सिल्क सिटी में शौर्य की गूँज : भागलपुर में बाबू वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव की भव्य तैयारी; हाथी-घोड़ों के साथ निकलेगी ऐतिहासिक शोभा यात्रा

भागलपुर। भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में 1857 का विद्रोह एक ऐसा मील का पत्थर है, जिसकी धमक आज भी देशवासियों के रगों में जोश भर देती है। इस महासंग्राम के सबसे प्रखर नायक और अदम्य साहस के प्रतीक, जगदीशपुर की माटी के लाल बाबू वीर कुंवर सिंह के शौर्य को नमन करने के लिए भागलपुर एक बार फिर ऐतिहासिक विजयोत्सव का साक्षी बनने जा रहा है। आगामी 23 अप्रैल 2026, बुधवार को बाबू वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव समारोह समिति के तत्वावधान में आयोजित होने वाला यह समारोह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि अंग जनपद की उस सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना का प्रदर्शन होगा, जो अपने नायकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना जानती है। इस वर्ष के विजयोत्सव को लेकर भागलपुर में उत्साह का वातावरण चरम पर है। शहर के वीर कुंवर सिंह चौक से निकलने वाली भव्य शोभा यात्रा में इस बार प्राचीन वैभव और आधुनिक राष्ट्रवाद का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा, जहाँ हाथी-घोड़ों का लश्कर और गाजे-बाजे की गूँज ब्रिटिश हुकूमत को धूल चटाने वाले उस 80 वर्षीय योद्धा की याद ताजा करेगी।

विजयोत्सव का विस्तृत कार्यक्रम: 22 की शाम दीपों से होगी रोशन

​समारोह की रूपरेखा इस प्रकार तैयार की गई है कि इसकी शुरुआत मुख्य आयोजन से एक शाम पहले ही हो जाएगी। कार्यक्रम प्रभारी एडवोकेट डॉ. राजीव सिंह ने जानकारी दी कि 22 अप्रैल 2026 की शाम को वीर कुंवर सिंह चौक स्थित प्रतिमा स्थल पर एक भव्य दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। यह दीप उत्सव उस ‘विजय’ की पूर्व संध्या का प्रतीक है, जिसे कुंवर सिंह ने अपनी तलवार के दम पर हासिल किया था।

23 अप्रैल के मुख्य समारोह का आगाज सुबह 8 बजे होगा। सबसे पहले समिति के सदस्यों और शहर के विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों द्वारा बाबू वीर कुंवर सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया जाएगा। इसके तुरंत बाद, शोभा यात्रा का श्रीगणेश होगा। यह यात्रा शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों, चौराहों और मुहल्लों से होकर गुजरेगी, जिसका उद्देश्य पूरे भागलपुर को राष्ट्रभक्ति के रंग में सराबोर करना है। आयोजन समिति ने संकेत दिए हैं कि इस बार की शोभा यात्रा में झांकियों की गुणवत्ता और संख्या पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक होगी।

आकर्षण का केंद्र: हाथी, घोड़े और पारंपरिक वाद्य यंत्र

​भागलपुर में निकलने वाली इस शोभा यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता इसका पारंपरिक स्वरूप है। समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष हाथी और घोड़ों की एक विशेष टुकड़ी शोभा यात्रा का नेतृत्व करेगी, जो प्राचीन भारतीय सैन्य गौरव को दर्शाएगी। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक बैंड-बाजे की धुन पर युवा और बुजुर्ग समान रूप से कदमताल करेंगे।

​विजयोत्सव समारोह समिति के अध्यक्ष डॉ. संजय सिंह ने बताया कि बाबू वीर कुंवर सिंह का व्यक्तित्व केवल एक जाति या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि वे वैश्विक स्तर पर वीरता के अनूठे उदाहरण हैं। डॉ. संजय सिंह के अनुसार, जब 80 वर्ष की आयु में लोग जीवन की संध्या मानकर विश्राम करते हैं, तब कुंवर सिंह ने अपनी घायल बांह को खुद काटकर गंगा को अर्पित कर दिया था और अंग्रेजों के दांत खट्टे किए थे। यही वह जज्बा है जिसे इस शोभा यात्रा के माध्यम से नई पीढ़ी के भीतर संचरित करने का प्रयास किया जा रहा है।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा और ऐतिहासिक महत्व

​समारोह समिति का मानना है कि आधुनिकता की दौड़ में युवा अक्सर अपने इतिहास और उन बलिदानों को भूल जाते हैं, जिनकी बदौलत आज हम आजाद हवा में सांस ले रहे हैं। डॉ. अजय कुमार सिंह और समिति के अन्य सदस्यों ने प्रेस वार्ता में इस बात पर जोर दिया कि बाबू वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव केवल एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह एक पाठ है—साहस का, स्वाभिमान का और राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा का।

​यह आयोजन उन कहानियों को जीवंत करेगा जिनमें बताया गया है कि कैसे जगदीशपुर के इस जमींदार ने अपनी छोटी सी सेना के साथ अंग्रेजों की संगठित सेना को बार-बार पराजित किया। 23 अप्रैल की तारीख उस महान विजय की याद दिलाती है जब उन्होंने जगदीशपुर के किले पर वापस कब्जा कर लिया था। भागलपुर की सड़कों पर जब कुंवर सिंह के नारे गूँजेंगे, तो वह सीधे तौर पर उस विरासत को नमन होगा जो हमें झुकना नहीं, बल्कि लड़ना सिखाती है।

प्रशासनिक समन्वय और सुरक्षा व्यवस्था

​इतने विशाल स्तर पर होने वाले आयोजन को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद है। समिति ने जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के साथ मिलकर रूट प्लानिंग तैयार की है ताकि आम नागरिकों को आवागमन में कम से कम असुविधा हो। यातायात नियंत्रण के लिए विशेष स्वयंसेवकों की तैनाती की जाएगी जो पुलिस बल के साथ समन्वय स्थापित करेंगे।

​समारोह में शामिल होने वाले हजारों लोगों की सुरक्षा और सुविधा के लिए पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा के भी इंतजाम किए जा रहे हैं। प्रशासन ने शहरवासियों से अपील की है कि वे शोभा यात्रा के दौरान शांति और अनुशासन बनाए रखें। वरिष्ठ नेताओं और विशिष्ट अतिथियों की सुरक्षा के लिए भी कड़े प्रोटोकॉल निर्धारित किए गए हैं, क्योंकि कई दिग्गज राजनेताओं ने इस कार्यक्रम में शामिल होने की अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है।

आयोजन समिति की अपील: जन-जन की भागीदारी जरूरी

​प्रेस वार्ता के दौरान समिति की ओर से स्वेता सिंह, राहुल चौहान और अंकित सिंह ने सामूहिक रूप से भागलपुर के सभी सामाजिक, राजनैतिक और शैक्षणिक संगठनों से इस गौरवशाली उत्सव का हिस्सा बनने की अपील की है। समिति का कहना है कि यह आयोजन किसी एक संस्था का नहीं, बल्कि पूरे भागलपुर का है।

​आयोजन को सफल बनाने में डॉ. रौशन सिंह, बसंत कुमार सिंह, रोहित सिंह, ठाकुर मोहित सिंह, रंजीत सिंह और आदित्य राज सहित कई अन्य कार्यकर्ता रात-दिन एक किए हुए हैं। इन युवाओं की टीम मोहल्ले-मोहल्ले जाकर लोगों को आमंत्रित कर रही है और पीले अक्षत देकर विजयोत्सव में शामिल होने का निमंत्रण दे रही है।

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