चमकी बुखार पर बिहार सरकार अलर्ट मोड में, मुख्य सचिव ने दिए सख्त निर्देश; 12 जिलों में स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत

पटना: बिहार में हर वर्ष गर्मी और मानसून के दौरान बच्चों को प्रभावित करने वाले एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (AES), जिसे आमतौर पर चमकी बुखार के नाम से जाना जाता है, से निपटने के लिए राज्य सरकार ने तैयारियों को और तेज कर दिया है। इसी क्रम में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें स्वास्थ्य विभाग समेत कई अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य AES और जापानी इन्सेफलाइटिस (JE) की रोकथाम, उपचार व्यवस्था और प्रभावित जिलों में की जा रही तैयारियों की समीक्षा करना था।

बैठक में स्पष्ट संदेश दिया गया कि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं, जागरूकता कार्यक्रमों और आपातकालीन सेवाओं को पूरी तरह सक्रिय रखा जाए ताकि किसी भी स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियों का प्रस्तुत किया विस्तृत खाका

बैठक के दौरान स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने राज्य में AES प्रबंधन को लेकर किए गए कार्यों और तैयारियों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि पिछले कई महीनों से विभाग लगातार प्रभावित जिलों की स्थिति का आकलन कर रहा है और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में दवाओं, उपकरणों और प्रशिक्षित मानव संसाधनों की उपलब्धता की नियमित समीक्षा की जा रही है। साथ ही विभिन्न स्तरों पर गैप असेसमेंट कर उन कमियों को दूर करने का प्रयास किया गया है जो आपात स्थिति में उपचार व्यवस्था को प्रभावित कर सकती थीं।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा ढांचे को मजबूत बनाने के लिए मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को विशेष रूप से तैयार किया गया है।

12 जिलों में विशेष निगरानी और मजबूत स्वास्थ्य नेटवर्क

राज्य सरकार ने AES से सर्वाधिक प्रभावित 12 जिलों को विशेष निगरानी क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया है। इनमें मुजफ्फरपुर, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, सारण, सीवान, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी और शिवहर शामिल हैं।

इन जिलों में गंभीर मरीजों के इलाज के लिए कुल 15 पीआईसीयू (PICU) पूरी तरह कार्यरत हैं। इसके अलावा मुजफ्फरपुर स्थित में 100 बेड वाला विशेष पीआईसीयू और 60 बेड का एन्सेफलाइटिस वार्ड तैयार रखा गया है। वहीं सदर अस्पताल में भी विशेष वार्ड की व्यवस्था की गई है।

सरकार का मानना है कि समय पर इलाज AES से होने वाली मौतों को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है। इसी कारण जिला और प्रखंड स्तर तक स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ किया गया है।

एम्बुलेंस नेटवर्क को किया गया और मजबूत

चमकी बुखार के मामलों में समय पर अस्पताल पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में बड़े स्तर पर एम्बुलेंस नेटवर्क सक्रिय किया है।

जानकारी के अनुसार कुल 959 एम्बुलेंस विभिन्न श्रेणियों में तैनात की गई हैं। इनमें बेसिक लाइफ सपोर्ट, एडवांस लाइफ सपोर्ट और मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना से जुड़े वाहन शामिल हैं। इन वाहनों को प्रभावित क्षेत्रों से अस्पतालों तक मरीजों के त्वरित परिवहन के लिए जोड़ा गया है।

इसके अलावा यदि कोई परिवार निजी वाहन से मरीज को अस्पताल लेकर आता है तो उसे मौके पर ही आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परिवहन के अभाव में किसी बच्चे का इलाज प्रभावित न हो।

जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित

AES जैसी गंभीर बीमारी से निपटने के लिए आवश्यक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता को लेकर भी विशेष तैयारी की गई है। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि सभी चिन्हित स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक जीवन रक्षक दवाओं का पर्याप्त भंडारण किया गया है।

प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में दर्जनों प्रकार की आवश्यक दवाएं उपलब्ध हैं, जबकि मेडिकल कॉलेजों और बड़े अस्पतालों में अतिरिक्त दवाओं और उपकरणों की व्यवस्था की गई है। अधिकारियों का दावा है कि आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता लगभग शत-प्रतिशत सुनिश्चित कर दी गई है।

गांव-गांव तक पहुंच रहा जागरूकता अभियान

सरकार का मानना है कि चमकी बुखार के खिलाफ लड़ाई केवल अस्पतालों में नहीं जीती जा सकती, बल्कि इसके लिए जन-जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। इसी उद्देश्य से बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

विशेष जागरूकता रथों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया है, जो गांव-गांव जाकर लोगों को बीमारी के लक्षण, बचाव और समय पर इलाज की जानकारी दे रहे हैं। मुजफ्फरपुर सहित कई जिलों में संध्या चौपाल का आयोजन किया जा रहा है, जहां स्वास्थ्यकर्मी और प्रशासनिक अधिकारी ग्रामीणों को जागरूक कर रहे हैं।

इन कार्यक्रमों के माध्यम से अभिभावकों को यह बताया जा रहा है कि बच्चों को भूखे पेट नहीं सुलाना चाहिए, उन्हें पर्याप्त पोषण देना चाहिए और किसी भी असामान्य लक्षण की स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए।

सुबह 4 से 6 बजे तक विशेष निगरानी के निर्देश

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने एक महत्वपूर्ण तथ्य पर ध्यान दिलाया कि AES के अधिकांश मामले सुबह के समय सामने आते हैं। इसी को देखते हुए उन्होंने सभी स्वास्थ्य संस्थानों में सुबह 4 बजे से 6 बजे के बीच डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि इस अवधि में किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। इसलिए सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की निगरानी तकनीकी माध्यमों और हेल्पलाइन सेवाओं के जरिए की जाएगी। अनुपस्थित पाए जाने वाले कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।

कई विभागों को सौंपे गए विशेष दायित्व

बैठक में यह भी तय किया गया कि AES की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं होगी, बल्कि कई विभाग मिलकर इस दिशा में काम करेंगे।

समाज कल्याण विभाग को कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्रों तक पहुंचाने और अतिरिक्त पोषण उपलब्ध कराने का दायित्व दिया गया है। आंगनवाड़ी केंद्रों पर ओआरएस और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग को पंचायत स्तर पर बैठकों और जनजागरूकता अभियानों के आयोजन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जीविका समूहों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा।

स्कूलों और पेयजल व्यवस्था पर विशेष ध्यान

शिक्षा विभाग को निर्देश दिया गया है कि स्कूलों में सुरक्षित शनिवार कार्यक्रम के अंतर्गत AES से जुड़ी जानकारी शामिल की जाए। साथ ही बच्चों को पौष्टिक और प्रोटीन युक्त भोजन उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाए।

लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग को प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों की जांच, चापाकलों की मरम्मत और नियमित क्लोरीनेशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वच्छ पेयजल और बेहतर पोषण AES के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पशुपालन विभाग भी करेगा निगरानी

बैठक में पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग को भी विशेष जिम्मेदारियां दी गईं। विभाग को सुअरों और जल पक्षियों में संभावित वायरल गतिविधियों की निगरानी करने तथा आवश्यक सर्वेक्षण चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा रिहायशी क्षेत्रों के आसपास सुअर पालन केंद्रों के संचालन पर भी नजर रखने को कहा गया है ताकि किसी संभावित संक्रमण के खतरे को कम किया जा सके।

प्रशासन को दिए गए सख्त निर्देश

मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों और सिविल सर्जनों को व्यक्तिगत रूप से अस्पतालों का निरीक्षण करने और चिकित्सा व्यवस्था की निगरानी करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि रेफरल ट्रांसपोर्ट सिस्टम को पंचायत स्तर तक प्रभावी बनाया जाए ताकि आपात स्थिति में बच्चों को तुरंत इलाज मिल सके।

बैठक के अंत में मुख्य सचिव ने दोहराया कि बच्चों का जीवन और स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि चमकी बुखार के खिलाफ चल रही लड़ाई में किसी भी स्तर पर ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि समय पर उपचार, बेहतर पोषण, व्यापक जागरूकता और मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था के माध्यम से AES के मामलों और उससे होने वाली मौतों को न्यूनतम स्तर तक लाया जा सके।

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