गिग वर्कर्स और बंधुआ श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा की बड़ी सौगात

दो अहम समझौतों पर हस्ताक्षर, ‘जागरूकता’ जिंगल से गूंजा श्रमिक सम्मान का संदेश

पटना, 08 अगस्त।बिहार में गिग वर्कर्स और बंधुआ श्रमिकों के लिए शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक रहा। श्रम संसाधन विभाग ने इंटरनेशनल जस्टिस मिशन (आईजेएम) और इंडस एक्शन इनिशिएटिव के साथ दो महत्वपूर्ण समझौतों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। मकसद—श्रमिकों को सिर्फ सामाजिक सुरक्षा ही नहीं, बल्कि गरिमामयी जीवन और समाज की मुख्यधारा से जुड़ाव भी दिलाना।

पटना स्थित श्रम संसाधन विभाग के प्रतिबिंब सभागार में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में “जागरूकता” नामक एक प्रेरक जिंगल का भी विमोचन हुआ, जिसका लक्ष्य है—श्रमिकों के अधिकारों के प्रति जन-जन में जागरूकता की लहर पैदा करना।

श्रमायुक्त बोले—मील का पत्थर साबित होगा यह कदम
राज्य के श्रमायुक्त राजेश भारती ने इस पहल को गिग वर्कर्स और बंधुआ श्रमिकों के सामाजिक एकीकरण की दिशा में मील का पत्थर करार दिया। उन्होंने बताया कि हाल ही में विधानसभा और विधान परिषद द्वारा “बिहार प्लेटफ़ॉर्म आधारित गिग कामगार (निबंधन, सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण) विधेयक” पारित किया गया है। इसके तहत एक विशेष बोर्ड का गठन होगा, जो गिग वर्करों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

उन्होंने आईजेएम और इंडस एक्शन की भागीदारी को भविष्य की नीतियों के लिए बेहद अहम बताया और कहा कि इनके अनुभव से राज्य में श्रमिक कल्याण की दिशा में मजबूत आधार तैयार होगा।

जागरूकता जिंगल से उठेगी आवाज
कार्यक्रम में बंधुआ मजदूरी के खिलाफ तैयार किए गए “जागरूकता” जिंगल का भी शुभारंभ किया गया। इसे आम जनता तक विभिन्न प्रचार माध्यमों से पहुंचाया जाएगा। लक्ष्य है—बंधुआ प्रथा जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ व्यापक जनमत तैयार करना।

इसके तहत आम नागरिक विभागीय टोल फ्री नंबर पर बंधुआ मजदूरी के मामलों की पहचान और रिपोर्ट कर सकेंगे, जिससे पीड़ितों को समय पर न्याय और सहायता मिल सके।

बंधुआ मजदूरी से आज़ादी की प्रेरक कहानियां
इस मौके पर आईजेएम के सहयोग से मुक्त हुए बंधुआ श्रमिक गोविंद पासवान और देवेंद्र मांझी ने अपने संघर्ष की भावुक कहानी सुनाई। कभी बेंगलुरु में बंधुआ मजदूरी के शिकार रहे ये लोग आज सम्मानजनक जिंदगी जी रहे हैं। उनकी बातों ने वहां मौजूद हर शख्स को यह विश्वास दिलाया कि पुनर्वास न सिर्फ संभव है, बल्कि पूरी तरह प्रभावी भी।

समझौतों का सीधा असर

  • आईजेएम के साथ एमओयू: बंधुआ मजदूरी की पहचान, मुक्ति, प्रमाण-पत्र जारी करने और पुनर्वास प्रक्रिया में संस्थागत दक्षता आएगी।
  • इंडस एक्शन के साथ एमओयू: बिहार सरकार को गिग वर्करों की सामाजिक सुरक्षा नीति बनाने में तकनीकी मदद मिलेगी।

बिहार बन सकता है राष्ट्रीय मॉडल
यह पहल बिहार को देश के लिए एक रोल मॉडल बनाने की दिशा में मजबूत कदम है—जहां श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें गरिमामयी जीवन देने की प्रतिबद्धता सिर्फ कागज़ों पर नहीं, बल्कि जमीन पर नजर आएगी।


 

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