बिहार में उच्च शिक्षा का सबसे बड़ा विस्तार: 1 जुलाई से शुरू होंगे 211 नए राजकीय डिग्री कॉलेज, 57 हजार से अधिक छात्रों ने कराया आवेदन

पटना। बिहार में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “सात निश्चय-3 (2025-30)” के तहत आगामी 1 जुलाई 2026 से राज्य के विभिन्न प्रखंडों में स्थापित 211 नए राजकीय डिग्री महाविद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियां शुरू होने जा रही हैं। इस पहल को बिहार के शिक्षा इतिहास की सबसे बड़ी विस्तार योजनाओं में शामिल माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य उच्च शिक्षा को गांवों और प्रखंड स्तर तक पहुंचाना है।

राज्य सरकार का दावा है कि इस कदम से लाखों छात्रों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवाओं को अपने घर के नजदीक स्नातक स्तर की पढ़ाई का अवसर मिलेगा। अब तक हजारों विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए जिला मुख्यालयों या बड़े शहरों का रुख करने को मजबूर थे, लेकिन नए कॉलेजों के शुरू होने से यह स्थिति काफी हद तक बदलने की उम्मीद है।

तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए हुई उच्चस्तरीय समीक्षा

211 नए डिग्री कॉलेजों के संचालन को लेकर मंगलवार को एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से की।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में राज्य के सभी प्रमंडलीय आयुक्त, जिलाधिकारी, उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य कॉलेजों की तैयारियों की समीक्षा करना और 1 जुलाई से शैक्षणिक सत्र शुरू करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना था।

बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि किसी भी परिस्थिति में छात्रों को बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना नहीं करना चाहिए। सभी तैयारियां तय समय सीमा के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा।

अस्थायी परिसरों में शुरू होगा संचालन

सरकार ने जानकारी दी कि नए कॉलेजों के प्रारंभिक संचालन के लिए सभी जिलों से चयनित विद्यालयों की सूची प्राप्त कर ली गई है। इन्हीं परिसरों में अस्थायी रूप से कॉलेजों की कक्षाएं संचालित की जाएंगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों की पढ़ाई समय पर शुरू हो सके और स्थायी भवन निर्माण की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार न करना पड़े।

उच्च शिक्षा विभाग का मानना है कि यह मॉडल राज्य में उच्च शिक्षा के विस्तार को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

कॉलेजों के लिए करोड़ों रुपये की मंजूरी

नए डिग्री कॉलेजों के संचालन और बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर वित्तीय स्वीकृति दी है।

प्रत्येक महाविद्यालय को शैक्षणिक गतिविधियों के लिए 30 लाख रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। इस राशि का उपयोग फर्नीचर, कंप्यूटर, स्टेशनरी, ब्लैकबोर्ड, शैक्षणिक उपकरण और अन्य आवश्यक संसाधनों की खरीद में किया जाएगा।

इसके अलावा चयनित विद्यालयों के भवनों के जीर्णोद्धार और आवश्यक विकास कार्यों के लिए प्रति महाविद्यालय 20 लाख रुपये की अलग राशि स्वीकृत की गई है। यह राशि संबंधित जिलाधिकारियों के माध्यम से खर्च की जाएगी।

सरकार का मानना है कि पर्याप्त संसाधनों की उपलब्धता से कॉलेजों में शुरुआती दिनों से ही गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण तैयार किया जा सकेगा।

छह प्रमुख विषयों से होगी पढ़ाई की शुरुआत

प्रारंभिक चरण में सभी 211 कॉलेजों में छह अनिवार्य विषयों की पढ़ाई शुरू की जाएगी। इनमें हिन्दी, अंग्रेजी, इतिहास, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान और समाजशास्त्र शामिल हैं।

शिक्षा विभाग के अनुसार इन विषयों का चयन विद्यार्थियों की मांग और स्नातक स्तर की बुनियादी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया गया है। भविष्य में छात्रों की संख्या और संसाधनों के आधार पर अन्य विषयों को भी शामिल किया जा सकता है।

प्रत्येक कॉलेज का नाम संबंधित प्रखंड के नाम के साथ “राजकीय डिग्री महाविद्यालय” जोड़कर रखा गया है, जिससे स्थानीय पहचान भी बनी रहेगी।

57 हजार से अधिक छात्रों ने कराया आवेदन

नए कॉलेजों को लेकर छात्रों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। शैक्षणिक सत्र 2026-30 के लिए अब तक 57,421 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं।

आंकड़ों के अनुसार हिन्दी विषय सबसे अधिक लोकप्रिय रहा है, जिसके लिए 25,790 छात्रों ने आवेदन किया है। वहीं इतिहास विषय के लिए 17,105 आवेदन प्राप्त हुए हैं।

इसके अलावा अंग्रेजी, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र जैसे विषयों में भी बड़ी संख्या में छात्रों ने रुचि दिखाई है।

विशेष रूप से मुंगेर विश्वविद्यालय के अधीन आने वाले नए कॉलेजों में सबसे अधिक 31,218 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इससे स्पष्ट है कि ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों के छात्र उच्च शिक्षा के नए अवसरों को लेकर उत्साहित हैं।

मुख्य सचिव के सख्त निर्देश

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने जिला प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिया कि गुणवत्ता और सुविधाओं के मामले में किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि 30 जून तक सभी कॉलेजों में जल निकासी, बिजली, पेयजल, शौचालय, डेस्क-बेंच, ब्लैकबोर्ड, कंप्यूटर और वाटर कूलर जैसी सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएं।

जिन क्षेत्रों में मानसून के दौरान जलजमाव की समस्या होती है, वहां पहले से विशेष तैयारी करने को कहा गया है ताकि शैक्षणिक गतिविधियों पर कोई असर न पड़े।

प्रत्येक कॉलेज की जिम्मेदारी ADM को

सरकार ने निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए प्रत्येक कॉलेज की जिम्मेदारी एक अपर समाहर्ता (ADM) स्तर के अधिकारी को सौंपने का निर्णय लिया है।

ADM की अध्यक्षता में जिला स्तरीय क्रय एवं क्रियान्वयन समिति बनाई जाएगी, जो स्थानीय स्तर पर तेजी से निर्णय लेकर आवश्यक कार्यों को समय पर पूरा कराएगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य खरीद प्रक्रिया और विकास कार्यों में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान

विश्वविद्यालयों द्वारा स्थायी सुरक्षा व्यवस्था विकसित किए जाने तक जिला प्रशासन को सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि 15 जून तक सभी कॉलेज परिसरों में होमगार्ड या चौकीदार के माध्यम से रात्रि प्रहरी की व्यवस्था सुनिश्चित कर ली जाए।

इसके अलावा परिसर की साफ-सफाई, सुरक्षा और रखरखाव पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया है।

छात्राओं के लिए शुरू होगी पिंक बस सेवा

महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए छात्राओं के लिए विशेष पिंक बस सेवा के विस्तार की घोषणा की है।

1 जुलाई से नए कॉलेजों के संचालन के साथ यह सेवा भी शुरू की जाएगी। इसका उद्देश्य छात्राओं को सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन उपलब्ध कराना है ताकि वे बिना किसी बाधा के उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं के नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

पहले दिन मनाया जाएगा प्रवेश उत्सव

नए शैक्षणिक सत्र के पहले दिन सभी महाविद्यालयों में “प्रवेश उत्सव” आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम के माध्यम से नए विद्यार्थियों का स्वागत किया जाएगा और उन्हें कॉलेज की विभिन्न सुविधाओं, पाठ्यक्रमों और शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी दी जाएगी।

सरकार का उद्देश्य कॉलेज जीवन की शुरुआत को विद्यार्थियों के लिए यादगार बनाना है।

स्थायी परिसरों के लिए भूमि चिन्हित करने की प्रक्रिया तेज

सरकार ने स्थायी कॉलेज परिसरों के निर्माण की दिशा में भी कदम बढ़ा दिए हैं। जिला प्रशासन को शहरी क्षेत्रों में न्यूनतम 2.5 एकड़ और ग्रामीण क्षेत्रों में कम से कम 5 एकड़ विवाद-मुक्त भूमि चिन्हित करने का निर्देश दिया गया है।

भूमि ऐसी जगह होनी चाहिए जहां छात्रों और शिक्षकों के लिए सालभर सड़क संपर्क उपलब्ध रहे। यदि कोई व्यक्ति या संस्था भूमि दान करती है तो महाविद्यालय का नाम दानदाता के नाम पर रखने का भी प्रावधान किया गया है।

मुख्य सचिव ने घोषणा की कि 30 जून को एक बार फिर सभी जिलों की तैयारियों की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद 1 जुलाई 2026 को बिहार में उच्च शिक्षा के इतिहास की सबसे बड़ी पहल औपचारिक रूप से शुरू होगी, जिससे राज्य के लाखों युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के नए अवसरों के द्वार खुलेंगे।

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