भागलपुर : स्मार्ट सिटी का खोखला दावा, दर्जनों ई-टॉयलेट बेकार, जनता बेहाल

भागलपुर। करोड़ों रुपए खर्च कर भागलपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के सपनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर के विभिन्न इलाकों में बनाए गए दर्जनों ई-टॉयलेट आज पूरी तरह से बेकार हो चुके हैं। राहत देने के बजाय ये शौचालय अब शहरवासियों के लिए मुसीबत बन गए हैं।

ई-टॉयलेट खंडहर में तब्दील

खासकर सैनडिस्क कंपाउंड स्थित योग स्थल के पास बना ई-टॉयलेट अब खंडहर का रूप ले चुका है। दरवाजे टूट चुके हैं, चारों ओर गंदगी फैली हुई है और स्थिति इतनी बदहाल है कि कोई वहां जाना भी नहीं चाहता। शहर के अन्य कई स्थानों पर बने ई-टॉयलेट भी बंद पड़े हैं या जर्जर हालत में हैं।

स्थानीय लोगों का आक्रोश

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि स्मार्ट सिटी प्रशासन ने निर्माण तो कराया, लेकिन रखरखाव पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया। करोड़ों की लागत से बने ये शौचालय आज सिर्फ शोपीस बनकर रह गए हैं। जरूरत पड़ने पर लोगों के पास घर लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।

दावों और हकीकत में फर्क

उधर, स्मार्ट सिटी प्रशासन लगातार भागलपुर को स्मार्ट बनाने के दावे करता है। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। लोगों का सवाल है कि जब बुनियादी सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं कराई जा रहीं, तो स्मार्ट सिटी का मतलब क्या रह जाता है?

भागलपुर की यह तस्वीर साफ दिखाती है कि स्मार्ट सिटी के नाम पर प्रचार तो खूब हो रहा है, लेकिन असलियत में जनता अभी भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।

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