
भागलपुर। सावन महीने के आगमन से पहले ही सुल्तानगंज से देवघर तक जाने वाले पवित्र कांवड़ मार्ग पर शिवभक्तों की भीड़ बढ़ने लगी है। उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर बाबा बैद्यनाथ धाम तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के बीच इन दिनों एक ऐसे कांवड़िया की चर्चा हर ओर हो रही है, जिसकी अनोखी साधना और अटूट आस्था लोगों को आश्चर्यचकित कर रही है। यह श्रद्धालु कोई साधारण व्यक्ति नहीं, बल्कि भारतीय सेना के पूर्व जवान राम उदय सिंह हैं, जिन्होंने अपने पूरे शरीर को भारी लोहे की जंजीरों से बांधकर डाक कांवड़ यात्रा शुरू की है। उनकी इस कठिन यात्रा को देखने के लिए रास्ते भर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है और लोग इसे आस्था, तपस्या तथा समर्पण का अद्भुत उदाहरण मान रहे हैं।
शेखपुरा जिले के एकड़ा गांव निवासी राम उदय सिंह इन दिनों सुल्तानगंज-असरगंज कच्ची कांवड़ पथ पर आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरने के बाद वे लगातार देवघर की ओर बढ़ रहे हैं। उनके शरीर पर बंधी लोहे की मोटी जंजीरें इस यात्रा को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना रही हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके कदमों की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही। रास्ते में उन्हें देखने वाले श्रद्धालु हैरान हैं कि इतनी भीषण गर्मी और शारीरिक कठिनाई के बीच भी वह बिना रुके अपनी यात्रा जारी रखे हुए हैं।
राम उदय सिंह का जीवन अनुशासन, संघर्ष और देश सेवा से जुड़ा रहा है। उन्होंने भारतीय सेना में लगभग 18 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं और देश की सीमाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सेना में रहते हुए कठिन परिस्थितियों का सामना करना उनके जीवन का हिस्सा रहा। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने आध्यात्मिक जीवन को अपनाया और भगवान शिव की भक्ति में स्वयं को समर्पित कर दिया। उनका कहना है कि सैनिक जीवन ने उन्हें कठिनाइयों से लड़ना सिखाया और वही अनुशासन आज उनकी धार्मिक साधना में दिखाई देता है।
उन्होंने बताया कि सेना से रिटायर होने के बाद से वह हर वर्ष सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को उन्होंने कभी नहीं छोड़ा। हालांकि इस बार उन्होंने अपनी श्रद्धा को एक नए स्तर पर ले जाने का निर्णय लिया। इसी संकल्प के तहत उन्होंने अपने हाथों, पैरों और शरीर के कई हिस्सों पर भारी लोहे की जंजीरें बांध लीं और डाक कांवड़ यात्रा शुरू कर दी। उनका मानना है कि भक्ति केवल शब्दों से नहीं, बल्कि त्याग, अनुशासन और समर्पण से भी व्यक्त होती है।
डाक कांवड़ यात्रा को सामान्य कांवड़ यात्रा की तुलना में कहीं अधिक कठिन माना जाता है। इस परंपरा में श्रद्धालु गंगाजल भरने के बाद बिना रुके और बिना विश्राम किए बाबा धाम तक पहुंचते हैं। यात्रा के दौरान बैठना या आराम करना नियमों के विरुद्ध माना जाता है। ऐसे में लगातार दौड़ते हुए सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करना अपने आप में एक बड़ी चुनौती होती है। राम उदय सिंह ने बताया कि पहले वह सामान्य कांवड़ और सुराही कांवड़ के माध्यम से यात्रा करते थे, लेकिन इस बार उन्होंने स्वयं को और कठिन परीक्षा से गुजरने का संकल्प लिया है।
उनकी इस साधना के पीछे कोई व्यक्तिगत इच्छा या मनोकामना नहीं है। राम उदय सिंह का कहना है कि यह पूरी यात्रा समाज, राष्ट्र और मानवता के कल्याण के लिए समर्पित है। वे चाहते हैं कि देश में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे। उनका विश्वास है कि जैसे एक सैनिक सीमा पर रहकर देश की रक्षा के लिए अपना आराम और सुख त्याग देता है, उसी प्रकार समाज के कल्याण के लिए आध्यात्मिक तपस्या भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उनकी यह यात्रा लोगों के बेहतर भविष्य, सामाजिक सौहार्द और विश्व शांति की कामना के लिए है।
कांवड़ पथ पर जहां-जहां से राम उदय सिंह गुजर रहे हैं, वहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उन्हें देखने के लिए जुट रही है। कई लोग उनके साथ कुछ दूरी तक दौड़ भी रहे हैं, जबकि अनेक श्रद्धालु उनके ऊपर फूल बरसाकर उनका स्वागत कर रहे हैं। “हर हर महादेव” और “बोल बम” के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। लोग अपने मोबाइल फोन से उनकी तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड कर रहे हैं। कई श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्होंने पहले कभी इस प्रकार की अनोखी डाक कांवड़ यात्रा नहीं देखी।
भीषण गर्मी और लू के बीच उनकी यात्रा लोगों को और अधिक प्रभावित कर रही है। जहां सामान्य श्रद्धालुओं को बार-बार विश्राम करना पड़ रहा है, वहीं राम उदय सिंह लगातार आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। उनके शरीर पर बंधी जंजीरों का वजन यात्रा को और कठिन बना रहा है, फिर भी उनके चेहरे पर थकान की जगह भक्ति और संकल्प की झलक दिखाई देती है। यही कारण है कि उनकी यात्रा पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है।
यात्रा के दौरान सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क है। जंजीरों के लगातार रगड़ने से शरीर पर घाव या छाले पड़ने की संभावना को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमें निगरानी कर रही हैं। जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। वहीं पुलिस प्रशासन भीड़ को नियंत्रित करने और यात्रा को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम कर रहा है।
मार्ग के विभिन्न हिस्सों में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है ताकि श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण यात्रा में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। प्रशासन का प्रयास है कि राम उदय सिंह की डाक कांवड़ यात्रा सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से पूरी हो सके। कई स्थानों पर स्वयंसेवी संगठन भी श्रद्धालुओं की सहायता में जुटे हुए हैं और पेयजल तथा प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं।
स्थानीय धार्मिक विद्वानों और पुरोहितों का मानना है कि इस प्रकार की तपस्या और आत्मसंयम की मिसाल बहुत कम देखने को मिलती है। उनका कहना है कि सनातन परंपरा में त्याग, तप और अनुशासन का विशेष महत्व रहा है और राम उदय सिंह की यह यात्रा उसी परंपरा का जीवंत उदाहरण है। एक पूर्व सैनिक द्वारा देश सेवा के बाद धार्मिक सेवा के मार्ग पर इस प्रकार का कठिन संकल्प लेना समाज के लिए प्रेरणादायक संदेश है।
आने वाले श्रावणी मेले से पहले इस अनोखी यात्रा ने श्रद्धालुओं के बीच विशेष उत्साह पैदा कर दिया है। लोग इसे केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि संकल्प, साहस और आत्मबल का प्रतीक मान रहे हैं। सुल्तानगंज से देवघर तक जंजीरों में बंधकर की जा रही यह डाक कांवड़ यात्रा यह संदेश दे रही है कि जब आस्था दृढ़ हो और मन में सेवा का भाव हो, तो कठिन से कठिन रास्ता भी आसान लगने लगता है। राम उदय सिंह की यह अनोखी साधना न केवल कांवड़ पथ पर चर्चा का विषय बनी हुई है, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन चुकी है।


