शेखपुरा (बिहार), 15 जुलाई 2025: प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) जैसी महत्वाकांक्षी और गरीबों के लिए चलाई जा रही केंद्र सरकार की योजना में शेखपुरा जिले से बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और अनियमितता की खबर सामने आई है। चेवाड़ा प्रखंड अंतर्गत चकंदरा पंचायत के कमलगढ़ गांव में वार्ड पार्षद रवि कुमार पर आरोप है कि उन्होंने अपने सगे-संबंधियों को लाभार्थी दिखाकर सरकारी राशि की बंदरबांट की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि रवि कुमार ने अपनी पत्नी सुनीता देवी, भाई राहुल कुमार और मां पुष्पा देवी के नाम पर आवास योजना का लाभ लिया, जबकि इन सभी के पास पहले से पक्का मकान है। इसके अलावा गणेश चौहान, देवनाथ चौहान सहित दर्जनों लोगों को अपात्र होते हुए भी लाभार्थी बना दिया गया।
20-25 प्रतिशत हिस्सेदारी की होती है ‘डील’?
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, आवास योजना में मिलने वाली ₹1,20,000 की राशि में से स्थानीय प्रतिनिधि और आवास सहायक 20-25% तक हिस्सा लेते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस खेल में प्रखंड स्तर के कुछ अधिकारियों की भी मिलीभगत है।
अधिकतर लाभार्थी अमीर, मानकों को किया गया नजरअंदाज
वर्ष 2024-25 की लाभार्थी सूची की जांच करने पर पाया गया कि करीब 95% नाम ऐसे लोगों के हैं, जिनके पास दोपहिया वाहन, पक्का घर और आय का स्थिर स्रोत मौजूद है। जबकि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत साफ तौर पर निर्देश है कि लाभार्थी के पास पहले से पक्का मकान, मोटर वाहन या ठोस आमदनी नहीं होनी चाहिए।
वार्ड पार्षद ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
आरोपों पर सफाई देते हुए वार्ड पार्षद रवि कुमार ने कहा है, “सभी आरोप निराधार हैं। योजना का लाभ उन्हीं लोगों को दिया गया है, जिनके पास पक्का घर नहीं है।”
डीडीसी ने दिया जांच का आश्वासन
उपविकास आयुक्त संजय कुमार ने कहा है कि “अभी तक मामले में कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। यदि शिकायत प्राप्त होती है तो इसकी जांच की जाएगी और जो भी दोषी होंगे, उन पर कार्रवाई तय है।”
जनता ने की निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध वित्तीय अनियमितता के तहत प्राथमिकी दर्ज कर कठोर कार्रवाई की मांग की है।


