
भागलपुर। पीरपैंती प्रखंड के ओलापुर गांव के तीन मजदूरों की हालिया मौत ने गांव में शोक का माहौल बना दिया है। मृतकों के परिजनों ने उनकी मौत के पीछे की घटनाओं की जानकारी साझा की।
किसन दास की मौत: डेंगू की पुष्टि के बाद बिगड़ी तबीयत
किसन दास के बड़े भाई मिथुन दास ने बताया कि 25 जून को ओलापुर से आठ मजदूर बोरियो (झारखंड) काम करने गए थे। वहां नौ दिन बिताने के बाद 5 जुलाई को किसन को तेज बुखार हुआ। जांच के लिए उसे शेरमारी ले जाया गया, जहां डेंगू की पुष्टि हुई और प्लेटलेट्स 20 हजार तक गिर गए। उसी दिन शाम 4:30 बजे वह बेहोश हो गया।
इसके बाद किसन को रेफरल अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे भागलपुर मायागंज मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। वहां आईसीयू बेड नहीं मिलने पर उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 9 जुलाई को उसकी मृत्यु हो गई।
विकास मंडल: टायफाइड के बाद बिगड़ी तबीयत
मृतक विकास मंडल के पिता सरयुग मंडल ने बताया कि उनका बेटा 12 दिन तक झारखंड में काम करके लौटा था और कुछ दिन घर पर भी काम किया। इसके बाद उसे बुखार आया और शेरमारी में जांच में टायफाइड की पुष्टि हुई। इलाज के क्रम में मायागंज अस्पताल में रविवार को उसकी मृत्यु हो गई।
मनीष कुमार: अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत
तीसरे मृतक मनीष कुमार की भाभी जूली देवी ने बताया कि दो-तीन दिन पहले मनीष को हल्का बुखार हुआ था, जो इलाज के बाद ठीक हो गया था। इसके बाद उसे उल्टियां होने लगीं और अस्पताल ले जाने पर उसी दौरान उसकी मौत हो गई।
जांच की जरूरत
तीनों मौतों के पीछे बुखार, डेंगू, टायफाइड और तेज मौसमीय बदलाव को संभावित कारण माना जा रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा किसी भी प्रकार की आधिकारिक जांच रिपोर्ट अभी तक सामने नहीं आई है। स्थानीय लोगों में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर चिंता बनी हुई है।


