विश्व जनसंख्या स्थिरता दिवस पर भागलपुर में बनी रणनीति, 11 से 31 जुलाई तक विशेष सेवा पखवाड़े में परिवार नियोजन सेवाओं पर रहेगा जोर

भागलपुर: विश्व जनसंख्या स्थिरता दिवस के अवसर पर भागलपुर में जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से एक महत्वपूर्ण जिला स्तरीय कार्यशाला और समन्वय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में आगामी 11 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक चलने वाले विशेष परिवार नियोजन सेवा पखवाड़े को सफल बनाने के लिए विस्तृत रणनीति तैयार की गई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इस अभियान को केवल स्वास्थ्य कार्यक्रम न मानकर सामाजिक जागरूकता का व्यापक अभियान बनाने पर जोर दिया। साथ ही यह संकल्प लिया गया कि जिले के प्रत्येक पात्र दंपति तक परिवार नियोजन की गुणवत्तापूर्ण सेवाएं पहुंचाई जाएंगी।

लोकनायक जयप्रकाश नारायण सदर अस्पताल के सभागार में आयोजित इस कार्यशाला की अध्यक्षता अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सह जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. धनंजय कुमार ने की। बैठक में जिले के सभी प्रखंडों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक, प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी तथा स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने सेवा पखवाड़े को सफल बनाने के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प लिया।

बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. धनंजय कुमार ने कहा कि जनसंख्या स्थिरता किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के समग्र विकास से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि नियंत्रित और संतुलित जनसंख्या से स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पोषण और आर्थिक विकास जैसे सभी क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए प्रत्येक स्वास्थ्य कर्मी की जिम्मेदारी है कि वह परिवार नियोजन सेवाओं को प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाए।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सेवा पखवाड़े के दौरान स्वास्थ्य संस्थानों में परिवार नियोजन से संबंधित सभी अस्थायी और स्थायी साधनों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी लाभार्थी को केवल संसाधनों की कमी के कारण सेवा से वंचित नहीं रहना चाहिए। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, पारदर्शिता और संवेदनशीलता बनाए रखने पर भी विशेष बल दिया।

जिला कार्यक्रम प्रबंधक मणि भूषण झा ने कहा कि इस अभियान की सफलता ब्लॉक स्तर पर बेहतर योजना और नियमित समीक्षा पर निर्भर करेगी। उन्होंने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे प्रतिदिन अभियान की प्रगति की समीक्षा करें तथा यह सुनिश्चित करें कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक भी परिवार नियोजन सेवाएं प्रभावी ढंग से पहुंचें। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म स्तर पर की गई योजना ही इस अभियान को सफल बनाएगी।

कार्यशाला के दौरान जिला लेखा प्रबंधक सोमेश झा ने अभियान के वित्तीय पक्ष पर जानकारी देते हुए कहा कि सेवा पखवाड़े के दौरान होने वाले सभी भुगतानों का समय पर निपटारा किया जाएगा। उन्होंने विशेष रूप से आशा कार्यकर्ताओं को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का भुगतान समय पर सुनिश्चित करने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि वित्तीय पारदर्शिता और समय पर भुगतान से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता दोनों मजबूत होंगी।

जिला सामुदायिक उत्प्रेरक भरत कुमार सिंह ने बताया कि आशा कार्यकर्ताओं द्वारा परिवार नियोजन सेवाओं के पात्र लाभार्थियों की पहचान और लाइन लिस्टिंग का कार्य पहले ही पूरा कर लिया गया है। अब इस सूची के आधार पर प्रत्येक लाभार्थी तक सेवाएं पहुंचाने का कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी इस अभियान की सफलता में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

जिला मूल्यांकन एवं अनुश्रवण पदाधिकारी अंजनी मिश्रा ने अभियान के दौरान डिजिटल निगरानी और डेटा प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों को प्रतिदिन पोर्टल पर सही और अद्यतन जानकारी दर्ज करनी होगी। इससे अभियान की वास्तविक प्रगति का आकलन किया जा सकेगा और यदि कहीं कोई कमी होगी तो उसका समय रहते समाधान किया जा सकेगा।

कार्यशाला में तकनीकी सहयोगी संस्थाओं की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई। पीएसआई इंडिया के प्रतिनिधि नवीन राय ने कहा कि परिवार नियोजन के विभिन्न विकल्पों के बारे में समाज में व्यापक जागरूकता फैलाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि लोगों को यह जानकारी होनी चाहिए कि परिवार नियोजन के कई सुरक्षित और प्रभावी विकल्प उपलब्ध हैं, जिनका चयन अपनी आवश्यकता और स्वास्थ्य के अनुसार किया जा सकता है।

पीएसआई इंडिया के प्रतिनिधि अय्याज आलम अशरफी ने आधुनिक गर्भनिरोधक इंप्लांट के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि यह महिलाओं के लिए तीन वर्षों तक अनचाहे गर्भ से सुरक्षा प्रदान करने वाला सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है। उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों से आग्रह किया कि पात्र दंपतियों को इस विकल्प की सही जानकारी और परामर्श उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे सूचित निर्णय ले सकें।

बैठक में पिरामल स्वास्थ्य संस्था के प्रतिनिधि विजय कुमार और मनोज वर्मा ने भी भाग लिया। उन्होंने कहा कि उनकी संस्था जिला स्वास्थ्य समिति के साथ मिलकर पूरे सेवा पखवाड़े के दौरान निगरानी, तकनीकी सहयोग और जनजागरूकता गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाएगी। उन्होंने अभियान को प्रभावी बनाने के लिए हरसंभव सहयोग देने का भरोसा दिया।

बैठक के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जनसंख्या स्थिरता का लक्ष्य केवल स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों से हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय आवश्यक है। इसी उद्देश्य से जीविका, आईसीडीएस, कल्याण विभाग, महादलित मिशन, आपूर्ति विभाग और अन्य संबंधित विभागों को अभियान से जोड़ने की रणनीति तैयार की गई।

अधिकारियों ने बताया कि आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती और धात्री महिलाओं को परिवार नियोजन और मातृ स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। जीविका दीदियां गांव-गांव जाकर महिलाओं के बीच संवाद स्थापित करेंगी। वहीं महादलित मिशन और कल्याण विभाग के सहयोग से समाज के पिछड़े और वंचित वर्गों तक अभियान का संदेश पहुंचाया जाएगा। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के नेटवर्क का उपयोग भी जनजागरूकता के लिए करने पर चर्चा की गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि परिवार नियोजन केवल जनसंख्या नियंत्रण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधारने, महिलाओं के सशक्तिकरण, परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और बच्चों को बेहतर शिक्षा एवं पोषण उपलब्ध कराने का भी महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए इस विषय पर समाज में सकारात्मक संवाद और सही जानकारी पहुंचाना बेहद आवश्यक है।

कार्यशाला के अंत में सभी अधिकारियों और प्रतिभागियों ने एकजुट होकर 11 से 31 जुलाई तक चलने वाले विशेष सेवा पखवाड़े को जनभागीदारी के माध्यम से सफल बनाने का संकल्प लिया। स्वास्थ्य विभाग ने विश्वास जताया कि बहुविभागीय सहयोग, आशा कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका, तकनीकी संस्थाओं के समर्थन और आम लोगों की भागीदारी से यह अभियान जिले में परिवार नियोजन सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाएगा तथा जनसंख्या स्थिरता के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

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