​विक्रमशिला सेतु संकट पर बड़ा प्रशासनिक संज्ञान: पथ निर्माण सचिव पंकज कुमार पाल ने किया स्थल निरीक्षण, मई के अंत तक चालू होगा बेली ब्रिज

पटना/भागलपुर, 18 मई 2026। बिहार के परिवहन ग्रिड और आर्थिक गलियारे की लाइफलाइन माने जाने वाले भागलपुर के विक्रमशिला महासेतु के अवसंरचनात्मक संकट को दूर करने के लिए राज्य सरकार के शीर्ष स्तर से एक बड़ा और कड़ा नीतिगत संज्ञान लिया गया है। पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारण उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच ठप पड़े जमीनी संपर्क को दोबारा बहाल करने की प्रविधि को गति देने के उद्देश्य से पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने सोमवार को विक्रमशिला सेतु का विस्तृत और सघन स्थल निरीक्षण किया। इस उच्चस्तरीय दौरे के दौरान सचिव ने महासेतु के प्रभावित संरेखणों, दरार वाले हिस्सों और वहां सीमा सड़क संगठन द्वारा बनाए जा रहे अस्थाई पुलों के निर्माण कार्यों का बारीक तकनीकी जायजा लिया। उन्होंने मौके पर उपस्थित अभियंताओं को कड़े निर्देश जारी किए कि जनहित को सर्वोपरि रखते हुए इस संकटकालीन अवस्थिति का त्वरित और समयबद्ध निवारण किया जाए।

​निरीक्षण के दौरान सचिव पंकज कुमार पाल ने महासेतु के मुख्य सुपरस्ट्रक्चर की आंतरिक कड़ियों, भार वहन क्षमता में आई तकनीकी विसंगतियों, बेली ब्रिज के निर्माण कार्य की भौतिक प्रगति, सुरक्षा मानकों और न्यूनतम समय-सीमा के भीतर यातायात को दोबारा चालू करने से जुड़े तमाम संवेदनशील और महत्वपूर्ण बिंदुओं पर बिंदुवार तकनीकी जानकारियां संकलित कीं। इस दौरान विभाग के विशेष विंग और पुल निर्माण निगम के विशेषज्ञों की टीम भी कड़ाई के साथ मौके पर मुस्तैद रही, जिसने क्षति के स्वरूप का विस्तृत ब्योरा प्रस्तुत किया।

प्रशासनिक और पुलिस कप्तानों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक का विन्यास

​स्थल निरीक्षण की प्रविधि पूरी करने के तुरंत बाद सचिव पंकज कुमार पाल ने भागलपुर समाहरणालय के विमर्श कक्ष में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस उच्चस्तरीय बैठक में भागलपुर के जिलाधिकारी, नवगछिया के पुलिस अधीक्षक, स्थानीय अनुमंडल पदाधिकारी सहित पथ निर्माण विभाग के प्रमंडलीय पदाधिकारियों, मुख्य अभियंताओं और तकनीकी सलाहकारों का पूरा ग्रिड शामिल हुआ। बैठक का मुख्य ध्येय विक्रमशिला सेतु पर उत्पन्न हुए इस अभूतपूर्व मानवीय और व्यावसायिक संकट से निपटने के लिए विभिन्न विभागों के बीच एक मजबूत अंतर-विभागीय समन्वय स्थापित करना था।

​समीक्षा बैठक के भीतर सचिव ने कानून-व्यवस्था और नागरिक सुरक्षा के कोण पर विशेष बल देते हुए कहा कि पुल बंद होने के कारण आम जनता और मरीजों को जो गंभीर शारीरिक व आर्थिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है, उसे किसी भी स्थिति में लंबा नहीं खींचा जा सकता। उन्होंने नवगछिया के पुलिस अधीक्षक और भागलपुर के जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि जब तक पुल के ऊपर वैकल्पिक प्रणालियां लाइव नहीं हो जातीं, तब तक नदी घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम संधारित रखे जाएं। इसके साथ ही, उन्होंने पथ निर्माण विभाग के स्थानीय इंजीनियरों को कड़ा निर्देश दिया कि वे कागजी फाइलों के विन्यास से बाहर निकलकर धरातल पर काम की गति को दोगुना करें और निर्माण कार्य की बाधाओं को ऑन-स्पॉट दूर करने का विलेख तैयार करें।

बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन द्वारा तीन बेली ब्रिज का विन्यास, एक का कार्य पूर्ण

​विक्रमशिला सेतु के ऊपर अस्थाई आवागमन को सुचारू करने के लिए देश की सबसे प्रतिष्ठित निर्माण एजेंसी, बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) की तकनीकी कमान को धरातल पर उतारा गया है। सचिव पंकज कुमार पाल ने आधिकारिक विलेखों के माध्यम से जानकारी साझा की कि बीआरओ की विशेषज्ञ टीम के द्वारा क्षतिग्रस्त हिस्से के समानांतर कुल तीन अलग-अलग बेली ब्रिज (Bailey Bridge) तैयार किए जा रहे हैं। तकनीकी रूप से यह एक बेहद जटिल प्रक्रम है क्योंकि नदी के ऊपर बने विशालकाय कंक्रीट पिलर के संरेखण पर इन लोहे के पुलों के बेस को संधारित करना अत्यधिक कड़े इंजीनियरिंग कौशल की मांग करता है।

​इंजीनियरों ने सचिव को बताया कि बीआरओ की मुस्तैदी के कारण अब तक तीन में से एक मुख्य बेली ब्रिज के इंस्टालेशन और गर्डर लॉन्चिंग का कार्य पूरी तकनीकी शुद्धता के साथ मुकम्मल कर लिया गया है। शेष दो अन्य बेली ब्रिजों के विन्यास और उनके असेंबलिंग का कार्य वर्तमान में अत्यंत तीव्र और प्रखर गति से संचालित किया जा रहा है। सचिव ने निर्माण की समय-सारणी को स्पष्ट करते हुए एलान किया कि इसी चालू महीने यानी मई 2026 के अंत तक तीनों बेली ब्रिजों का निर्माण कार्य हर हाल में पूर्ण कर लिया जाएगा।

​पुल के तैयार होने के बाद सुरक्षात्मक विलेखों को ध्यान में रखते हुए शुरुआत में केवल पैदल यात्रियों, एम्बुलेंसों और अत्यंत छोटी व हल्की गाड़ियों के आवागमन की विधिक अनुमति प्रदान की जाएगी। भारी मालवाहक ट्रकों और बसों के परिचालन को तब तक पूरी तरह से ब्लॉक रखा जाएगा जब तक कि मुख्य ढांचे की पूरी विधिक जांच मुकम्मल नहीं हो जाती। बीआरओ की टीम और राज्य के तकनीकी विशेषज्ञों के बीच इस ग्रिड को युद्धस्तर पर क्रियान्वित किया जा रहा है ताकि तय समय-सीमा में कोई दरार न आने पाए।

टू-लेन ट्रस ब्रिज का समानांतर विन्यास और दीर्घकालिक रोडमैप

​अस्थाई बेली ब्रिज के निर्माण के साथ-साथ इस संकट के स्थाई और मजबूत समाधान के लिए एक और बड़े बुनियादी विन्यास पर काम शुरू कर दिया गया है। सचिव ने स्पष्ट किया कि बेली ब्रिज के चालू होने के समानांतर ही वहाँ एक सुदृढ़ ‘ट्रस ब्रिज’ (Truss Bridge) के निर्माण की प्रविधि भी शुरू की जा रही है। हालांकि, ट्रस ब्रिज का कार्य वर्तमान समय में अपनी प्रारंभिक और प्राथमिक अवस्था में संधारित है, जिसके तहत पुल के लोड डिस्ट्रीब्यूशन, सॉइल टेस्टिंग के डेटाबेस और आवश्यक विधिक डिजाइनों को तैयार करने का कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है।

​यह प्रस्तावित ट्रस ब्रिज पूरी तरह से आधुनिक तकनीकों से लैस और टू-लेन (दो लेन) क्षमता वाला होगा, जिससे भविष्य में मध्यम दर्जे के कमर्शियल वाहनों का परिचालन भी सुगमता से किया जा सकेगा। इस ब्रिज के डिजाइन विन्यास में एक विशेष सामाजिक कोण को भी शामिल किया गया है, जिसके तहत आम नागरिकों और पैदल चलने वाले यात्रियों की जीवन सुरक्षा के लिए मुख्य कैरिजवे के दोनों तरफ अलग से फुटपाथ और वॉकिंग ट्रैक की व्यवस्था कड़ाई से संधारित रहेगी। इस स्थाई ढांचे के निर्माण की निगरानी के लिए विभाग द्वारा एक अलग प्रोजेक्ट सर्विलांस यूनिट का गठन किया जा रहा है।

शिथिलता पर कड़ा प्रशासनिक हंटर: मुख्य अभियंता को साइट पर ही कैंप करने का टास्क

​पुल मरम्मत और जन-सुविधाओं की बहाली में कतिपय स्तरों पर दिखने वाली विभागीय शिथिलता और लेटलतीफी पर सचिव पंकज कुमार पाल ने अत्यधिक कड़ा और सख्त प्रशासनिक रुख अख्तियार किया। उन्होंने दोटूक शब्दों में निर्देश जारी किए कि सेतु की मरम्मत, मैपिंग, सामग्री आपूर्ति और यातायात बहाली के इन संकटकालीन कार्यों में किसी भी प्रकार की लिपिकीय ढिलाई, मानवीय लापरवाही या तकनीकी बहानों को विधिक रूप से बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि आगामी दिनों में काम की रफ्तार में कोई कमी पाई जाती है, तो उसके लिए सीधे तौर पर प्रक्षेप के कप्तानों की जवाबदेही तय की जाएगी।

​कार्य की निरंतरता और कड़े अनुशासन को धरातल पर संधारित रखने के लिए सचिव ने पथ निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता और उनकी विशेष तकनीकी कोर टीमों को तत्काल प्रभाव से विक्रमशिला सेतु के निर्माण स्थल के समीप ही चौबीसों घंटे ‘कैंप’ करने का अंतिम आदेश जारी कर दिया है। मुख्य अभियंता की देखरेख में सभी कनिष्ठ अभियंता और पर्यवेक्षक शिफ्टवार प्रणालियों के तहत दिन-रात निर्माण स्थल पर भौतिक रूप से उपस्थित रहेंगे। सरकार की मंशा साफ है कि भागलपुर और पूरे पूर्वी भारत को जोड़ने वाले इस मुख्य मार्ग के संकट को न्यूनतम समय के भीतर पूरी पारदर्शिता और तकनीकी मजबूती के साथ हल किया जा सके।

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