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भागलपुर : जीवन जागृति सोसाइटी की ओर से डॉ अजय वाटर हेलमेट का बाढ़ के पानी मे हुआ सफल प्रशिक्षण

वाटर हेलमेट का परीक्षण एवम वितरण
आज जीवन जागृति सोसायटी के तत्वाधान में डॉ अजय वाटर हेलमेट का सबौर के एन एच 30 के पास परीक्षण किया गया जिसमें 15 वाटर हेलमेट इंग्लिश गांव के लोगो के शरीर में बांधा गया और कुछ दूर के बाद नाव डगमगाने के चलते सारे युवक कई फीट गहरे पानी में कूद गए उनमें से एक 70 साल के बुजुर्ग भी थे ।सभी लोग बिना तैरे कई मिनटों तक पानी की सतह पर आराम से रहे ।यहां तक की उनको चिप्स का पैकेट खाने के लिए दिया गया तो उन्होंने अपने दोनों हाथों से उस पैकेट को फाड़ कर चिप्स निकाले और उसे आराम से खाये ।

यह वाटर हेलमेट साधारण पानी के डब्बे जिसे आमतौर पर जरकिन बोलते हैं को एक बेल्ट के बॉक्स में अच्छी तरह से डाल दिया गया और स्कूल बैग की तरह शरीर में लॉक सिस्टम से बांध दिया गया। इससे उनका दोनों हाथ अन्य कामों जैसे सामान उठाने के लिए खुला रहा।पानी मे उनलोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। बल्कि दो पानी में बह गए थे वो धार में बहते चले गए लेकिन डूबे नहीं ,इसकी लागत मात्र 150 के लगभग आएगी ,लोग अपने स्तर से भी बना सकते है।

अन्य जल सुरक्षा उपकरण के तुलना में यह अंत्यत कम लागत का है ,वर्षो तक टिकने वाला है।यह परीक्षण को मीडिया के समक्ष किया गया और सैकड़ो लोग इसके गवाह बने। परीक्षण पूरी तरह से सफल रहा ।डॉक्टर अजय सिंह जीवन जागृति सोसायटी के अध्यक्ष है और सामाजिक कार्यो के लिये जाने जाते है। पूर्व में भी आग लगे भवन से बाहर निकलने के लिये डफेट बनाया है जिसे सरकार ने स्वीकृति दी है।

डॉ सिंह ने कहा कि हर साल दर्जनों नाव दुर्घटना होती है और सैकड़े लोग डूब जाते है।सड़क दुर्घटना के लिये कानून बने है और हेलमेट जैसे उपकरण बने है लेकिनजल दुर्घटना पर कोई बचाव या एतिहात का अच्छा सस्ता और टिकाऊ उपकरण नही बना है ।ट्यूब के भांति इसको पकड़ने की जरूरत नही है ।

लोगों को नदियों में लगातार डूबने से चिंतित होकर उन्होंने यह डॉ अजय वाटर हेलमेट तैयार किया है जो लगभग डेढ़ सौ रुपया में बनकर तैयार हो जाता है जिस तरह से बाइक सवार दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है तो हेलमेट उसके सर को फटने नही देता है ठीक उसी तरह से यदि कोई नाव में कोई इसे पहन कर बैठता है और नाव दुर्घटनाग्रस्त हो जाए लोग पानी मे चले जाए तो जो कुछ भी तैरना नही जानते है तो यह उसका सर डूबने नहीं देगा और इससे लोग पानी के सतह पर घंटो बिना दुबे रह सकते है ।पानी की तेज धार में भले ही वह बह जाए लेकिन डूबेंगे नहीं ।

डॉक्टर सिंह का कहना है की जब कोई जल दुर्घटना का शिकार हो जाता है तो सरकार सरकार हर साल करोड़ों रुपया अनुदान में उनके परिवार को देता है लेकिन उस अनुदान से उसकी उस परिवार की खुशियां नहीं लगती है वह परिवार गम में सदा के लिए डूब जाता है यदि उसी अनुदान के राशि से ऐसे वाटर हेलमेट को बनाकर नाव में दे दिया जाए जिसे नाविक पैसेंजर को पहना कर ही लोगों को बैठाए और उतरने पर इसे वापस खोल कर रख ले ।

यदि मात्र ₹1 प्रति व्यक्ति इसका शुल्क लिया जाए तो कुछ ही दिनों में उसका लागत वापस हो जाएगा।उनका सरकार से गुजारिस है कि सरकार के संबंधित अधिकारी खुद इसका परीक्षण करे और इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाए।साथ ही इस वाटर हेलमेट को हेलमेट की तरह नाव में चढ़ने से पूर्व पहनना कानूनन अनिवार्य कर दिया जाए तो सैकड़ों जाने बच सकती हैं

15 वाटर हवलमेट नाविक को दे दिया गया और उसे निःशुल्क लोगो को नाव में बैठते वक्त पहनाने का निर्देश दिया गया

आज के इस परीक्षण में अनिल, धनंजय ,राजेश बाली गोविंद अनुज पारस अलगू यादव जैसे कुल 15 लोग सामिल हुए:डॉ अजय कुमार सिंह ,अध्यक्ष जीवन जागृति सोसायटी