- केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के रूप में किया नामित
- कॉम्फेड (COMFED) अध्यक्ष को प्रतिनिधित्व मिलने से बिहार के पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों की आय में होगी भारी वृद्धि
- ‘सात निश्चय-3’ के तहत हर गांव में दुग्ध उत्पादन समिति बनाने के लक्ष्य को मिलेगा राष्ट्रीय मंच का साथ
द वॉयस ऑफ बिहार (पटना)
बिहार के डेयरी और पशुपालन क्षेत्र के लिए बुधवार (11 फरवरी) को एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव सह कॉम्फेड (COMFED) के अध्यक्ष श्री शीर्षत कपिल अशोक को राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के निदेशक मंडल में ‘बोर्ड ऑफ डायरेक्टर’ के रूप में नामित किया है। उनके इस मनोनयन से बिहार सहित पूरे देश के डेयरी क्षेत्र को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद जगी है।
बिहार और केंद्र के बीच बनेगा मजबूत सेतु
श्री शीर्षत कपिल अशोक को NDDB में जगह मिलने से राज्य और केंद्र की नीतियों के बीच एक शानदार तालमेल स्थापित होगा।
- बेहतर समन्वय: इस कदम से NDDB, कॉम्फेड और बिहार सरकार के पशु संसाधन विभाग के बीच योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन (Execution) को और अधिक गति मिलेगी।
- पशुपालकों की आय में वृद्धि: भारत सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की योजनाओं का सीधा लाभ अब और तेजी से राज्य के पशुपालकों तक पहुंचेगा, जिससे उनके जीवनस्तर और आय में भारी सुधार होगा।
किसान सशक्तिकरण और नवाचार को मिलेगा बल
माना जा रहा है कि श्री अशोक के लंबे प्रशासनिक अनुभव और कुशल नेतृत्व से दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे। इससे सहकारिता आधारित संगठनात्मक विकास, किसान सशक्तिकरण और डेयरी क्षेत्र में नए ‘नवाचार’ (Innovation) को मजबूती मिलेगी।
श्वेत क्रांति और NDDB का योगदान: > विदित हो कि देश और बिहार में सहकारी डेयरी आंदोलन को मजबूत करने में NDDB की भूमिका ‘श्वेत क्रांति’ के समय से ही ऐतिहासिक रही है। NDDB के मार्गदर्शन से ही बिहार में डेयरी सहकारिता ने नई ऊंचाइयों को छुआ है।
‘सात निश्चय-3’ और ‘श्वेत क्रांति 2.0’ का लक्ष्य होगा पूरा
बिहार सरकार अपनी महत्वाकांक्षी योजना ‘सात निश्चय-3’ के तहत राज्य के प्रत्येक गांव में दुग्ध उत्पादन समितियों के गठन का लक्ष्य लेकर चल रही है।
- श्री अशोक के NDDB बोर्ड में शामिल होने से इस जमीनी पहल को राष्ट्रीय स्तर का तकनीकी और संस्थागत सहयोग मिलेगा।
- इससे न सिर्फ बिहार में दुग्ध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, बल्कि यह केंद्र सरकार के सहकारिता मंत्रालय की महत्वाकांक्षी योजना ‘श्वेत क्रांति 2.0’ के लक्ष्यों को हासिल कर नए कीर्तिमान स्थापित करने में भी मील का पत्थर साबित होगा।


