भागलपुर में विश्वविद्यालय कर्मचारियों का बड़ा प्रदर्शन, 15 सूत्रीय मांगों को लेकर सुंदरवती महिला महाविद्यालय में धरना

भागलपुर। तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय से जुड़े गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। बिहार राज्य विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर भागलपुर स्थित Tilka Manjhi Bhagalpur University के अधीन विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालय कार्यालयों में दो दिवसीय कलमबंद हड़ताल शुरू हो गई है। इस आंदोलन का सबसे बड़ा असर विश्वविद्यालय और कॉलेजों के प्रशासनिक कार्यों पर देखने को मिल रहा है। कर्मचारियों ने सुंदरवती महिला महाविद्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन कर अपनी 15 सूत्रीय मांगों को जल्द पूरा करने की मांग उठाई।

धरना कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय और कॉलेजों के कर्मचारी मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि लंबे समय से कर्मचारियों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। आंदोलनकारी कर्मचारियों का कहना है कि कई बार ज्ञापन और वार्ता के बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिसके कारण अब आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे बिहार राज्य विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ के क्षेत्रीय मंत्री Sushil Mandal ने कहा कि यह लड़ाई केवल वेतन या सेवा शर्तों की नहीं, बल्कि कर्मचारियों के सम्मान और अधिकारों की भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार कर्मचारियों की जायज मांगों को टालता आ रहा है, जिससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है।

कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों को लागू करना सबसे अहम बताया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि अदालत द्वारा दिए गए कई महत्वपूर्ण निर्देश अब तक लागू नहीं किए गए हैं। इसके अलावा वेतन कटौती वापस लेने, तृतीय और चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों को समय पर प्रोन्नति देने तथा एसीपी और एमएसीपी का लाभ मार्च 2026 के वेतन के साथ लागू करने की मांग भी आंदोलन का बड़ा मुद्दा बनी हुई है।

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे कई कर्मचारियों को अब तक पदोन्नति का लाभ नहीं मिला है। इससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार कर्मचारियों से पूरी जिम्मेदारी और नियमित कार्य की अपेक्षा करती है, वहीं दूसरी ओर उनकी सेवा सुविधाओं और अधिकारों को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही।

धरने में शामिल कर्मचारियों ने नए कॉलेजों में पुराने कॉलेजों से कर्मचारियों के ट्रांसफर का भी विरोध किया। उनका कहना है कि बिना स्पष्ट नीति और कर्मचारियों की सहमति के किए जा रहे तबादले कर्मचारियों के हितों के खिलाफ हैं। कई कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक स्तर पर मनमाने तरीके से ट्रांसफर किए जा रहे हैं, जिससे कर्मचारियों को पारिवारिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

दो दिवसीय कलमबंद हड़ताल का असर विश्वविद्यालय और कॉलेजों के दैनिक कार्यों पर साफ दिखाई दे रहा है। कई कार्यालयों में जरूरी फाइलों का निपटारा प्रभावित हुआ है, जबकि छात्रों से जुड़े कई प्रशासनिक कार्य भी अटक गए हैं। कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण दस्तावेज सत्यापन, प्रमाण पत्र जारी करने, वेतन प्रक्रिया और अन्य कार्यालयी कामकाज प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।

छात्रों और अभिभावकों को भी इस हड़ताल के कारण परेशानी उठानी पड़ रही है। कई छात्र जरूरी काम के लिए कॉलेज और विश्वविद्यालय कार्यालय पहुंचे, लेकिन कर्मचारियों की हड़ताल के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा। हालांकि आंदोलनकारी कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगें पूरी नहीं होने तक वे संघर्ष जारी रखेंगे।

धरना कार्यक्रम के दौरान महासंघ के नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। कर्मचारियों ने घोषणा की कि 20 तारीख को बीएन कॉलेज से विश्वविद्यालय मुख्यालय तक एक विशाल महा-जुलूस निकाला जाएगा। इस जुलूस में विश्वविद्यालय और विभिन्न कॉलेजों के कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल होंगे।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन केवल भागलपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे बिहार के विश्वविद्यालय कर्मचारियों की साझा लड़ाई है। उन्होंने दावा किया कि राज्यभर में विश्वविद्यालय कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर एकजुट हैं और आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज हो सकता है।

धरना स्थल पर मौजूद कर्मचारियों ने सरकार से तत्काल वार्ता शुरू करने और लंबित मांगों पर सकारात्मक फैसला लेने की अपील की। उनका कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो विश्वविद्यालयों का प्रशासनिक ढांचा और अधिक प्रभावित हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि विश्वविद्यालयों में गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। परीक्षा संचालन, प्रमाण पत्र निर्गमन, छात्र पंजीकरण, वित्तीय कार्य और कार्यालयी व्यवस्था जैसे अधिकांश कार्य इन्हीं कर्मचारियों के जिम्मे होते हैं। ऐसे में लंबे समय तक हड़ताल जारी रहने से विश्वविद्यालय व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है।

भागलपुर में चल रहा यह आंदोलन अब धीरे-धीरे राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बनने लगा है। कर्मचारी संगठन लगातार सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहे हैं। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन यदि मांगों की अनदेखी जारी रही तो भविष्य में आंदोलन और उग्र हो सकता है। कर्मचारियों ने दोहराया कि उनका उद्देश्य प्रशासनिक कामकाज ठप करना नहीं, बल्कि अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना है।

फिलहाल सुंदरवती महिला महाविद्यालय परिसर में चल रहा धरना विश्वविद्यालय कर्मचारियों की नाराजगी का बड़ा प्रतीक बन चुका है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन कर्मचारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं और आगामी दिनों में यह आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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