बिहार विधानसभा: समाज कल्याण विभाग का बजट पारित, हंगामे के बीच विपक्ष का वॉकआउट

बिहार विधानसभा के बजट सत्र के सातवें दिन वित्तीय वर्ष 2025–26 के तृतीय अनुपूरक के तहत 724 करोड़ 52 लाख 35 हजार रुपये पर चर्चा के बाद समाज कल्याण विभाग का बजट पारित कर दिया गया। बजट पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने कई योजनाओं को लेकर सवाल उठाए, लेकिन मंत्री के जवाब शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने यह आरोप लगाते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया कि सरकार उनके प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर नहीं दे रही है।

सदन में पक्ष–विपक्ष आमने-सामने

विधानसभा के सेकंड हाफ में तृतीय अनुपूरक के अंतर्गत समाज कल्याण विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा हुई। विपक्ष की ओर से राजद विधायक सर्वजीत ने बहस की शुरुआत करते हुए सरकार के विकास कार्यों पर सवाल खड़े किए और राज्य में बढ़ती हत्या व दुष्कर्म की घटनाओं को लेकर सरकार को घेरा।

वहीं सत्ता पक्ष की ओर से विधायक मिथिलेश तिवारी ने वर्ष 2005 के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में हुए विकास कार्यों का उल्लेख किया। इस दौरान दोनों पक्षों के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार बार-बार पुराने कार्यकाल की उपलब्धियां गिना रही है, जबकि वर्तमान मुद्दों पर जवाब नहीं दे रही।

मंत्री मदन सहनी ने दिया जवाब

चर्चा के बाद समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी ने सरकार की ओर से जवाब देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में महिलाओं, वृद्धजनों, दिव्यांगों और वंचित वर्गों के लिए लगातार कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि 400 रुपये से बढ़ाकर 1100 रुपये कर दी गई है और करीब 1 करोड़ 16 लाख 5 हजार लाभुकों के खातों में डीबीटी के माध्यम से राशि भेजी जा रही है।

मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि कबीर अंत्येष्टि अनुदान योजना के तहत अब तक 40,884 लोगों को सहायता दी गई है, जबकि विवाह प्रोत्साहन अनुदान योजना के तहत 744 लाभार्थियों को मदद पहुंचाई गई है। राज्य में 1 लाख 15 हजार 64 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

आरोप–प्रत्यारोप का दौर जारी

बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी चलता रहा। सत्ता पक्ष के विधायकों ने विपक्ष पर मुद्दाविहीन राजनीति करने का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष ने सरकार पर गंभीर सवालों से बचने का आरोप लगाया। हंगामे और वॉकआउट के बीच अंततः समाज कल्याण विभाग का बजट ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

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