भागलपुर: अब मौसम का हाल होगा और सटीक; लगेगा ‘डॉप्लर वेदर रडार’, किसानों को मिलेगी तूफान और बारिश की पक्की खबर

  • बड़ी सौगात: भागलपुर में मौसम की सटीक जानकारी के लिए स्थापित होगा डॉप्लर वेदर रडार; बिहार सरकार ने बजट में की थी घोषणा, पूर्वानुमान क्षमता कई गुना बढ़ेगी।
  • हाईटेक सिस्टम: 1950 में बनी वेधशाला अब बीएयू सबौर में अत्याधुनिक रूप में शिफ्ट; ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन और रियल टाइम डाटा से होगी निगरानी।
  • किसानों को लाभ: बाढ़, वज्रपात और हीट वेव की मिलेगी पूर्व सूचना; फसल बुआई से लेकर बीमा क्लेम तक में मददगार साबित होगा वैज्ञानिक डाटा।

द वॉयस ऑफ बिहार (भागलपुर/ब्यूरो)

भागलपुर (Bhagalpur) और आसपास के जिलों के लिए अच्छी खबर है। अब यहां मौसम का मिजाज समझने में चूक नहीं होगी। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भागलपुर में मौसम सेवाओं को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए एक ठोस और दूरदर्शी रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत शहर में डॉप्लर वेदर रडार (Doppler Weather Radar) स्थापित किया जाएगा, जिससे किसानों और आम लोगों को मौसम की पल-पल की सटीक जानकारी मिल सकेगी।

सबौर में अत्याधुनिक वेधशाला

​आईएमडी के स्थापना दिवस (15 जनवरी) पर यह स्पष्ट किया गया कि भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों को भरोसेमंद पूर्वानुमान उपलब्ध कराया जाएगा।

  • शिफ्टिंग: वर्ष 1950 में स्थापित पुरानी वेधशाला को 10 जनवरी 2024 से बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर परिसर में शिफ्ट कर दिया गया है।
  • सुविधाएं: यहां ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन, एडवांस्ड रेन गेज और रियल-टाइम डाटा ट्रांसमिशन सिस्टम को मजबूत किया जा रहा है। इसके अलावा, ऊपरी वायुमंडलीय प्रेक्षण (Upper Air Observation) सुविधा शुरू करने का भी लक्ष्य है, जिससे हवा की गति और दिशा की गहराई से निगरानी हो सकेगी।

खेती और आपदा प्रबंधन में वरदान

​यह रडार प्रणाली कृषि और आपदा प्रबंधन के लिए गेम चेंजर साबित होगी।

  • खेती: किसानों को बुआई, सिंचाई और कटाई के लिए सही समय पर सलाह मिल सकेगी। साथ ही, फसल बीमा क्लेम और क्षतिपूर्ति के मामलों में भी वैज्ञानिक डाटा उपलब्ध होगा।
  • आपदा: बाढ़, वज्रपात (Lightning), हीट वेव और शीतलहर जैसी आपदाओं की चेतावनी समय रहते मिलने से जान-माल का नुकसान कम किया जा सकेगा।

क्या है डॉप्लर रडार?

​यह एक विशेष तकनीक है जो माइक्रोवेव सिग्नल का उपयोग करती है। यह डॉप्लर प्रभाव (Doppler Effect) के जरिए बादलों और तूफानों की गति, दिशा और वेग को मापता है। इससे यह पता चलता है कि बारिश या तूफान कितनी तेजी से और किस दिशा में बढ़ रहा है।

मौसम की मार से बचने के लिए यह तकनीक एक कवच का काम करेगी।

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