HIGHLIGHTS: ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ‘सफ़ेद क्रांति’ पर दिल्ली से बड़ी खबर
- बड़ा सवाल: भागलपुर सांसद ने लोकसभा में किसानों की आय और डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर सरकार को घेरा।
- भारी निवेश: नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट (NPDD) के तहत बिहार में ₹34,601.85 लाख की 19 परियोजनाएं मंजूर।
- उद्यमिता: राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) के जरिए अब बिहार के युवा पशुपालन में बनेंगे ‘बिजनेसमैन’।
- KCC राहत: पशुपालकों को भी अब खेती की तर्ज पर मिलेगा सस्ता कर्ज; टीकाकरण अभियान से पशु रहेंगे सुरक्षित।
नई दिल्ली/भागलपुर | 19 मार्च, 2026
भागलपुर के सांसद ने दिल्ली के सियासी गलियारे में अंग क्षेत्र के किसानों और पशुपालकों की आवाज को मजबूती से बुलंद किया है। 17 मार्च को लोकसभा में पूछे गए प्रश्न संख्या 3978 के जरिए उन्होंने केंद्र सरकार से बिहार में डेयरी और पशुपालन की स्थिति पर जवाब मांगा। सरकार की ओर से मिले उत्तर ने बिहार के ग्रामीण इलाकों में ‘सफेद क्रांति’ की नई उम्मीद जगा दी है।
किसानों की जेब भरने का ‘मास्टर प्लान’
सांसद के सवाल पर केंद्र सरकार ने बिहार के लिए खजाना खोलते हुए कई अहम जानकारियां साझा कीं:
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- ₹346 करोड़ का बूस्टर डोज: बिहार में डेयरी ढांचे को मजबूत करने के लिए ₹34601.85 लाख की 19 बड़ी योजनाओं पर काम शुरू हो चुका है।
- देशी नस्ल पर जोर: राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत भागलपुर समेत पूरे बिहार में देशी गायों की नस्ल सुधारने और दूध की गुणवत्ता बढ़ाने पर काम हो रहा है।
- बीमारियों पर लगाम: पशुधन स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत लाखों पशुओं का मुफ्त टीकाकरण किया जा रहा है, ताकि किसानों को अचानक होने वाले नुकसान से बचाया जा सके।
”किसानों की आय बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना मेरी पहली प्राथमिकता है। भागलपुर के पशुपालकों को दिल्ली की योजनाओं का सीधा लाभ मिले, इसके लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ।”
— माननीय सांसद, भागलपुर
VOB का नजरिया: क्या ‘डेयरी’ बनेगा बिहार का नया ग्रोथ इंजन?
बिहार में खेती के साथ पशुपालन हमेशा से जीवनरेखा रहा है, लेकिन मार्केटिंग और प्रोसेसिंग के अभाव में किसानों को सही दाम नहीं मिल पाता था। सांसद द्वारा लोकसभा में यह मुद्दा उठाना और ₹346 करोड़ की परियोजनाओं की पुष्टि होना एक सकारात्मक संकेत है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि अगर AHIDF और NLM जैसी योजनाएं जमीन पर सही तरीके से लागू हुईं, तो भागलपुर का ‘सुधा’ मॉडल और भी बड़े स्तर पर उभर सकता है। चुनौती केवल इतनी है कि KCC जैसी ऋण सुविधाओं का लाभ लेने में किसानों को बैंकों के चक्कर न काटने पड़ें।


