
भागलपुर | 24 फरवरी, 2026: होली के त्योहार में अब कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन इस बार भागलपुर की गलियों में केमिकल वाले नुकसानदेह रंगों की जगह ‘सेहत वाले रंग’ बिखरेंगे। शहर की उद्यमी महिला प्रिया सोनी के नेतृत्व में महिलाओं की एक टीम ने बाजार में बिकने वाले जहरीले रंगों को करारा जवाब देते हुए फूलों और सब्जियों से प्राकृतिक गुलाल तैयार किया है। इनकी यह पहल न केवल लोगों की त्वचा सुरक्षित रखेगी, बल्कि महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए द्वार भी खोल रही है।
रसोई से निकला रंगों का खजाना: पालक से हरा तो चुकंदर से लाल
भागलपुर की इन महिलाओं ने पारंपरिक पद्धति और आधुनिक सोच का ऐसा संगम किया है कि गुलाल की चमक देखकर हर कोई हैरान है। इन्होंने गुलाल बनाने के लिए किसी केमिकल का नहीं, बल्कि सीधे प्रकृति का सहारा लिया है:
- लाल और गुलाबी: चुकंदर (Beetroot) के रस से।
- पीला: हल्दी और गेंदा के फूलों से।
- हरा: पालक और औषधीय पत्तियों से।
- केसरिया: पलाश के फूलों से, जिन्हें ‘टेसू’ भी कहा जाता है।
बाजार के रंगों से क्यों बेहतर है यह ‘देसी गुलाल’?
प्रिया सोनी और उनकी टीम का कहना है कि बाजार में मिलने वाले सस्ते और चमकीले रंगों में भारी मात्रा में लेड, क्रोमियम और कांच के बारीक कण होते हैं। इनसे आंखों में जलन, त्वचा पर चकत्ते और एलर्जी की गंभीर समस्याएं होती हैं। इसके विपरीत, महिलाओं द्वारा तैयार यह प्राकृतिक गुलाल पूरी तरह से सुरक्षित है। रंग इतना पक्का है कि खुशियों की तरह खिल जाए, और इतना कच्चा कि पानी की एक बौछार से उतर जाए।
महिला सशक्तिकरण की नई इबारत
यह पहल सिर्फ रंगों तक सीमित नहीं है। प्रिया सोनी की इस मुहिम से भागलपुर की कई अन्य महिलाएं भी जुड़ी हैं, जिन्हें अब घर बैठे स्वरोजगार मिल रहा है। स्थानीय बाजारों में इस प्राकृतिक गुलाल की मांग तेजी से बढ़ रही है। लोग अब जागरूक हो रहे हैं और अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए केमिकल फ्री रंगों को तरजीह दे रहे हैं।
सेहत और जागरूकता वाली होली
महिलाओं का कहना है कि उन्होंने यह कदम इसलिए उठाया ताकि लोग होली के बाद अस्पतालों के चक्कर न काटें। इस बार भागलपुर में होली सिर्फ हुड़दंग की नहीं, बल्कि सेहत और पर्यावरण के प्रति जागरूकता की भी होगी।
द वॉयस ऑफ बिहार की रिपोर्ट: अगर आप भी इस होली अपनी त्वचा और सेहत से प्यार करते हैं, तो भागलपुर की इन बेटियों की मेहनत को सराहें और केमिकल को ‘बाय-बाय’ कहकर प्राकृतिक रंगों के साथ खुशियाँ मनाएं।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।


