बिहार में छात्र आंदोलन के बीच 25 जुलाई को बंद का ऐलान, आज प्रतिरोध दिवस की अपील से बढ़ी हलचल

बिहार में छात्रों के आंदोलन को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल लगातार तेज होती जा रही है। पटना समेत राज्य के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से छात्र संगठनों की ओर से प्रदर्शन, मार्च और विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी बीच 25 जुलाई को बिहार बंद का आह्वान किया गया है। छात्र संगठनों का कहना है कि यह बंद हाल के दिनों में हुए पुलिस लाठीचार्ज, छात्रों की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ दर्ज मामलों के विरोध में आयोजित किया जा रहा है। वहीं, 23 और 24 जुलाई को पूरे बिहार में प्रतिरोध दिवस मनाने की अपील भी की गई है।

बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र का अंतिम दिन होने के कारण शुक्रवार को पटना में छात्रों के संभावित प्रदर्शन को लेकर प्रशासन की नजरें भी टिकी हुई हैं। आंदोलनकारी संगठनों की ओर से पहले ही विरोध कार्यक्रमों का ऐलान किया जा चुका है। ऐसे में राजधानी सहित दूसरे जिलों में भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।

25 जुलाई को बिहार बंद का आह्वान

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी AISA और रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन यानी RYA की ओर से 25 जुलाई को बिहार बंद का आह्वान किया गया है। संगठनों का आरोप है कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुनने के बजाय उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई की जा रही है। इसी के विरोध में राज्यव्यापी बंद का फैसला लिया गया है।

छात्र संगठनों ने बिहार के युवाओं, छात्रों और आम लोगों से बंद को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से सफल बनाने की अपील की है। संगठनों का कहना है कि उनका उद्देश्य छात्रों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाना और सरकार का ध्यान उनकी मांगों की ओर आकर्षित करना है।

हालांकि, बंद के दौरान आम जनजीवन पर इसका कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। परिवहन, बाजार और अन्य सार्वजनिक गतिविधियों पर बंद समर्थकों की सक्रियता का प्रभाव पड़ सकता है। प्रशासन की ओर से भी संभावित स्थिति को देखते हुए सुरक्षा इंतजामों को मजबूत किया जा रहा है।

22 जुलाई को ब्लैक डे मनाने का दावा

छात्र संगठनों ने 22 जुलाई की घटनाओं को लेकर इसे ब्लैक डे के रूप में मनाने की अपील की थी। इसके बाद 23 और 24 जुलाई को प्रतिरोध दिवस के तौर पर कार्यक्रम आयोजित करने का आह्वान किया गया। आंदोलनकारी संगठनों के मुताबिक, पिछले दिनों प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई से बड़ी संख्या में छात्र प्रभावित हुए हैं।

संगठनों का आरोप है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को रखने वाले छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया। इसी मुद्दे को लेकर अब आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई गई है। 25 जुलाई के बिहार बंद को भी इसी आंदोलन की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।

AISA के राज्य अध्यक्ष धनंजय ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में बड़ी संख्या में छात्र घायल हुए। संगठन ने इस घटना की जांच और छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी उठाई है।

पटना में फिर प्रदर्शन की आशंका

शुक्रवार को पटना सहित बिहार के कई जिलों में छात्रों के प्रदर्शन की संभावना जताई जा रही है। विधानसभा के मॉनसून सत्र का अंतिम दिन होने के कारण राजधानी में राजनीतिक गतिविधियां भी अधिक रहेंगी। ऐसे में छात्र संगठनों के विरोध कार्यक्रमों को लेकर प्रशासन विशेष सतर्कता बरत रहा है।

पटना में पिछले दिनों छात्र संगठनों की ओर से मार्च और प्रदर्शन किए गए थे। प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई थी। प्रमुख मार्गों, सरकारी कार्यालयों और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन की कोशिश है कि किसी भी स्थिति में कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। वहीं, छात्र संगठन अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। इस वजह से आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारी संगठनों के बीच टकराव की स्थिति बनने की आशंका भी बनी हुई है।

खगौल में भी निकाला गया आक्रोश मार्च

गुरुवार को पटना के खगौल इलाके में छात्रों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर आक्रोश मार्च निकाला। प्रदर्शन में नीट परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक मामले, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने जैसी मांगें प्रमुख रूप से उठाई गईं।

प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी की। इसके अलावा दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के संसद भवन मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का भी विरोध किया गया।

छात्रों का कहना था कि परीक्षा से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना जरूरी है। उनका आरोप है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं की खबरों से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है। ऐसे मामलों में सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए।

खगौल में प्रदर्शन को देखते हुए स्थानीय पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।

117 संदिग्धों की तस्वीरें जारी

22 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान हिंसा और उपद्रव की घटनाओं के बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। बिहार पुलिस ने CCTV कैमरों और अलग-अलग स्थानों से प्राप्त वीडियो फुटेज की मदद से 117 संदिग्ध लोगों की तस्वीरें जारी की हैं।

पुलिस का उद्देश्य इन लोगों की पहचान कर घटनाओं में उनकी कथित भूमिका की जांच करना है। इसके लिए विशेष टीमों को जिम्मेदारी दी गई है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, उपलब्ध वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की पहचान की जा रही है।

इस कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारियों और छात्र संगठनों के बीच भी चिंता बढ़ सकती है। वहीं पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाली घटनाओं में शामिल लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द

राज्य में संभावित विरोध प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए बिहार पुलिस मुख्यालय ने भी अहम कदम उठाया है। 24 जुलाई 2026 से राज्यभर में पुलिस अधिकारियों और जवानों की सभी तरह की छुट्टियां अगले आदेश तक रद्द कर दी गई हैं।

बताया गया है कि विशेष परिस्थितियों को छोड़कर अब पुलिसकर्मियों को अवकाश नहीं दिया जाएगा। इस फैसले का उद्देश्य राज्य में पर्याप्त पुलिस बल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है, ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके।

पटना समेत कई जिलों में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल की तैनाती की जा रही है और प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।

बंद को लेकर अब सबकी नजर 25 जुलाई पर

फिलहाल बिहार में छात्र आंदोलन एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। एक तरफ छात्र संगठन अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने की तैयारी में हैं, तो दूसरी तरफ प्रशासन संभावित विरोध और हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर रहा है।

25 जुलाई को प्रस्तावित बिहार बंद का असर कितना व्यापक होगा, यह देखने वाली बात होगी। यदि बंद के दौरान बड़ी संख्या में छात्र और युवा सड़कों पर उतरते हैं, तो राज्य के कई हिस्सों में सामान्य गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। वहीं, प्रशासन की ओर से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने की अपील की जा सकती है।

छात्र संगठनों की ओर से लगातार यह कहा जा रहा है कि उनकी लड़ाई शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा में पारदर्शिता और छात्रों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर है। दूसरी ओर पुलिस की कार्रवाई और 117 संदिग्धों की तस्वीरें जारी होने के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार, प्रशासन और छात्र संगठनों के बीच बातचीत होती है या आंदोलन और तेज होता है, इस पर पूरे बिहार की नजर बनी हुई है।

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