मंदिर परिसर की घेराबंदी को लेकर भागलपुर में विवाद, दो पक्षों में मारपीट के बाद प्रशासन अलर्ट

भागलपुर शहर के सिकंदरपुर इलाके में स्थित मंदिर परिसर की घेराबंदी को लेकर रविवार को तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई। भूमि विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच शुरू हुई कहासुनी देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। दोनों पक्षों के बीच हुई मारपीट में कई लोगों के घायल होने की सूचना है। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस तथा जिला प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गया। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है।

जानकारी के अनुसार विवाद परिसर से जुड़ा है। मंदिर न्यास समिति द्वारा मंदिर परिसर की जमीन की घेराबंदी का कार्य कराया जा रहा था। इसी दौरान जमीन के स्वामित्व और सीमा को लेकर दूसरे पक्ष ने आपत्ति दर्ज कराई। प्रारंभ में दोनों पक्षों के बीच बातचीत और बहस हुई, लेकिन कुछ ही देर में माहौल तनावपूर्ण हो गया और विवाद बढ़ने लगा।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पहले दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा और किसी भी पक्ष ने पीछे हटने की इच्छा नहीं दिखाई। धीरे-धीरे विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों ओर से धक्का-मुक्की शुरू हो गई। इसके बाद स्थिति पूरी तरह बेकाबू हो गई और मारपीट शुरू हो गई। अचानक हुई इस झड़प से मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

घटना के दौरान कई लोगों को चोटें आईं। स्थानीय लोगों ने बताया कि मारपीट के दौरान कुछ लोग जमीन पर गिर पड़े, जबकि कई को गंभीर चोटें लगीं। आसपास मौजूद लोगों ने बीच-बचाव का प्रयास किया, लेकिन बढ़ते तनाव के कारण स्थिति संभालना मुश्किल हो गया। घायलों को बाद में प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया, जहां उनका इलाज कराया जा रहा है।

घटना की सूचना मिलते ही की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए दोनों पक्षों को अलग किया और हालात को नियंत्रित करने का प्रयास किया। पुलिस की मौजूदगी के बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगी। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क हो गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने क्षेत्र का दौरा कर हालात का जायजा लिया और पुलिस को अतिरिक्त सतर्कता बरतने का निर्देश दिया। एहतियातन इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया ताकि किसी भी नई अप्रिय घटना को रोका जा सके।

सूत्रों के मुताबिक मंदिर न्यास समिति की ओर से पहले भी घेराबंदी कार्य को लेकर संभावित विवाद की आशंका जताई गई थी। इसी कारण समिति ने पूर्व में पुलिस प्रशासन से सहयोग की मांग की थी। इस संबंध में थाना प्रभारी को लिखित आवेदन भी दिया गया था ताकि घेराबंदी का कार्य शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कराया जा सके। हालांकि विवाद की आशंका के बावजूद स्थिति अचानक उग्र हो गई।

प्रशासन अब पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भूमि संबंधी सभी दस्तावेजों की समीक्षा की जाएगी। यह जांच की जा रही है कि विवादित भूमि का वास्तविक स्वामित्व किस पक्ष के पास है और क्या घेराबंदी कानूनी रूप से उचित प्रक्रिया के तहत कराई जा रही थी। भूमि अभिलेख, राजस्व दस्तावेज और संबंधित कानूनी कागजात जांच का हिस्सा बनाए गए हैं।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी को भी कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि चाहे विवाद कितना भी गंभीर क्यों न हो, उसका समाधान कानूनी प्रक्रिया के तहत ही किया जाएगा। जो लोग हिंसा, मारपीट या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस अधिकारियों ने लोगों से विशेष अपील करते हुए कहा है कि वे अफवाहों से दूर रहें। भूमि विवाद जैसे मामलों में गलत सूचनाएं तेजी से फैलती हैं, जिससे तनाव और बढ़ सकता है। इसलिए नागरिकों से केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने और किसी भी भ्रामक खबर को साझा न करने की अपील की गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर परिसर धार्मिक आस्था से जुड़ा स्थान है, इसलिए इस तरह के विवाद से लोगों की भावनाएं भी प्रभावित होती हैं। कई लोगों ने प्रशासन से अपील की कि विवाद का समाधान जल्द और निष्पक्ष तरीके से किया जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक स्थलों से जुड़े भूमि विवाद अक्सर संवेदनशील हो जाते हैं, इसलिए ऐसे मामलों में प्रशासनिक पारदर्शिता और त्वरित हस्तक्षेप बेहद आवश्यक होता है। समय रहते मध्यस्थता और दस्तावेजों की स्पष्टता कई बार बड़े विवाद को टाल सकती है। सिकंदरपुर की घटना भी प्रशासन के लिए एक चेतावनी मानी जा रही है कि संवेदनशील मामलों में पहले से पर्याप्त सतर्कता बरती जाए।

फिलहाल सिकंदरपुर इलाके में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन प्रशासन किसी भी जोखिम से बचने के लिए पूरी सतर्कता बरत रहा है। पुलिस लगातार क्षेत्र में गश्त कर रही है और हालात पर नजर बनाए हुए है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

भागलपुर में मंदिर परिसर को लेकर हुआ यह विवाद एक बार फिर दिखाता है कि भूमि संबंधी मामलों में छोटी असहमति भी बड़े संघर्ष का रूप ले सकती है। अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच और आगामी कार्रवाई पर टिकी है। उम्मीद की जा रही है कि निष्पक्ष जांच के बाद विवाद का स्थायी समाधान निकलेगा और क्षेत्र में शांति पूरी तरह बहाल होगी।

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