
पटना | 28 फरवरी, 2026: बिहार के दुग्ध उत्पादक किसानों और सहकारी समितियों के लिए एक नई सुबह की शुरुआत होने जा रही है। राज्य में “सहकारिता से समृद्धि” के मंत्र को धरातल पर उतारने के लिए कॉमफेड (COMFED) और बिहार स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक (BSCB) ने एक साथ मिलकर काम करने की ऐतिहासिक योजना बनाई है। शुक्रवार को हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में निर्णय लिया गया कि अब दूध का पैसा सीधे किसानों के खाते में बिना किसी देरी के ‘रियल-टाइम’ ट्रांसफर किया जाएगा।
दो दिग्गजों का महामिलन: कौन-कौन रहे मौजूद?
पटना में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता कॉमफेड के प्रबंध निदेशक श्री समीर सौरभ ने की। इसमें बिहार स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के वरिष्ठ पदाधिकारी भी शामिल हुए। बैठक का मुख्य केंद्र “Cooperation among Cooperatives” (सहकारिताओं के बीच सहयोग) की रणनीति को प्रभावी बनाना रहा।
तकनीकी क्रांति: विकसित होगा सुदृढ़ MIS सिस्टम
बैठक में दूध संग्रहण से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए एक हाई-टेक प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS) विकसित करने पर सहमति बनी है।
इस नई प्रणाली के मुख्य लाभ:
- रियल-टाइम भुगतान: अब किसानों को अपने दूध के मूल्य के लिए लंबा इंतजार नहीं करना होगा।
- पारदर्शी ट्रैकिंग: दूध का संग्रहण, किसानों की सदस्यता और वित्तीय लेन-देन की हर गतिविधि को ऑनलाइन ट्रैक किया जा सकेगा।
- डिजिटल ऑनबोर्डिंग: प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों (PDCS) और दूध उत्पादक किसानों को व्यापक स्तर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा।
सहकारी संरचना का सशक्तीकरण
इस पहल का उद्देश्य केवल भुगतान ही नहीं, बल्कि किसानों का वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) भी है।
- किसानों की ताकत: इस एकीकरण से दुग्ध उत्पादक किसानों की सहकारी ढांचे में भागीदारी और भी मजबूत होगी।
- दक्षता में सुधार: कॉमफेड और सहकारी बैंक के बीच तकनीकी तालमेल से राज्य के दुग्ध आंदोलन को नई गति मिलेगी।
VOB का नजरिया: क्या मिटेगी बिचौलियों की भूमिका?
बिहार में दुग्ध सहकारिता एक बड़ा आधार है, लेकिन अक्सर भुगतान में देरी और पारदर्शिता की कमी किसानों के लिए सिरदर्द बनी रहती है। COMFED और BSCB का यह संयुक्त प्रयास एक ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकता है। ‘रियल-टाइम’ भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में जाने से बिचौलियों का प्रभाव कम होगा और किसानों का सहकारिता व्यवस्था पर भरोसा बढ़ेगा। हालांकि, ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और किसानों की डिजिटल साक्षरता इस योजना की सफलता की असली परीक्षा होगी।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


