
पटना। बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था और विकास की गति को नई दिशा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। शनिवार, 18 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित ‘संवाद’ कक्ष में आयोजित इस बैठक में सूचना एवं जन-संपर्क विभाग, सिविल विमानन विभाग तथा नगर विकास एवं आवास विभाग के कार्यों की गहन पड़ताल की गई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है जब बिहार को न केवल राज्य के भीतर बल्कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पटल पर एक ‘मजबूत ब्रांड’ के रूप में स्थापित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि तकनीकी नवाचार, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग शासन की कार्यकुशलता बढ़ाने और रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए अनिवार्य रूप से किया जाए। इस बैठक में बिहार की सांस्कृतिक धरोहरों के विपणन से लेकर शहरों के वैज्ञानिक विस्तारीकरण और हवाई संपर्कता को सुदृढ़ करने जैसे दूरगामी लक्ष्यों पर विस्तृत चर्चा हुई।
ब्रांड बिहार: सांस्कृतिक गौरव और विज्ञापन से राजस्व का नया मॉडल
समीक्षा के पहले चरण में सूचना एवं जन-संपर्क विभाग के कार्यों की समीक्षा की गई। सचिव अनुपम कुमार ने विभाग की नई प्राथमिकताओं और प्रचार माध्यमों के आधुनिकीकरण पर प्रस्तुतीकरण दिया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि जिला स्तर पर छिपी हुई सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को चिह्नित किया जाए। उन्होंने कहा कि पर्यटकों को इन धरोहरों तक पहुँचने में कोई कठिनाई न हो, इसके लिए सूचना तंत्र को सहज और सरल बनाया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री का विशेष जोर ‘ब्रांड बिहार’ की स्थापना पर रहा। उन्होंने कहा कि बिहार में पिछले वर्षों में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं, लेकिन उनकी ब्रांडिंग राज्य के बाहर उतनी मजबूती से नहीं हो पाई है। अब आवश्यकता है कि दिल्ली, मुंबई और अन्य महानगरों सहित अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बिहार की सकारात्मक छवि को प्रमुखता से रखा जाए। विज्ञापन नीति पर चर्चा करते हुए उन्होंने एक महत्वपूर्ण निर्देश दिया कि सभी सरकारी जमीनों को चिह्नित कर वहां विज्ञापन के लिए आधुनिक विकल्प तलाशे जाएं। इससे न केवल सरकारी योजनाओं का प्रचार होगा, बल्कि सरकार के लिए राजस्व (Revenue) के नए स्रोत भी पैदा होंगे। एआई (AI) के प्रयोग को लेकर उन्होंने नगर विकास और पंचायती राज विभाग को अग्रणी भूमिका निभाने को कहा ताकि हर छोटी-बड़ी गतिविधि की निगरानी सीधे मुख्यालय से हो सके।
एरोसिटी और अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें: बिहार की आर्थिक उड़ान को लगेंगे पंख
सिविल विमानन विभाग की समीक्षा के दौरान बिहार के आसमान को वैश्विक मानचित्र पर जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर विमर्श हुआ। विभाग के सचिव निलेश रामचंद्र देवरे ने बताया कि पटना और गया से विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय गंतव्यों के लिए सीधी उड़ान सेवाएं शुरू करने के लिए नीतिगत स्तर पर तेजी से काम चल रहा है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ‘एरोसिटी’ (Aerocity) के विकास की घोषणा की। एरोसिटी परियोजना के तहत राज्य के प्रमुख हवाई अड्डों के चारों ओर वाणिज्यिक हब, होटल, लॉजिस्टिक्स केंद्र और पर्यटन आधारित बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने उड्डयन क्षेत्र में ‘सेफ्टी और क्वालिटी’ को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि उड़ान योजना के तहत केवल बड़े शहरों ही नहीं, बल्कि छोटे और क्षेत्रीय हवाई अड्डों के रन-वे विस्तार और टर्मिनल निर्माण में तेजी लाई जाए। मुख्यमंत्री का विजन है कि सभी 38 जिलों के लिए एक व्यापक हवाई संपर्कता प्लान तैयार हो। एरोसिटी के विकास से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यह निवेश का एक बड़ा केंद्र भी बनेगा। हवाई अड्डों के पास लॉजिस्टिक्स पार्क बनने से बिहार के उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुँचाने में आसानी होगी, जो सीधे तौर पर राज्य की आर्थिक क्षमता को नई गति प्रदान करेगा।
स्मार्ट टाउनशिप और शहरी विस्तारीकरण: भविष्य के बिहार की नींव
नगर विकास एवं आवास विभाग की समीक्षा में बिहार के बढ़ते शहरीकरण को व्यवस्थित करने के लिए 11 सैटेलाइट और ग्रीनफील्ड टाउनशिप के निर्माण का खाका पेश किया गया। प्रधान सचिव विनय कुमार ने बताया कि इन टाउनशिप के विकास के लिए भूमि स्वामियों के साथ साझेदारी का एक अनूठा मॉडल अपनाया जा रहा है। इस मॉडल के तहत मास्टर प्लान के ग्रिड के अनुसार विकास होगा और न्यूनतम 55 प्रतिशत जमीन भूमि मालिकों को वापस कर दी जाएगी, जो पहले से विकसित और उच्च मूल्य वाली होगी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि शहरों के विस्तारीकरण के लिए ‘शॉर्ट टर्म’ के बजाय ‘लॉन्ग टर्म’ प्लानिंग की जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि शहरों का जो भी नया नक्शा बने, वह पूरी तरह डिजिटल हो और आम जनता के लिए आसानी से उपलब्ध हो। साफ-सफाई और यातायात प्रबंधन को शहरी विकास का मुख्य पैमाना माना जाए। उन्होंने कहा कि गांवों में पहले ही बुनियादी सुविधाएं पहुँचा दी गई हैं, अब शहरी क्षेत्रों को इस तरह विकसित करना है कि वहां जीवन आसान और सुविधायुक्त हो। शहरों के विस्तारीकरण में ड्रेनेज, चौड़ी सड़कें और सार्वजनिक परिवहन के लिए पर्याप्त जगह छोड़ने के निर्देश दिए गए।
सुदृढ़ प्रशासनिक तालमेल और जवाबदेही
बैठक के समापन पर मुख्यमंत्री ने सभी विभागों के बीच आपसी समन्वय (Inter-departmental coordination) की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सरकार के संसाधनों का शत-प्रतिशत सही उपयोग सुनिश्चित करना अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। सरकारी जमीन की घेराबंदी और उसके व्यावसायिक उपयोग की दिशा में तेजी से काम करने को कहा गया। मुख्यमंत्री के अनुसार, विकास के कार्य केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, उनका असर जमीन पर दिखना चाहिए।
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार, सूचना एवं जन-संपर्क विभाग के सचिव अनुपम कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव कुमार रवि, गृह विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी संजय कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव चंद्रशेखर सिंह, पटना प्रमंडल के आयुक्त अनिमेष पराशर, सिविल विमानन विभाग के सचिव निलेश रामचंद्र देवरे, नगर आयुक्त यशपाल मीणा और सूचना विभाग के निदेशक अनिल कुमार सहित कई अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित रहे।


