
भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। मामले को लेकर राज्य सरकार द्वारा न्यायिक जांच की मंजूरी मिलने के बाद जांच प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पटना हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में गठित जांच आयोग बुधवार को बिलौटी गांव पहुंचा, जहां टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और मृतक भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात कर उनका पक्ष जाना। इस दौरान भरत तिवारी की मां ने भावुक होते हुए अपने बेटे की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने साफ कहा कि उनके बेटे के हत्यारों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए और पूरे मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी CBI से कराई जानी चाहिए।
भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर पिछले कई दिनों से राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों और परिजनों का आरोप है कि यह मुठभेड़ संदिग्ध परिस्थितियों में हुई और मामले में कई ऐसे पहलू हैं जिनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। इसी बढ़ते दबाव के बीच सरकार ने न्यायिक जांच का फैसला लिया। अब जांच आयोग के गांव पहुंचने से लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं कि मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।
जांच आयोग के साथ शाहाबाद रेंज के DIG सत्य प्रकाश, भोजपुर के जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया, पुलिस अधीक्षक राज समेत कई प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे। टीम ने गांव में पहुंचकर उन स्थानों का बारीकी से निरीक्षण किया, जो घटना से सीधे जुड़े बताए जा रहे हैं। अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से भी बातचीत की और घटनाक्रम को समझने का प्रयास किया।
जांच के दौरान सबसे भावुक पल तब आया जब आयोग के अध्यक्ष ने भरत तिवारी के माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात की। परिवार ने पूरे घटनाक्रम को विस्तार से बताया और अपनी पीड़ा साझा की। भरत के परिजनों का कहना है कि उन्हें अब भी न्याय का इंतजार है और वे चाहते हैं कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ हो।
भरत तिवारी की मां आशा देवी ने जांच टीम के सामने बेहद स्पष्ट शब्दों में अपनी मांग रखी। उन्होंने कहा कि उनके बेटे को न्याय तभी मिलेगा जब इस घटना में शामिल सभी दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी। उनका कहना था कि जब जांच आयोग के अध्यक्ष ने उनसे पूछा कि वे क्या चाहती हैं, तो उन्होंने बिना किसी हिचक के कहा कि बेटे की हत्या करने वाले हर व्यक्ति को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिस SDM पर परिवार को शक है, वह भी जांच टीम के साथ मौजूद था। आशा देवी ने कहा कि उन्होंने संबंधित अधिकारी के सामने भी यही बात दोहराई कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाना चाहिए।
परिवार ने यह भी मांग उठाई कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए। उनका मानना है कि स्थानीय स्तर पर जांच होने से कई महत्वपूर्ण तथ्य दब सकते हैं। इसी कारण CBI जांच की मांग लगातार जोर पकड़ रही है। परिजनों का कहना है कि वे किसी भी तरह की औपचारिक जांच से अधिक निष्पक्ष और निष्कर्ष आधारित जांच चाहते हैं, ताकि सच्चाई पूरी तरह सामने आ सके।
आयोग के अध्यक्ष विनोद कुमार सिन्हा ने हालांकि इस चरण में मीडिया के सामने किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और इस समय किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। उनका कहना था कि सभी पक्षों को सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का अध्ययन करने के बाद ही आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा।
इस बीच भोजपुर के पुलिस अधीक्षक राज भी घटना के आठ दिन बाद भरत तिवारी के घर पहुंचे। उन्होंने लगभग एक घंटे तक परिवार के साथ बातचीत की। पुलिस अधीक्षक ने परिजनों से कहा कि उनका दौरा किसी सफाई या औपचारिकता के लिए नहीं है, बल्कि वे परिवार की पीड़ा को समझने आए हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाते हुए कहा कि मामले में तथ्यों के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
हालांकि परिवार ने पुलिस प्रशासन के आश्वासनों पर पूरी तरह भरोसा नहीं जताया। बातचीत के दौरान भरत की मां ने फिर से दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और CBI जांच की मांग दोहराई। परिवार का कहना है कि केवल आश्वासन से न्याय नहीं मिलेगा, बल्कि ठोस कार्रवाई जरूरी है।
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल बढ़ा दी है। कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की थी। लगातार बढ़ते जनदबाव के बाद बिहार कैबिनेट ने न्यायिक जांच के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके बाद आधिकारिक रूप से जांच आयोग का गठन किया गया। सरकार के इस फैसले को मामले में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बिलौटी गांव में भरत तिवारी एनकाउंटर के विरोध में महापंचायत का आयोजन भी किया गया था। इस पंचायत में बड़ी संख्या में ग्रामीण और सामाजिक संगठन शामिल हुए। पंचायत के दौरान लोगों ने भरत तिवारी द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों को भी सामने रखा और सरकार से उन मांगों को पूरा करने की अपील की। ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े कई सामाजिक और प्रशासनिक सवाल भी हैं।
महापंचायत में शामिल लोगों ने सरकार को चेतावनी भी दी। उनका कहना था कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो श्राद्धकर्म के बाद बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसमें विधानसभा घेराव जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं। इस चेतावनी ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
फिलहाल पूरे मामले पर राज्य की नजर बनी हुई है। न्यायिक जांच शुरू होने के बाद अब सभी की उम्मीदें आयोग की रिपोर्ट पर टिकी हैं। भरत तिवारी के परिवार, गांव के लोगों और सामाजिक संगठनों को उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष होगी और जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आने वाले दिनों में आयोग की जांच और उसके निष्कर्ष इस मामले की दिशा तय करेंगे। फिलहाल बिलौटी गांव में एक ही आवाज सुनाई दे रही है—न्याय चाहिए, और वह भी बिना किसी समझौते के।


