प्रयागराज | 22 फरवरी, 2026: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की एक विशेष अदालत ने अविमुक्तेश्वरानंद, मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और अन्य के विरुद्ध यौन शोषण के गंभीर आरोपों में तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने शनिवार को सुनवाई के दौरान स्पष्ट निर्देश दिया कि पॉक्सो (POCSO) एक्ट के प्रावधानों के तहत इस मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और त्वरित जांच सुनिश्चित की जाए।
कोर्ट का आदेश और न्यायाधीश की टिप्पणी
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) विनोद कुमार चौरसिया ने आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा दायर प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। न्यायालय ने पाया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए कानून सम्मत कार्रवाई और जांच को तेज करना आवश्यक है।
जांच रिपोर्ट और बयानों के आधार पर कार्रवाई
न्यायालय ने अपने आदेश में कई महत्वपूर्ण तथ्यों का उल्लेख किया है, जिनके आधार पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया:
- आशुतोष ब्रह्मचारी का आवेदन: मामले की शुरुआत आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा कोर्ट में दी गई अर्जी से हुई।
- पीड़ितों के बयान: कोर्ट ने ‘पीड़ित ए’ और ‘पीड़ित बी’ के बयानों को संज्ञान में लिया, जिनमें आरोपियों पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
- पुलिस की जांच रिपोर्ट: एडिशनल पुलिस कमिश्नर द्वारा प्रस्तुत की गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में भी आरोपों की पुष्टि की गई है, जिसे कोर्ट ने आधार बनाया।
स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच का निर्देश
विशेष अदालत ने पुलिस प्रशासन को निर्देशित किया है कि इस पूरे मामले की जांच पूरी तरह से स्वतंत्र और किसी भी प्रभाव से मुक्त होनी चाहिए। पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत होने वाली इस जांच में पारदर्शिता बरतने और इसे समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर जोर दिया गया है।
मामला क्या है?
आशुतोष ब्रह्मचारी की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार, अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद ब्रह्मचारी सहित अन्य लोग यौन शोषण की गतिविधियों में संलिप्त रहे हैं। इन आरोपों के समर्थन में पीड़ितों के बयान और विभागीय जांच रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की गई थी, जिसके बाद अब कानूनी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।


