
बिहार में कृषि और ऊर्जा क्षेत्र को नई दिशा देने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य सरकार ने किसानों को दिन के समय निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने, सौर ऊर्जा परियोजनाओं का तेजी से विस्तार करने और भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नई तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि राज्य के सभी किसानों को एग्रीकल्चर फीडर के माध्यम से सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक नियमित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, पीएम-कुसुम योजना, फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं और ग्रीन हाइड्रोजन नीति पर तेजी से काम करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पटना स्थित लोक सेवक आवास परिसर के ‘संकल्प’ सभागार में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रहलाद जोशी ने बिहार में स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं की प्रगति और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में राज्य की ऊर्जा सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने, निजी निवेश आकर्षित करने और ऊर्जा अवसंरचना को मजबूत बनाने से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय और बिहार सरकार के ऊर्जा विभाग के अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विभिन्न योजनाओं की वर्तमान स्थिति, उपलब्धियों और आगामी कार्ययोजना की जानकारी दी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारी भी बैठक से जुड़े और अपने-अपने जिलों में चल रही परियोजनाओं की प्रगति से अवगत कराया।
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने किसानों को सिंचाई के लिए बेहतर बिजली उपलब्ध कराने को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि एग्रीकल्चर फीडर के माध्यम से सभी किसानों को सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक नियमित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उनका कहना था कि दिन के समय बिजली मिलने से किसानों को सिंचाई में सुविधा होगी, कृषि लागत कम होगी और खेती का कार्य अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा। उन्होंने ऊर्जा विभाग को इस व्यवस्था की नियमित निगरानी करने और किसी भी प्रकार की बाधा आने पर तत्काल समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र परिवारों तक पहुंचाने के लिए जनजागरूकता अभियान तेज किया जाए। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया जाए, तकनीकी औपचारिकताओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए और जिला स्तर पर निर्धारित लक्ष्यों को प्राथमिकता के आधार पर हासिल किया जाए। उन्होंने जिलाधिकारियों से कहा कि अपने-अपने जिलों में योजना की प्रगति की नियमित समीक्षा करें और निर्धारित समय सीमा के भीतर लक्ष्य पूरा करें।
बैठक में पीएम-कुसुम योजना के तहत कृषि क्षेत्र के सौरकरण पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि कार्यों में सौर ऊर्जा के अधिक उपयोग से किसानों की बिजली पर निर्भरता कम होगी और सिंचाई व्यवस्था अधिक किफायती बनेगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राज्य में अधिक से अधिक सौर ऊर्जा आधारित कृषि पंप स्थापित किए जाएं ताकि किसानों को लंबे समय तक सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध हो सके। उनका मानना है कि इससे खेती की लागत कम होने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
समीक्षा बैठक में बिहार में फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं की संभावनाओं पर भी विशेष चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में मौजूद जलाशयों, बड़े तालाबों और अन्य उपयुक्त जल क्षेत्रों का वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए और वहां फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं की व्यवहार्यता का आकलन किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर नई परियोजनाओं की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए ताकि बिहार नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर सके।
बैठक के दौरान भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ग्रीन हाइड्रोजन नीति तैयार करने पर भी सहमति बनी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहा है और बिहार को भी इस दिशा में समय रहते तैयार होना होगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़ी संभावनाओं का अध्ययन कर राज्य के लिए उपयुक्त नीति तैयार करने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए। उनका मानना है कि इससे आने वाले वर्षों में औद्योगिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा दोनों को मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ाने पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि निवेशकों के लिए पारदर्शी, सरल और अनुकूल वातावरण तैयार किया जाए ताकि अधिक से अधिक कंपनियां बिहार में सौर, पवन और अन्य स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश करने के लिए आगे आएं। उन्होंने ऊर्जा विभाग को निवेश प्रक्रिया को आसान बनाने और आवश्यक प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
बैठक में बिहार की सौर ऊर्जा क्षमता का वैज्ञानिक आकलन करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए उत्पादन, वितरण और ऊर्जा अवसंरचना को आधुनिक बनाने की दिशा में तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए गए। उनका कहना था कि यदि ऊर्जा क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग किया जाए तो बिहार स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा सुरक्षा किसी भी राज्य और देश के विकास का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है। जीवाश्म ईंधनों पर बढ़ती निर्भरता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियों को देखते हुए भारत को स्वच्छ और आत्मनिर्भर ऊर्जा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि बिहार भी इस राष्ट्रीय लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए पूरी तैयारी के साथ कार्य करेगा।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का क्रियान्वयन तय समय सीमा के भीतर और पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाए। योजनाओं की नियमित समीक्षा की जाए तथा जहां भी किसी प्रकार की प्रशासनिक या तकनीकी बाधा हो, उसे तुरंत दूर किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध कराती है।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी के बिहार दौरे और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की समीक्षा के लिए उनका आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से मिले सुझावों के आधार पर राज्य सरकार तेजी से कार्य करेगी और बिहार को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाने का प्रयास किया जाएगा।
समीक्षा बैठक में ऊर्जा विभाग और केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। बैठक में राज्य की ऊर्जा नीति, सौर ऊर्जा विस्तार, कृषि क्षेत्र के विद्युतीकरण, फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं, ग्रीन हाइड्रोजन, निजी निवेश और ऊर्जा अवसंरचना से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। सरकार का मानना है कि इन फैसलों के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों को बेहतर बिजली सुविधा मिलेगी, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि होगी, निवेश के नए अवसर पैदा होंगे और बिहार ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेगा।


