बिहार विधानसभा में गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से जुड़ा अहम मुद्दा उठा। इस पर विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सदन को आश्वस्त किया कि जिन जमीनों का अब तक सर्वेक्षण नहीं हुआ है, उनके लिए विशेष अभियान चलाकर सर्वे कराया जाएगा।
20% जमीन अब भी असर्वेक्षित
विधायक मंजीत कुमार सिंह ने प्रश्नकाल में सवाल उठाया कि राज्य में लगभग 20 प्रतिशत भूमि अब भी असर्वेक्षित है। उन्होंने सरकार से समय-सीमा तय करने की मांग की ताकि बिना सर्वे वाली जमीन का सर्वे पूरा हो सके और जमाबंदी व लगान निर्धारण की प्रक्रिया आगे बढ़े।
मंत्री ने चिंता को बताया जायज
जवाब में मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सदस्य की चिंता उचित है। उन्होंने बताया कि:
- जमीन सर्वे का काम 2012 से शुरू हुआ था।
- 2015 में समीक्षा की गई और 2019 में कई बदलाव किए गए।
- सरकार ने सर्वे का काम दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
किसानों को हो रही परेशानी
मंत्री ने स्वीकार किया कि बिना सर्वे वाली जमीन के कारण:
- कई किसान सरकारी अनुदान से वंचित रह जाते हैं,
- जमीन की खरीद-बिक्री में दिक्कत आती है,
- आम लोगों को प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि सरकार स्वयं इस मुद्दे को लेकर चिंतित है और मुख्यमंत्री के निर्देश पर तेजी से काम किया जा रहा है।
40 लाख परिमार्जन आवेदन लंबित
मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि भूमि अभिलेखों के परिमार्जन (सुधार) से जुड़े लगभग 40 लाख आवेदन लंबित हैं। इन्हें प्राथमिकता के आधार पर निपटाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि जमीन संबंधी विवाद और प्रक्रियात्मक अड़चनें कम हों।
कुल मिलाकर सरकार का फोकस अब असर्वेक्षित जमीनों के सर्वे को अभियान मोड में पूरा कर राजस्व व्यवस्था को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने पर है।


