
भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बुधवार रात नया घटनाक्रम सामने आया, जब जिले के पुलिस अधीक्षक राज पीड़ित परिवार से मिलने उनके घर पहुंचे। दिन में महापंचायत के जरिए उठे जनाक्रोश और लगातार बढ़ते दबाव के बीच एसपी का यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है। रात के अंधेरे में अन्य पुलिसकर्मियों के साथ पहुंचे एसपी ने करीब एक घंटे तक भरत तिवारी के माता-पिता और अन्य परिजनों से बातचीत की। इस दौरान परिवार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस बार उन्हें किसी तरह का धोखा नहीं मिलना चाहिए और जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए।
भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर पहले से ही क्षेत्र में भारी तनाव और असंतोष का माहौल बना हुआ है। परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि मामले में कई ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब अब तक नहीं मिला है। यही वजह है कि न्याय की मांग लगातार तेज होती जा रही है। बुधवार को आयोजित महापंचायत में भी लोगों ने प्रशासन और सरकार पर गंभीर सवाल उठाए थे। उसी के कुछ घंटे बाद एसपी राज का परिवार से मिलना इस मामले को और महत्वपूर्ण बना गया।
सूत्रों के अनुसार, एसपी राज देर रात पुलिस टीम के साथ भरत तिवारी के घर पहुंचे। घर के बाहर पहले से स्थानीय लोगों की हलचल बनी हुई थी। परिवार के भीतर भावनात्मक माहौल था, जहां हर सदस्य अब भी बेटे की मौत के सदमे से उबर नहीं पाया है। एसपी ने परिवार के साथ बैठकर विस्तार से बातचीत की और उनकी शिकायतें सुनीं।
मुलाकात के दौरान एसपी राज ने परिजनों से कहा कि उनका उद्देश्य अपनी बात रखना नहीं बल्कि परिवार की पीड़ा और पक्ष को समझना है। उन्होंने कहा कि पुलिस हर पहलू की गंभीरता से जांच कर रही है और किसी भी तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। एसपी ने परिवार को भरोसा दिलाने की कोशिश की कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ेगी।
हालांकि परिवार ने इस बार केवल आश्वासनों से संतुष्ट होने से इनकार कर दिया। परिजनों ने एसपी से साफ कहा कि उन्हें पहले भी कई तरह के वादे सुनने को मिले, लेकिन न्याय अब तक अधूरा है। उन्होंने कहा कि इस बार किसी भी स्तर पर धोखा नहीं मिलना चाहिए। परिवार की मांग थी कि आगे जो भी कार्रवाई हो, वह तथ्यों और निष्पक्ष जांच के आधार पर हो।
भरत तिवारी की मां ने इस मुलाकात के दौरान सबसे भावुक अपील की। उन्होंने बेटे की मौत को लेकर गहरी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें अब केवल न्याय चाहिए। उन्होंने मांग रखी कि पूरे मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी CBI से कराई जाए ताकि किसी भी प्रकार के प्रभाव या दबाव की आशंका समाप्त हो सके। साथ ही उन्होंने घटना में शामिल दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।
मां ने कहा कि परिवार अब केवल वादों पर भरोसा नहीं कर सकता। उन्हें ऐसा तंत्र चाहिए जो निष्पक्ष तरीके से सच सामने लाए। परिजनों का कहना है कि अगर जांच स्वतंत्र एजेंसी से होगी तो लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा और न्याय की प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी।
करीब एक घंटे तक चली बातचीत में एसपी राज ने परिवार की हर बात ध्यान से सुनी। उन्होंने बीच-बीच में जांच से जुड़े पहलुओं पर जानकारी भी दी, हालांकि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचते नजर आए। मुलाकात समाप्त होने के बाद एसपी वहां से रवाना हो गए, लेकिन परिवार की मांगें और सवाल पहले की तरह कायम रहे।
दूसरी ओर, राज्य सरकार ने भी इस मामले में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर उठ रहे सवालों और बढ़ते जनदबाव के बीच मंत्रिपरिषद ने न्यायिक जांच आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। सरकार के इस निर्णय को मामले की गंभीरता को स्वीकार करने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार द्वारा गठित न्यायिक जांच आयोग की जिम्मेदारी पटना हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा को सौंपी गई है। आयोग को घटना से जुड़े हर पहलू की विस्तृत जांच करनी होगी। इसके तहत मुठभेड़ की परिस्थितियां, पुलिस कार्रवाई, उपलब्ध साक्ष्य और घटनाक्रम से जुड़े सभी बिंदुओं की समीक्षा की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा।
इस बीच बुधवार को आयोजित महापंचायत में लोगों ने कई अहम मांगें उठाईं। पंचायत में शामिल ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय प्रतिनिधियों ने कहा कि भरत तिवारी केवल अपने लिए नहीं, बल्कि जवइनिया गांव के विस्थापित और पीड़ित लोगों की आवाज उठा रहे थे। उनका संघर्ष समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों से जुड़ा हुआ था।
महापंचायत में एक विशेष मांग यह भी उठी कि जिस स्थान पर जवइनिया गांव के विस्थापित लोगों को बसाया जा रहा है, उस इलाके का नाम “भरत तिवारी नगर” रखा जाए। पंचायत में मौजूद लोगों का कहना था कि इससे आने वाली पीढ़ियां भरत तिवारी के संघर्ष और बलिदान को याद रखेंगी। उनका मानना है कि यह केवल नामकरण नहीं, बल्कि सामाजिक सम्मान का प्रतीक होगा।
महापंचायत में मौजूद लोगों ने सरकार और प्रशासन से इस मांग पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। कई वक्ताओं ने कहा कि भरत तिवारी की मौत केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह उन सवालों का प्रतीक बन चुकी है जो आम लोगों के अधिकार और न्याय से जुड़े हैं।
फिलहाल पूरे भोजपुर और आसपास के क्षेत्रों में इस मामले को लेकर चर्चा तेज है। न्यायिक जांच, पुलिस कार्रवाई और जनदबाव—इन तीनों के बीच अब सभी की नजर आगामी घटनाक्रम पर टिकी हुई है। भरत तिवारी के परिवार को उम्मीद है कि इस बार जांच केवल औपचारिकता बनकर नहीं रह जाएगी, बल्कि सच सामने आएगा।
आने वाले दिनों में जांच आयोग की कार्रवाई, पुलिस की रिपोर्ट और प्रशासनिक निर्णय इस मामले की दिशा तय करेंगे। लेकिन फिलहाल एक बात साफ है—भरत तिवारी के परिवार और समर्थकों की सबसे बड़ी मांग केवल एक है, और वह है निष्पक्ष न्याय, बिना किसी समझौते के।


