महिला से अमर्यादित बातचीत के मामले में शाहकुंड थानाध्यक्ष अनिल कुमार साव निलंबित, फर्जी शिकायत पत्र तैयार करने वाले साजिशकर्ता पर भी कसेगा कानूनी शिकंजा

भागलपुर, 19 मई 2026। भागलपुर जिला पुलिस स्थापना और पूर्वी रेंज के प्रशासनिक विन्यास में कानून-व्यवस्था और सांगठनिक शुचिता को संधारित रखने के उद्देश्य से एक अत्यंत कड़ी और अनुशासनात्मक दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई गई है। शाहकुंड थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष सह पुलिस अधिकारी अनिल कुमार साव को एक महिला आवेदक के साथ मोबाइल फोन पर अत्यंत आपत्तिजनक, अमर्यादित और पुलिस आचरण के सर्वथा विपरीत संवाद स्थापित करने के विधिक आरोपों में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) पूर्वी क्षेत्र भागलपुर द्वारा निलंबन विलेख की प्रविष्टि की गई है। इस प्रशासनिक कार्रवाई के बाद संपूर्ण पुलिस महकमे के भीतर हड़कंप मचा हुआ है। मुख्यालय ने साफ संकेत दिए हैं कि खाकी वर्दी की साख को बट्टा लगाने वाले और पद का दुरुपयोग करने वाले किसी भी स्तर के पदाधिकारी के प्रति शून्य सहिष्णुता (जीरो टॉलरेंस) की नीति अपनाई जाएगी।

लेटर्स की कड़ियां और नगर पुलिस अधीक्षक की सघन जांच रिपोर्ट

​इस पूरे प्रशासनिक प्रक्रम की शुरुआत तब हुई जब सोशल मीडिया के विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर शाहकुंड थानाध्यक्ष अनिल कुमार साव का एक महिला के साथ बातचीत का कथित ऑडियो तेजी से वायरल होने लगा। इस वायरल ऑडियो विन्यास के साथ ही एक लिखित शिकायती आवेदन पत्र भी इंटरनेट के गलियारों में प्रसारित किया जा रहा था, जिसमें थानाध्यक्ष के ऊपर गंभीर आरोप मढ़े गए थे। मामले की संवेदनशीलता और विभाग की धूमिल होती छवि को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) प्रमोद यादव ने त्वरित संज्ञान लिया। वरीय पुलिस अधीक्षक द्वारा इस पूरे प्रकरण की विस्तृत, निष्पक्ष और त्वरित जांच का जिम्मा नगर पुलिस अधीक्षक (सिटी एसपी) भागलपुर को सौंपा गया।

​जिम्मेदारी मिलते ही नगर पुलिस अधीक्षक ने वैज्ञानिक और भौतिक अनुसंधान की प्रविधि को सक्रिय किया। नगर पुलिस अधीक्षक द्वारा सघन और बिंदुवार जांच प्रतिवेदन जिला पुलिस मुख्यालय को सुपुर्द किया गया। इस विस्तृत जांच रिपोर्ट में यह पूरी तरह से स्पष्ट हो गया कि थानाध्यक्ष अनिल कुमार साव द्वारा अपने प्राइवेट मोबाइल नंबर का अनाधिकृत उपयोग करते हुए संबंधित महिला आवेदक को न केवल बार-बार ऑडियो कॉल किए गए, बल्कि वीडियो कॉल के माध्यम से भी संपर्क साधा गया। बातचीत के दौरान थानाध्यक्ष द्वारा पद की गरिमा का परित्याग कर आवेदिका के साथ अत्यंत अमर्यादित, अवांछित और आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया था। जांच प्रतिवेदन में कड़े शब्दों में रेखांकित किया गया कि थानाध्यक्ष का यह कृत्य पुलिस की सार्वजनिक छवि को पूरी तरह मटियामेट करने वाला, संदिग्ध आचरण को प्रदर्शित करने वाला तथा उन्हें एक अयोग्य पुलिस पदाधिकारी की श्रेणी में खड़ा करने वाला साक्ष्य है।

शिकायत पत्र का तकनीकी सच और महिला का चौंकाने वाला यू-टर्न

​नगर पुलिस अधीक्षक द्वारा संधारित की गई इस उच्चस्तरीय जांच के दौरान एक अत्यंत संवेदनशील और चौंकाने वाला मोड़ तब सामने आया, जब पुलिस टीम ने दोनों पक्षों को आमने-सामने बिठाकर उनका व्यक्तिगत और विधिक बयान दर्ज किया। इंटरनेट पर वायरल हो रहे गंभीर आरोपों वाले शिकायती पत्र के संदर्भ में जब पीड़ित महिला से कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने उस आवेदन में लिखे विलेखों को सिरे से खारिज कर दिया और अपने पूर्व के बयानों का खंडन किया। महिला ने आधिकारिक तौर पर यह विधिक स्वीकारोक्ति दर्ज कराई कि उसके साथ थानाध्यक्ष के स्तर पर किसी भी प्रकार का कोई शारीरिक या मानसिक शोषण घटित नहीं हुआ है।

​महिला ने जांच टीम के समक्ष यह बड़ा खुलासा किया कि वह केवल थानाध्यक्ष से सामान्य तौर पर फोन पर बातचीत करती थी। परंतु, प्रक्षेत्र के ही किसी कतिपय बाहरी व्यक्ति ने उसकी लाचारी और अज्ञानता का अनुचित लाभ उठाते हुए चालाकी से एक सादे कागज पर उसके अंगूठे का निशान (थम्ब इम्प्रैशन) ले लिया था। इसके बाद उस अंगूठे के निशान वाले पत्र पर थानाध्यक्ष के खिलाफ मनगढ़ंत और अतिरंजित आरोपों का विन्यास तैयार कर उसे शिकायती पत्र के रूप में वायरल कर दिया गया, जिसके भीतर दर्ज कड़ियों के बारे में महिला को कोई भौतिक जानकारी नहीं थी। महिला के इस बयान के बाद यह साफ हो गया कि जहाँ एक तरफ थानाध्यक्ष का अमर्यादित बातचीत का आचरण पूरी तरह सत्य था, वहीं दूसरी तरफ उनके खिलाफ एक सुनियोजित साजिश के तहत फर्जी शिकायती पत्र भी तैयार किया गया था।

निलंबन की शर्तें और पुलिस लाइंस भागलपुर में मुख्यालय संधारण का आदेश

​नगर पुलिस अधीक्षक की जांच रिपोर्ट और वरीय पुलिस अधीक्षक भागलपुर द्वारा की गई कड़क दंडात्मक अनुशंसा के आलोक में पुलिस महानिरीक्षक, पूर्वी क्षेत्र ने क्षेत्रादेश जारी कर थानाध्यक्ष अनिल कुमार साव पर प्रशासनिक हंटर चलाया है। जारी आदेश के तहत अनिल कुमार साव को तत्काल प्रभाव से शासकीय सेवा से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन की इस पूरी अवधि के दौरान उन्हें नियमों के तहत केवल ‘सामान्य जीवन यापन भत्ता’ (Subsistence Allowance) ही देय होगा और वे किसी भी विधिक शक्ति या आधिकारिक कार्य का संपादन नहीं कर सकेंगे।

​इसके साथ ही, उनके भौतिक आवागमन और अनुशासन को कड़ाई से नियंत्रित करने के लिए निलंबन अवधि में उनका मुख्य प्रशासनिक मुख्यालय ‘पुलिस केन्द्र (पुलिस लाइंस), भागलपुर’ निर्धारित किया गया है। उन्हें विधिक निर्देश दिया गया है कि वे बिना सक्षम प्राधिकारी की पूर्वानुमति के पुलिस लाइंस की सीमा का परित्याग नहीं करेंगे और दैनिक हाजिरी विन्यास का हिस्सा बनेंगे। आईजी कार्यालय द्वारा वरीय पुलिस अधीक्षक भागलपुर, प्रभारी सामान्य शाखा और संबंधित निलंबित अधिकारी को सूचना और आवश्यक विधिक अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए प्रेषित कर दी गई है।

साजिशकर्ताओं पर समानांतर कानूनी कार्रवाई और पुलिस का सुदृढ़ रुख

​भागलपुर जिला पुलिस मुख्यालय ने इस पूरे प्रकरण में एक अत्यंत संतुलित, न्यायप्रिय और कड़ा रुख अख्तियार किया है। सिटी एसपी शैलेंद्र सिंह के अनुसार, थानाध्यक्ष को उनके वास्तविक कदाचार यानी महिला से अमर्यादित फोन कॉल करने के विधिक अपराध के लिए ससमय सस्पेंड कर दंडित कर दिया गया है, क्योंकि खाकी की मर्यादा से समझौता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं है। परंतु, इसके समानांतर ही पुलिस बल उस कोण पर भी पूरी गहराई से अनुसंधान कर रहा है जिसमें महिला के अंगूठे का गलत इस्तेमाल कर फर्जी शिकायत पत्र का निर्माण किया गया था।

​पुलिस के तकनीकी विंग और जासूसी दस्ते उस अज्ञात व्यक्ति की पहचान करने के लिए मोबाइल लोकेशन और स्थानीय इनपुट्स को खंगाल रहे हैं, जिसने महिला को मोहरा बनाकर पुलिस तंत्र को गुमराह करने और ब्लैकमेलिंग का ताना-बाना बुना था। पुलिस प्रशासन ने साफ किया है कि किसी लोक सेवक के आचरण में दोष होने का अर्थ यह कतई नहीं है कि किसी अन्य नागरिक को कानून अपने हाथ में लेने या फर्जी दस्तावेज तैयार करने की विधिक छूट हस्तगत करा दी जाए। अंगूठे का निशान लेकर गलत तरीके से सरकारी संचिका तैयार करने वाले मुख्य साजिशकर्ता के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी और सरकारी तंत्र को गुमराह करने की सुसंगत गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज कर बहुत जल्द उसे भी सलाखों के पीछे भेजने के विलेखों को पूरा किया जाएगा।

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