
पटना। बिहार की राजनैतिक राजधानी पटना आज एक ऐसे ऐतिहासिक पल की साक्षी बनने जा रही है, जो राज्य के प्रशासनिक इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया। राजधानी के ऐतिहासिक गांधी मैदान में गुरुवार, 07 मई 2026 को दोपहर ठीक 12:00 बजे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का पहला भव्य मंत्रिमंडल विस्तार आयोजित किया जाएगा। इस समारोह की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैय्यद अता हसनैन नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। बिहार के राजनैतिक इतिहास में यह पहला अवसर है जब केवल मंत्रिमंडल विस्तार के लिए गांधी मैदान जैसे विशाल और ऐतिहासिक स्थल को चुना गया है। अब तक की परंपरा के अनुसार, केवल मुख्यमंत्री और उनके साथ कुछ प्रमुख मंत्रियों का मुख्य शपथ ग्रहण समारोह ही गांधी मैदान में होता रहा है, जबकि बाद के विस्तार राजभवन के राजेंद्र मंडपम में संपन्न किए जाते रहे हैं। लेकिन सम्राट चौधरी ने इस आयोजन को एक जन-उत्सव और एनडीए की एकजुटता के शक्ति प्रदर्शन के रूप में पेश करने के लिए गांधी मैदान का चुनाव किया है।
21 दिनों का इंतजार खत्म: संतुलित और समावेशी होगा नया मंत्रिमंडल
मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी के पदभार संभालने के ठीक 21 दिन बाद यह विस्तार होने जा रहा है। बीते 15 अप्रैल को जब सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब उनके साथ केवल जनता दल यूनाइटेड (जदयू) कोटे के दो उपमुख्यमंत्रियों, विजय कुमार चौधरी और बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने ही शपथ ली थी। पिछले तीन हफ्तों से दिल्ली और पटना के बीच चले लंबे विचार-विमर्श के बाद अब मंत्रिपरिषद का वह स्वरूप तैयार हो गया है, जो 2029 के विधानसभा चुनावों तक बिहार के विकास का रोडमैप तैयार करेगा।
विधायकों की संख्यात्मक ताकत के आधार पर बिहार में मंत्रिपरिषद के सदस्यों की अधिकतम संख्या 36 हो सकती है। एनडीए के भीतर हुए समझौते के तहत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जदयू के हिस्से में 16-16 मंत्री पद आए हैं। आज होने वाले विस्तार में लगभग 29 से 30 मंत्रियों के शपथ लेने की संभावना है। इसमें जदयू कोटे से 12, भाजपा कोटे से 13 या 14, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से दो, जबकि राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम-से) से एक-एक प्रतिनिधि को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। चर्चा यह भी है कि भाजपा और जदयू दोनों ही दल अपने कोटे के एक या दो पद फिलहाल रिक्त रख सकते हैं ताकि भविष्य के राजनैतिक समीकरणों को साधा जा सके।
पुराने चेहरों पर भरोसा और क्षेत्रीय संतुलन का ध्यान
राजनैतिक सूत्रों की मानें तो इस मंत्रिमंडल विस्तार में एनडीए नेतृत्व ने प्रयोगों के बजाय ‘अनुभव’ को प्राथमिकता दी है। मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले नामों में ज्यादातर पुराने और कद्दावर चेहरों के ही होने के आसार हैं, जिन्होंने पूर्ववर्ती एनडीए सरकारों में विभिन्न विभागों को कुशलतापूर्वक संभाला है। हालांकि, सम्राट चौधरी की अपनी नई कार्यशैली को देखते हुए कुछ युवा और तेजतर्रार चेहरों को भी जगह मिलने की उम्मीद है।
जातीय और क्षेत्रीय संतुलन इस मंत्रिमंडल की सबसे बड़ी खूबी होगी। सीमांचल, कोसी, मगध, अंग प्रदेश और तिरहुत जैसे सभी प्रमुख क्षेत्रों को उचित प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है। इसके साथ ही, एनडीए के घटक दलों के बीच समन्वय बनाए रखने के लिए लोजपा (आर) के चिराग पासवान, हम (से) के जीतन राम मांझी और रालोमो के उपेन्द्र कुशवाहा की पसंद का भी पूरा ख्याल रखा गया है। यह मंत्रिमंडल केवल विभागों का बंटवारा नहीं, बल्कि बिहार के हर सामाजिक वर्ग को सत्ता में भागीदारी का अहसास कराने वाला ‘गुलदस्ता’ साबित होगा।
पटना में ‘दिल्ली’ का जमावड़ा: दिग्गजों से भरेगा मंच
शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ देश के गृहमंत्री अमित शाह भी मौजूद रहेंगे, जो बुधवार की रात ही पटना पहुँच चुके हैं। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावा केंद्र सरकार के कई दिग्गज मंत्री इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनेंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और स्वास्थ्य मंत्री तथा भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा गुरुवार की सुबह विशेष विमान से पटना पहुँच रहे हैं।
एनडीए के अन्य शीर्ष नेताओं में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी, चिराग पासवान, ललन सिंह, जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और रालोमो सुप्रीमो उपेन्द्र कुशवाहा मंच पर अपनी उपस्थिति से गठबंधन की मजबूती का संदेश देंगे। प्रधानमंत्री मोदी का किसी राज्य के ‘मंत्रिमंडल विस्तार’ में शामिल होना यह स्पष्ट करता है कि केंद्र सरकार के लिए बिहार कितना महत्वपूर्ण है और सम्राट चौधरी के नेतृत्व पर दिल्ली का कितना गहरा भरोसा है।
सुरक्षा का अभूतपूर्व घेरा: अभेद्य किले में तब्दील पटना
प्रधानमंत्री और इतने बड़े वीवीआईपी जमावड़े को देखते हुए पटना को एक अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है। पटना एयरपोर्ट से लेकर गांधी मैदान तक की पूरी सड़क और आसपास के ऊंचे भवनों पर अतिरिक्त पुलिस बल और कमांडो तैनात किए गए हैं। पुलिस मुख्यालय के स्तर से सुरक्षा इंतजामों की पल-पल की निगरानी की जा रही है। गांधी मैदान में हजारों लोगों की भीड़ जुटने की संभावना है, जिसे देखते हुए भीड़ नियंत्रण (Crowd Management) के विशेष उपाय किए गए हैं।
जिला प्रशासन ने सुरक्षा और सुगम आवाजाही को देखते हुए शहर के ट्रैफिक प्लान में बड़ा बदलाव किया है। सुबह आठ बजे से दोपहर तीन बजे तक एयरपोर्ट और गांधी मैदान की ओर जाने वाले सभी मुख्य मार्गों को सामान्य वाहनों के लिए बंद कर दिया गया है। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे असुविधा से बचने के लिए वैकल्पिक रास्तों का प्रयोग करें। गांधी मैदान के भीतर और बाहर सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाया गया है और ड्रोन कैमरों से पूरे इलाके की हवाई निगरानी की जा रही है।
विकास और सुशासन का नया अध्याय
सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल का यह विस्तार बिहार के लिए कई मायनों में नई उम्मीदें लेकर आ रहा है। 21 दिनों तक केवल तीन लोगों के सहारे चल रही सरकार अब अपने पूर्ण स्वरूप में काम करना शुरू करेगी। विभागों के बंटवारे के साथ ही रुकी हुई फाइलों में गति आएगी और केंद्र सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए मंत्रियों की नई टीम सक्रिय हो जाएगी।
गांधी मैदान में आयोजित होने वाला यह समारोह एक तरफ जहाँ एनडीए की आंतरिक एकजुटता को प्रदर्शित करेगा, वहीं दूसरी तरफ यह जनता के बीच यह संदेश देने का प्रयास है कि नई सरकार ‘लोक सेवक’ की भावना से काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी इस बात की गारंटी के रूप में पेश की जा रही है कि बिहार को ‘डबल इंजन’ की ताकत का पूरा लाभ मिलेगा। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद ही मंत्रियों के बीच विभागों का आवंटन होने की संभावना है, जिसके बाद बिहार सचिवालय में कामकाज का नया दौर शुरू होगा।


