बिहार विधानसभा चुनाव: उपेंद्र कुशवाहा ने सीट बंटवारे पर जताई नाराजगी, भावुक पोस्ट में कही यह बात

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपने घटक दलों के बीच सीटों का बंटवारा अंतिम रूप दे दिया है। इस बीच राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट शेयर किया, जिससे साफ संकेत मिले कि वे सीट बंटवारे से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं।


भावुक पोस्ट में कुशवाहा ने कही यह बात

उपेंद्र कुशवाहा ने लिखा,

“आप सभी से क्षमा चाहता हूं। आपके मन के अनुकूल सीटों की संख्या नहीं हो पायी। मैं समझ रहा हूं, इस निर्णय से अपनी पार्टी के उम्मीदवार होने की इच्छा रखने वाले साथियों सहित हजारों – लाखों लोगों का मन दुखी होगा। आज कई घरों में खाना नहीं बना होगा। परन्तु आप सभी मेरी एवं पार्टी की विवशता और सीमा को बखूबी समझ रहे होंगे। किसी भी निर्णय के पीछे कुछ परिस्थितियां होती हैं जो बाहर से दिखती हैं मगर कुछ ऐसी भी होती हैं जो बाहर से नहीं दिखतीं। हम जानते हैं कि अन्दर की परिस्थितियों से अनभिज्ञता के कारण आपके मन में मेरे प्रति गुस्सा भी होगा, जो स्वाभाविक भी है।”

कुशवाहा ने आगे लिखा कि लोगों से गुस्सा शांत करने का अनुरोध है और समय आने पर वे खुद महसूस करेंगे कि यह फैसला कितना उचित या अनुचित था।


एनडीए में सीट बंटवारे का पूरा विवरण

बिहार विधानसभा की 243 सीटों में एनडीए ने घटक दलों के बीच सीटों का बंटवारा तय कर दिया है।

  • भाजपा और JDU: दोनों ही दल 101-101 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेंगे।
  • लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) – चिराग पासवान: 29 सीटें।
  • राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) – उपेंद्र कुशवाहा: 6 सीटें।
  • हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) – जीतन राम मांझी: 6 सीटें।

एनडीए में इस बार पहली बार भाजपा और जदयू ने बराबर सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला लिया है।


राजनीतिक विश्लेषण

विश्लेषकों का कहना है कि उपेंद्र कुशवाहा की पोस्ट बताती है कि RLM के लिए सीट बंटवारा संतोषजनक नहीं रहा, लेकिन इसके बावजूद गठबंधन में उनकी भूमिका बनी हुई है।
कुशवाहा ने यह भी स्पष्ट किया कि भीतर की परिस्थितियों बाहरी लोगों को दिखाई नहीं देतीं, और ऐसे फैसले में राजनीतिक विवशता का भी असर होता है।

एनडीए में यह सीट बंटवारा चुनावी रणनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे साफ है कि भाजपा और जदयू मुख्य धुरी पर रहते हुए भी अपने सहयोगी दलों की संतुष्टि और संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रही है।


 

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