कैबिनेट के बड़े फैसले: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सरकारी कर्मियों को दिया तोहफा, सुरक्षा और तकनीक के लिए बनाया नया मास्टरप्लान

पटना। बिहार की प्रशासनिक और विकासपरक दिशा में बुधवार का दिन एक मील का पत्थर साबित हुआ है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में राज्य के सर्वांगीण विकास को गति देने के लिए कई दूरगामी निर्णय लिए गए हैं। इस बैठक में जहाँ सरकारी कर्मचारियों के चेहरे पर मुस्कान लाने वाले वित्तीय फैसले हुए, वहीं राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य की तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऐतिहासिक योजनाओं पर मुहर लगाई गई है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य सरकार ‘सुशासन’ और ‘हरित विकास’ के अपने संकल्प पर अडिग है। बैठक में लिए गए निर्णयों का सीधा असर राज्य के लाखों सरकारी सेवकों, युवाओं और आम नागरिकों के जीवन पर पड़ने वाला है।

सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ते की सौगात

​मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) में वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह वृद्धि 1 जनवरी 2026 के प्रभाव से लागू मानी जाएगी। महंगाई के दौर में कर्मचारियों को राहत देने के लिए अलग-अलग वेतनमानों के अनुसार दरों में संशोधन किया गया है:

  • 7वां वेतनमान: इसमें महंगाई भत्ते की दर को 58 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है।
  • 6ठा वेतनमान: इस श्रेणी के कर्मियों के लिए भत्ता 257 प्रतिशत से बढ़ाकर 262 प्रतिशत किया गया है।
  • 5वां वेतनमान: इसमें सबसे अधिक वृद्धि देखी गई है, जहाँ दर 474 प्रतिशत से बढ़ाकर 483 प्रतिशत कर दी गई है। इसके साथ ही, बिहार नगर नियोजन सेवा संवर्ग के लिए एक नई वेतन संरचना को भी स्वीकृति दी गई है, जिससे नगर निकायों में कार्यरत कर्मियों को सीधा लाभ मिलेगा।

सुरक्षा तंत्र में विस्तार: पांच जिलों को मिलेंगे ‘रूरल SP’

​राज्य में कानून-व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने पुलिस ढांचे में बड़े बदलाव को मंजूरी दी है। विशेष रूप से अपराध की दृष्टि से संवेदनशील और बड़े ग्रामीण क्षेत्रों वाले पांच जिलों के लिए ग्रामीण पुलिस अधीक्षक (Rural SP) के नए पदों का सृजन किया गया है। ये नए पद पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर, मधुबनी, वैशाली और सीवान जिलों के लिए स्वीकृत हुए हैं। इन अधिकारियों की तैनाती से ग्रामीण अंचलों में पुलिसिंग की गुणवत्ता में सुधार होगा और अपराधियों पर नकेल कसना आसान होगा। इसके अतिरिक्त, किशनगंज जिले में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना के लिए 110.12 एकड़ जमीन केंद्र सरकार को मुफ्त हस्तांतरित करने का निर्णय लिया गया है।

‘आर्यभट्ट दृष्टि’ के जरिए बिहार में एआई क्रांति

​तकनीकी क्षेत्र में बिहार को अग्रणी राज्य बनाने के लिए कैबिनेट ने 209 करोड़ रुपये की लागत वाले ‘आर्यभट्ट दृष्टि’ प्रोजेक्ट को स्वीकृति दी है। इस प्रोजेक्ट के तहत सिंगापुर की संस्था GFTN के साथ साझेदारी कर राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा। इस मिशन का लक्ष्य अगले 5 वर्षों में 7,000 छात्रों को एआई में प्रशिक्षित करना और 100 से अधिक नए स्टार्टअप्स को सहायता प्रदान करना है। यह योजना बिहार के युवाओं के लिए वैश्विक स्तर पर रोजगार के नए द्वार खोलेगी।

हरित परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा

​पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ‘मुख्यमंत्री बिहार पर्यावरण अनुकूल परिवहन रोजगार योजना’ को मंजूरी दी है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना हेतु 110 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक राज्य में होने वाली कुल वाहन बिक्री में 30 प्रतिशत हिस्सा इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का हो।

मुख्यमंत्री ने स्वयं प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे जरूरत पड़ने पर ही चारपहिया वाहनों का उपयोग करें और अधिक से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाएं। उन्होंने अधिकारियों को राज्य के अपार्टमेंट और कॉलोनियों में पीएनजी (PNG) कनेक्शन देने के कार्य में तेजी लाने का भी निर्देश दिया है।

शिक्षा और औद्योगिक निवेश के नए आयाम

​शिक्षा के क्षेत्र में विस्तार करते हुए ‘सात निश्चय-3’ के अंतर्गत पश्चिम चंपारण के पिपरासी और भीताहा तथा मुंगेर के टेटिया बंबर में तीन नए डिग्री कॉलेज खोलने का निर्णय लिया गया है। इन संस्थानों के लिए कुल 132 शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पदों का सृजन किया गया है। औद्योगिक विकास की बात करें तो वैशाली जिले में 100 एकड़ जमीन पर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट (NIFTEM) की स्थापना के लिए भूमि हस्तांतरण को मंजूरी मिली है। साथ ही, बिहटा इंडस्ट्रियल क्लस्टर में एक बड़े डेयरी प्लांट के लिए वित्तीय प्रोत्साहन को भी हरी झंडी दी गई है।

भ्रष्टाचार पर कड़ा रुख और प्रशासनिक अनुशासन

​मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार भ्रष्टाचार के विरुद्ध अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर सख्ती से काम कर रही है। इसी कड़ी में शिक्षा विभाग के पूर्व जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (भोजपुर) मोहम्मद इर्शाद अंसारी को वित्तीय गबन के आरोपों की पुष्टि के बाद सरकारी सेवा से बर्खास्त करने का आदेश पारित किया गया है। यह निर्णय प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है कि किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

विक्रमशिला सेतु और स्थानीय विकास की निगरानी

​राज्य के बुनियादी ढांचे की मरम्मत को लेकर भी मुख्यमंत्री गंभीर हैं। भागलपुर में विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद सेना की तकनीकी टीम (बीआरओ) द्वारा बेली ब्रिज के निर्माण का कार्य शुरू कर दिया गया है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार, प्रशासन ने इस माह के अंत तक सेतु पर यातायात बहाल करने का लक्ष्य रखा है। इस बीच, भागलपुर में ही मुख्यमंत्री मछुआ कल्याण योजना के तहत 57 लाभार्थियों को आधुनिक वाहनों और उपकरणों का वितरण किया गया है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।

​कैबिनेट के ये तमाम फैसले यह दर्शाते हैं कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार न केवल वर्तमान चुनौतियों का समाधान कर रही है, बल्कि एक आधुनिक, सुरक्षित और हरित बिहार की नींव भी रख रही है। राज्य के कर्मचारियों के कल्याण से लेकर एआई जैसी भविष्य की तकनीक तक, सरकार का विजन समग्र विकास पर केंद्रित है। अब इन योजनाओं के धरातल पर उतरने से बिहार की प्रगति को एक नई रफ़्तार मिलेगी।

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