भागलपुर में ‘भोलू’ की मौत या सोची-समझी हत्या? घर से बुलाकर ले गए, अस्पताल में ‘एक्सीडेंट’ बताकर भागे दोस्त; मायागंज में पसरा मातम

HIGHLIGHTS: जगदीशपुर में 24 साल के युवक की संदिग्ध मौत; ‘पिलाकर’ मारने का गंभीर आरोप

  • सनसनीखेज वारदात: कोल्हा खुर्द गांव के भोलू यादव (24 वर्ष) की संदेहास्पद स्थिति में मौत; घर से बुलाकर ले गए थे दोस्त।
  • अस्पताल से फरार: गंगदेव पापड़ी और मनसुख पासवान ने ‘सड़क हादसा’ बताकर मायागंज में भर्ती कराया और खुद रफूचक्कर हो गए।
  • परिजनों का ‘कत्ल’ का दावा: आरोप है कि भोलू को कुछ जहरीला पदार्थ पिलाया गया और उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई।
  • पुलिसिया तफ्तीश: जगदीशपुर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा; ‘कॉल डिटेल’ और ‘पोस्टमार्टम रिपोर्ट’ खोलेंगे राज।

भागलपुर | 20 मार्च, 2026

​सिल्क सिटी भागलपुर के जगदीशपुर इलाके में एक बार फिर ‘दोस्ती’ पर सवाल खड़े हो गए हैं। कोल्हा खुर्द निवासी स्व. अशोक यादव के इकलौते चिराग भोलू यादव की मौत ने पूरे गांव में हड़कंप मचा दिया है। यह हादसा है या सुनियोजित हत्या, इसकी गुत्थी अब अस्पताल और पुलिस स्टेशन के बीच उलझ गई है। परिजनों की चीख-पुकार और आरोपियों के भागने की कहानी ने इस मामले को ‘ब्लाइंड मर्डर’ की तरफ मोड़ दिया है।

“आओ साथ चलते हैं” — और फिर कभी नहीं लौटा भोलू

​परिजनों की मानें तो बुधवार की शाम भोलू के जीवन की आखिरी शाम साबित हुई:

  • बुलावा: गांव के ही कुछ परिचित भोलू को घर से साथ ले गए थे। परिवार को लगा कि दोस्तों के साथ गया है, वापस आ जाएगा।
  • रहस्यमयी सूचना: कुछ घंटों बाद गंगदेव पापड़ी नाम के व्यक्ति ने फोन कर बताया कि भोलू की हालत बहुत खराब है, उसकी सांसें नहीं चल रही हैं।
  • अस्पताल का ‘ड्रामा’: गंगदेव और मनसुख पासवान ने भोलू को मायागंज अस्पताल पहुँचाया। वहां उन्होंने डॉक्टरों से झूठ बोला कि यह ‘सड़क दुर्घटना’ (Road Accident) का मामला है। जैसे ही डॉक्टरों ने भोलू को मृत घोषित किया, दोनों युवक वहां से भाग निकले।

निशान जो ‘मर्डर’ की ओर इशारा कर रहे हैं!

​परिजनों ने अस्पताल में भोलू के शरीर को देखकर गंभीर आरोप लगाए हैं:

  1. मारपीट के निशान: आरोप है कि भोलू के शरीर पर चोट के निशान थे।
  2. जहर का शक: परिवार का दावा है कि उसे किसी अज्ञात स्थान पर ले जाकर कुछ संदिग्ध पदार्थ पिलाया गया था।
  3. फरारी: अगर यह साधारण सड़क हादसा था, तो भर्ती कराने वाले दोस्त पुलिस का इंतजार किए बिना क्यों भागे?

VOB का नजरिया: क्या ‘दोस्ती’ के लिबास में छिपे थे दुश्मन?

​भागलपुर में इस तरह की ‘संदेहास्पद मौतें’ अक्सर आपसी रंजिश या नशे के विवाद का नतीजा होती हैं। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि भोलू यादव के मामले में आरोपियों का अस्पताल से भाग जाना सबसे बड़ा ‘रेड फ्लैग’ है। अगर वे बेगुनाह थे, तो उन्हें पुलिस को पूरी बात बतानी चाहिए थी।

​जगदीशपुर पुलिस के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती गंगदेव पापड़ी और मनसुख पासवान को पकड़ना है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह साफ हो जाएगा कि मौत ‘इंटरनल इंजरी’ (अंदरूनी चोट) से हुई, ‘प्वाइजनिंग’ (जहर) से या वाकई किसी एक्सीडेंट से। लेकिन जिस तरह से भोलू को घर से बुलाया गया, वह किसी सोची-समझी साजिश की बू दे रहा है। क्या 24 साल के एक युवक का जीवन चंद विवादों की भेंट चढ़ गया? सच जल्द सामने आना चाहिए।

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