी थी, तब उन्हें श्रम संसाधन मंत्री बनाया गया था। इसके बाद 2020 में वे बिहार विधानसभा के अध्यक्ष चुने गए, जहाँ उन्होंने अपने कार्यकाल से एक नई लकीर खींच दी। अध्यक्ष के रूप में उनकी निष्पक्षता और नियमों के प्रति उनकी सख्ती आज भी याद की जाती है।
इतिहास रचने वाले ‘स्पीकर’: जब सदन में 100% सवालों के मिले जवाब
विजय कुमार सिन्हा का नाम बिहार के संसदीय इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया जब उनके अध्यक्षीय कार्यकाल के दौरान पहली बार सदन में पूछे गए 100 प्रतिशत प्रश्नों के उत्तर सरकार द्वारा दिए गए। यह एक रिकॉर्ड है जो अब तक किसी अन्य विधानसभा अध्यक्ष के कार्यकाल में नहीं देखा गया। उन्होंने ‘ऑनलाइन हेल्प डेस्क’ और विधायकों के लिए डिजिटल सुधारों को लागू कर विधानसभा की कार्यशैली को आधुनिक बनाया।
अध्यक्ष पद पर रहते हुए उन्होंने ‘5 संकल्प’ (5 Sankalp) की मुहिम शुरू की थी, जिसका उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बिहार विधानसभा के शताब्दी समारोह के दौरान किया था। जब 2022 में बिहार में सत्ता परिवर्तन हुआ और नीतीश कुमार महागठबंधन के साथ चले गए, तो विजय सिन्हा ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बजाय सदन में अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना बेहतर समझा, जो उनकी जुझारू प्रवृत्ति को दर्शाता है।
विपक्ष का ‘अकेला शेर’ और डिप्टी सीएम का अनुभव
महाठबंधन की सरकार के दौरान विजय सिन्हा को नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) बनाया गया। उस दौर में उन्होंने सड़क से लेकर सदन तक तत्कालीन सरकार और तेजस्वी यादव को हर मुद्दे पर घेरा। चाहे वह अपराध का मुद्दा हो या भ्रष्टाचार का, विजय सिन्हा भाजपा के सबसे मुखर सिपाही बनकर उभरे।
2024 में जब फिर से एनडीए की वापसी हुई, तो उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाकर पार्टी ने उनके संघर्ष का सम्मान किया। सम्राट चौधरी के साथ उनकी जोड़ी को ‘राम-लक्ष्मण’ की जोड़ी की तरह पेश किया गया। वे राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री के रूप में जमीन विवादों को सुलझाने के लिए ‘जनता दरबार’ और डिजिटल म्यूटेशन जैसी प्रक्रियाओं को तेज करने के लिए जाने गए। अब, सम्राट चौधरी की अपनी कैबिनेट में उन्हें कृषि विभाग देकर यह संदेश दिया गया है कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने और आधुनिक खेती के विजन को लेकर पूरी तरह गंभीर है।
कृषि विभाग: चुनौतियां और विजय सिन्हा का विजन
विजय सिन्हा को जो विभाग मिला है, वह बिहार की 70 प्रतिशत से अधिक आबादी से जुड़ा है। कृषि मंत्री के रूप में उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी:
- सिंचाई और खाद का संकट: समय पर यूरिया और खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- मंडी और एमएसपी: किसानों को उनके अनाज का सही दाम मिले और बिचौलियों का अंत हो।
- आधुनिक तकनीक: बिहार के किसानों को नई तकनीक और जैविक खेती से जोड़ना।
- जलवायु परिवर्तन: बाढ़ और सूखे के बीच फसलों के नुकसान को कम करने के लिए बीमा योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन।
चूँकि विजय सिन्हा एक अनुभवी प्रशासक हैं, उम्मीद है कि वे विभाग में व्याप्त सुस्ती को दूर कर ‘एक्शन मोड’ में काम करेंगे। उन्होंने कार्यभार संभालने से पहले ही संकेत दिए हैं कि वे प्रधानमंत्री मोदी के ‘कृषि विजन’ को बिहार के अंतिम गाँव तक पहुँचाएंगे।
भूमिहार समाज का ‘चेहरा’ और राजनैतिक कद
बिहार की जातीय राजनीति में भूमिहार समाज को भाजपा का सबसे मजबूत आधार स्तंभ माना जाता है। विजय सिन्हा इस समाज के निर्विवाद नेता के रूप में उभरे हैं। सम्राट चौधरी कैबिनेट में उनकी मौजूदगी यह सुनिश्चित करती है कि सवर्ण वोट बैंक एनडीए के साथ मजबूती से खड़ा रहे। विजय सिन्हा का राजनैतिक कद अब केवल एक विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि वे एनडीए के एक ऐसे रणनीतिकार हैं जिनकी सलाह सरकार के हर बड़े फैसले में मायने रखती है।
लखीसराय के तिलकपुर से शुरू हुआ यह सफर अब बिहार की खेती-किसानी को बदलने के संकल्प तक पहुँच गया है। 9 मई को जब वे अपने कार्यालय में पदभार ग्रहण करेंगे, तो पूरे बिहार की नजरें इस बात पर होंगी कि यह ‘फायरब्रांड’ नेता बिहार के खेतों में विकास की कितनी हरियाली ला पाता है।


