भागलपुर में ‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ कार्यक्रम के तहत जनता दरबार, डीएम ने सुनी 70 लोगों की शिकायतें

भागलपुर में आम लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक संवेदनशील बनाने की दिशा में जिला प्रशासन लगातार सक्रिय नजर आ रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार को “7 निश्चय-3 से बढ़ेगा अपना बिहार” कार्यक्रम के अंतर्गत “सबका सम्मान-जीवन आसान” अभियान के तहत विशेष जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान जिलाधिकारी डॉक्टर नवल किशोर चौधरी ने समीक्षा भवन में लगभग 70 लोगों की शिकायतों और आवेदनों की सुनवाई की।

इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से लंबित पेंशन, जमीन विवाद और अन्य प्रशासनिक समस्याओं से जुड़े मामलों पर चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को कई मामलों में त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए और लोगों की समस्याओं को समयबद्ध तरीके से हल करने पर जोर दिया।

प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार यह अभियान आम लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत देने और उनकी समस्याओं का एक ही स्थान पर समाधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान समीक्षा भवन में बड़ी संख्या में लोग अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे। किसी ने वृद्धावस्था पेंशन से जुड़ी समस्या रखी तो किसी ने जमीन विवाद और दाखिल-खारिज के लंबित मामलों की शिकायत की। कई लोगों ने सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलने और विभागीय स्तर पर देरी होने की बात भी रखी।

जिलाधिकारी ने एक-एक आवेदन को गंभीरता से सुना और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि जनता से जुड़े मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल शिकायत सुनना नहीं, बल्कि उनका वास्तविक समाधान करना है।

कार्यक्रम की खास बात यह रही कि केवल जिला मुख्यालय ही नहीं, बल्कि सभी जिला स्तरीय, प्रखंड स्तरीय, अंचल कार्यालयों और थानों में भी इसी अभियान के तहत लोगों की शिकायतें सुनी गईं। विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने अपने-अपने कार्यालयों में आम नागरिकों से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया शुरू की।

“सबका सम्मान-जीवन आसान” कार्यक्रम को सरकार की “ईज ऑफ लिविंग” यानी जीवन को आसान बनाने की पहल का हिस्सा माना जा रहा है। इसका उद्देश्य आम लोगों को सरकारी सेवाओं तक अधिक सरल और सम्मानजनक पहुंच उपलब्ध कराना है।

प्रशासन की ओर से लोगों के लिए बैठने, पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की भी व्यवस्था की गई थी ताकि शिकायत लेकर आने वाले नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

कार्यक्रम में पहुंचे कई लोगों ने प्रशासन की इस पहल की सराहना की। उनका कहना था कि पहले छोटी-छोटी समस्याओं के लिए कई बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब सीधे अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने का अवसर मिल रहा है।

एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि वह लंबे समय से पेंशन शुरू नहीं होने की समस्या से परेशान थीं। जनसुनवाई में आवेदन देने के बाद उन्हें उम्मीद जगी है कि अब जल्द समाधान होगा।

इसी तरह कई ग्रामीणों ने जमीन से जुड़े विवादों पर अपनी समस्याएं रखीं। कुछ मामलों में सीमांकन, दाखिल-खारिज और ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट नहीं होने जैसी समस्याएं सामने आईं। जिलाधिकारी ने इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए राजस्व विभाग के अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के जनसुनवाई कार्यक्रम प्रशासन और जनता के बीच दूरी कम करने में मददगार साबित होते हैं। जब अधिकारी सीधे लोगों की बात सुनते हैं तो समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनती है।

भागलपुर प्रशासन द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान राज्य सरकार की उस नीति का हिस्सा है, जिसके तहत आम लोगों तक सरकारी योजनाओं और सेवाओं की पहुंच आसान बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

जिलाधिकारी डॉक्टर नवल किशोर चौधरी ने अधिकारियों से कहा कि जनता की शिकायतों को केवल औपचारिकता न समझा जाए। हर आवेदन पर गंभीरता से काम होना चाहिए ताकि लोगों का प्रशासन पर भरोसा मजबूत हो सके।

उन्होंने यह भी कहा कि कई बार छोटी प्रशासनिक लापरवाही आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती है। इसलिए विभागीय अधिकारियों को संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ काम करना होगा।

कार्यक्रम के दौरान सभी शिकायतों का विधिवत पंजीकरण किया गया और लोगों को प्राप्ति रसीद भी दी गई। इससे शिकायतकर्ताओं को यह भरोसा मिला कि उनके आवेदन आधिकारिक रूप से दर्ज किए गए हैं और उन पर कार्रवाई होगी।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में भी इस तरह की जनसुनवाई नियमित रूप से आयोजित की जाएगी ताकि लोगों की समस्याओं का स्थानीय स्तर पर त्वरित समाधान हो सके।

भागलपुर जिले में हाल के महीनों में प्रशासनिक स्तर पर कई नई पहलें देखने को मिली हैं। सरकार और जिला प्रशासन अब “जनता के बीच प्रशासन” की अवधारणा पर काम करते दिखाई दे रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार बिहार जैसे बड़े राज्य में जहां बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, वहां इस प्रकार के कार्यक्रम बेहद जरूरी हैं। इससे न केवल लोगों की समस्याओं का समाधान होता है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ती है।

“सबका सम्मान-जीवन आसान” अभियान को लेकर लोगों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। आम नागरिकों का मानना है कि अगर इस तरह की व्यवस्था नियमित रूप से जारी रही तो कई लंबित समस्याओं का समाधान तेजी से हो सकेगा।

फिलहाल जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जनता से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी और किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी या लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।

भागलपुर में आयोजित इस जनसुनवाई कार्यक्रम ने यह संकेत दिया है कि प्रशासन अब केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि सीधे जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं का समाधान करने की दिशा में काम कर रहा है।

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