समाचार के मुख्य बिंदु: रेल परिसर में साहित्य का अनूठा संगम
- भव्य आयोजन: मालदा मंडल के डीआरएम मनीष कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में मुंगेर स्टेशन पर भवानी प्रसाद मिश्र जयंती समारोह संपन्न।
- श्रद्धांजलि: स्टेशन प्रबंधक राजीव कुमार की अध्यक्षता में राजभाषा विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम; तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर दी गई विदाई।
- विद्वानों का जमावड़ा: पटना और मुंगेर के नामचीन साहित्यकारों ने मिश्र जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर डाला विस्तृत प्रकाश।
- सम्मान की परंपरा: आमंत्रित वक्ताओं को अंगवस्त्र प्रदान कर रेलवे प्रशासन ने किया सम्मानित।
- साहित्यिक संदेश: वक्ताओं ने मिश्र जी की रचनाओं को सामाजिक चेतना और हिंदी संवर्द्धन का सशक्त माध्यम बताया।
- VOB इनसाइट: रेलवे स्टेशनों को केवल आवागमन का केंद्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और भाषाई चेतना के केंद्र के रूप में विकसित करने की यह एक सराहनीय पहल है।
मुंगेर | 25 मार्च, 2026
बिहार की ऐतिहासिक धरती मुंगेर, जो अपने गौरवमयी अतीत के लिए जानी जाती है, आज एक बार फिर हिंदी साहित्य की सुगंध से सराबोर हो उठी। अवसर था मालदा रेल मंडल द्वारा मुंगेर स्टेशन पर आयोजित प्रख्यात कवि और साहित्यकार भवानी प्रसाद मिश्र जी की जयंती का। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, मालदा मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) श्री मनीष कुमार गुप्ता के दिशा-निर्देश में राजभाषा विभाग ने इस गरिमामयी समारोह को मुंगेर की साहित्यिक धरोहर के साथ जोड़कर एक नई मिसाल पेश की है।
पुष्पांजलि और सम्मान: साहित्यकारों का भव्य स्वागत
समारोह का शुभारंभ स्टेशन प्रबंधक श्री राजीव कुमार की अध्यक्षता में हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ अनुवादक श्री विद्यासागर राम के स्वागत भाषण से हुई, जिसके बाद भवानी प्रसाद मिश्र जी के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। रेल प्रशासन ने परंपरा का निर्वहन करते हुए आमंत्रित वक्ताओं को अंगवस्त्र भेंट कर उनका अभिनंदन किया। कार्यक्रम में मुंगेर और पटना के प्रबुद्ध साहित्यकारों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई, जिससे पूरा स्टेशन परिसर साहित्यिक गोष्ठी में तब्दील हो गया।
प्रमुख वक्ता और मिश्र जी के साहित्य पर चर्चा
समारोह में शामिल विद्वानों ने भवानी प्रसाद मिश्र जी की रचनाओं की प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य वक्ता और उनके विचार निम्नलिखित हैं:
- प्रमुख प्रतिभागी: मुंगेर से श्री प्रमोद कुमार निराला, श्रीमती किरण शर्मा, श्री विजय वर्तानिया, डॉ. अंजनी कुमार सुमन, सुश्री श्रेया सुमन, श्री नवीन छवि, श्री निवास कुमार और पटना से आए श्री विनय कुमार झा ‘विमल’।
- साहित्यिक विश्लेषण: वक्ताओं ने कहा कि भवानी प्रसाद मिश्र केवल एक कवि नहीं थे, बल्कि वे संवेदनाओं के चितेरे थे। उनकी रचनाएं, विशेषकर ‘गीत फरोश’, आज भी समाज के अंतर्विरोधों को दर्शाने में उतनी ही सक्षम हैं जितनी दशकों पहले थीं।
- सामाजिक चेतना: वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि मिश्र जी की कृतियां साहित्य को नई दिशा प्रदान करती हैं और वर्तमान के कठिन दौर में उनकी प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है।
- राजभाषा का संवर्द्धन: मालदा मंडल की ओर से यह आयोजन सरकारी कामकाज में हिंदी के प्रभावी उपयोग और साहित्य के प्रति रेल कर्मियों की रुचि बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया गया।
VOB का नजरिया: रेल और साहित्य का बढ़ता जुड़ाव
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि मुंगेर स्टेशन पर इस तरह का आयोजन करना क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है।
- स्टेशनों का नया स्वरूप: रेल प्रशासन का यह प्रयास दिखाता है कि स्टेशन अब केवल प्लेटफॉर्म और पटरियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे जन-संवाद और भाषाई गौरव के मंच भी बन रहे हैं।
- युवा पीढ़ी को प्रेरणा: मुंगेर की नई पीढ़ी के लिए भवानी प्रसाद मिश्र जैसे दिग्गजों को जानना और उनकी कविताओं का सस्वर पाठ सुनना एक प्रेरणादायक अनुभव है।
- राजभाषा की शक्ति: हिंदी के संवर्द्धन के लिए केवल फाइलों में काम करना काफी नहीं है; ऐसे सार्वजनिक कार्यक्रमों से ही भाषा आम लोगों और कर्मचारियों के दिल तक पहुँचती है।
सुशासन और संस्कृति का समन्वय
मालदा मंडल द्वारा मुंगेर स्टेशन पर आयोजित यह जयंती समारोह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। बड़ी संख्या में रेल कर्मचारियों और स्थानीय नागरिकों की सहभागिता ने इसे एक जन-उत्सव का रूप दे दिया। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ उम्मीद करता है कि भविष्य में भी ऐसे आयोजन होते रहेंगे ताकि हमारी साहित्यिक विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहे।


