
फिल्म प्रोत्साहन नीति का असर, राज्य में तेजी से बढ़ी शूटिंग गतिविधियां
पटना, 2 अप्रैल: कभी सीमित फिल्म निर्माण के लिए जाना जाने वाला बिहार अब धीरे-धीरे फिल्ममेकर्स की नई पसंद बनता जा रहा है। राज्य में फिल्म प्रोत्साहन नीति के प्रभाव से शूटिंग गतिविधियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, बिहार में फिलहाल 45 फिल्म और ऑडियो-विजुअल प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिन्हें सरकार की ओर से मंजूरी और सहयोग मिला है।
विभिन्न भाषाओं में बन रहीं फिल्में
इन प्रोजेक्ट्स में भाषाई विविधता भी देखने को मिल रही है। कुल 45 प्रोजेक्ट्स में 22 हिंदी, 19 भोजपुरी, 1 मगही, 1 इंग्लिश-भोजपुरी और 1 हिंदी-मैथिली फिल्म शामिल हैं। यह दर्शाता है कि बिहार अब केवल क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना रहा है।
फीचर फिल्म से लेकर वेब सीरीज तक
बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम लिमिटेड द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इन 45 प्रोजेक्ट्स में 38 फीचर फिल्में, 6 डॉक्यूमेंट्री और 1 वेब सीरीज शामिल हैं। वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान इन फिल्मों की शूटिंग को मंजूरी दी गई है। जुलाई 2024 से अब तक 39 फिल्मों की शूटिंग पूरी भी हो चुकी है, जबकि बाकी प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है।
प्रमुख लोकेशनों पर हो रही शूटिंग
इन फिल्मों की शूटिंग बिहार के कई प्रमुख और ऐतिहासिक स्थानों पर की जा रही है। राजगीर, बोधगया, पटना, गया, मुंगेर और चंपारण जैसे इलाकों में फिल्मांकन हो रहा है। इन लोकेशनों के जरिए बिहार की ऐतिहासिक धरोहर, धार्मिक महत्व और प्राकृतिक सुंदरता को बड़े पर्दे पर दिखाने का अवसर मिल रहा है।
इन फिल्मों के नाम भी चर्चा में
शूटिंग कर रही फिल्मों की सूची में कई दिलचस्प नाम शामिल हैं, जैसे – संघतिया, द लॉन्ग जर्नी होम, बिहार का जलवा, सुहागिन के सेनुर, जिंदगी बितवनी तोहरे प्यार में, नारी, ओह माय डॉग, सुगनी, छठ, बिहान, अनमोल घड़ी, बेटी बनल विजेता, बिहारी भौजी, चंपारण सत्याग्रह, हालात, आदि शक्ति मुंडेश्वरी, बोध गया का महाबोधि मंदिर, डिजिटल युग का संस्कार, मिस बिहार, द आउट कास्ट सहित अन्य प्रोजेक्ट्स।
सरकार की नीति से मिल रहा बड़ा फायदा
राज्य सरकार की फिल्म प्रोत्साहन नीति इस बदलाव की बड़ी वजह मानी जा रही है। इसके तहत फिल्म निर्माताओं को सब्सिडी, सिंगल विंडो क्लीयरेंस और प्रशासनिक सहयोग जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। इससे फिल्म निर्माण प्रक्रिया आसान हुई है और निर्माता बिहार को शूटिंग के लिए बेहतर विकल्प मान रहे हैं।
बिहार की पहचान को मिल रही नई उड़ान
विशेषज्ञों का मानना है कि फिल्मों के जरिए बिहार की संस्कृति, परंपरा और पर्यटन स्थलों को देश-विदेश में नई पहचान मिल रही है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
कुल मिलाकर, बिहार अब फिल्म इंडस्ट्री के नक्शे पर तेजी से उभरता हुआ केंद्र बनता जा रहा है, जो आने वाले समय में और भी बड़े प्रोजेक्ट्स को आकर्षित कर सकता है।


