पटना | 21 फरवरी, 2026: बिहार के किसानों की समृद्धि और कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण की दिशा में नीतीश सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को बिहार विधानमंडल में वर्ष 2026-27 के लिए कृषि विभाग का 3,446.45 करोड़ रुपये का बजट प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। बजट पारित होने के बाद कृषि मंत्री श्री राम कृपाल यादव ने सदन को संबोधित करते हुए राज्य में हुई ‘हरित क्रांति’ का ब्योरा पेश किया।
तीन गुना बढ़ा खाद्यान्न उत्पादन
मंत्री राम कृपाल यादव ने कृषि रोड मैप की सफलता पर जोर देते हुए कहा कि बिहार में कृषि विकास की अपार संभावनाएँ अब हकीकत में बदल रही हैं।
”वर्ष 2005 की तुलना में आज बिहार का खाद्यान्न उत्पादन तीन गुना से अधिक बढ़ चुका है। यह चतुर्थ कृषि रोड मैप (2023-28) के सफल क्रियान्वयन का ही परिणाम है कि राज्य में चावल, गेहूं और मक्का के साथ-साथ अब दलहन-तिलहन की उत्पादकता में भी रिकॉर्ड वृद्धि हुई है।”
शिक्षा और अनुसंधान पर जोर: खुलेंगे नए कॉलेज
राज्य के युवाओं को कृषि क्षेत्र में विशेषज्ञ बनाने के लिए सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश कर रही है। बजट के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- सबौर (भागलपुर): कृषि जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) महाविद्यालय का निर्माण।
- आरा (भोजपुर): कृषि अभियंत्रण (Engineering) महाविद्यालय की स्थापना।
- अनुसंधान: सबौर और पूसा यूनिवर्सिटी में दलहन, तिलहन और पोषक अनाज (Millets) पर रिसर्च को बढ़ावा दिया जा रहा है।
बीज वितरण और फसल विविधीकरण (आंकड़ों की नजर में)
किसानों को पारंपरिक खेती से हटकर ‘कैश क्रॉप्स’ की ओर ले जाने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर बीज वितरण किया है:
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फसल का प्रकार |
लाभान्वित किसान |
वितरित बीज (क्विंटल) |
|---|---|---|
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स्वीट कॉर्न एवं बेबी कॉर्न |
10,929 |
178.16 |
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दलहनी फसलें |
4,71,521 |
65,777 |
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मोटा अनाज (Millets) |
75,701 |
3,895.10 |
“कृषि जन कल्याण चौपाल”: तकनीक अब खेत तक
किसानों को केवल संसाधन ही नहीं, बल्कि सही जानकारी भी मिले, इसके लिए ‘कृषि जन कल्याण चौपाल’ का आयोजन राज्य की सभी पंचायतों में किया गया।
- कुल प्रतिभागी: 8,47,798 किसान।
- उद्देश्य: आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाओं की जानकारी और व्यावहारिक प्रशिक्षण देना।
निष्कर्ष: आत्मनिर्भर किसान, विकसित बिहार
मंत्री राम कृपाल यादव ने स्पष्ट किया कि सरकार का अंतिम लक्ष्य खेती को ‘लाभकारी, टिकाऊ और सम्मानजनक पेशा’ बनाना है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से बिहार के किसानों ने नई तकनीक को अपनाया है, उससे आने वाले वर्षों में बिहार देश के कृषि मानचित्र पर नए मानक स्थापित करेगा।


